वंदे मातरम् की क्लास में फंस गयी बीजेपी!  

कपिल सिब्बल के सवाल से उलट गयी राजनीति, बीजेपी को देते नहीं पड़ रहा जवाब, कांग्रेस से पूछा था पूरा क्यों नहीं गाया अब सवाल उठा खुद कितना गाया?

सिब्बल के सवाल क्या पीएम मोदी और पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेई ने राजनीतिक कार्यक्रमों में गया पूरा वंदे मातरम्

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। वंदे मातरम पर कांग्रेस की परीक्षा लेने निकली बीजेपी के सामने अब इतिहास की कॉपी खुल गई है। पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने सवालों की ऐसी घंटी बजा दी है कि कानों में सीटी बजने लगी है। कपिल सिब्बल के एक्स पर पोस्ट के बाद राष्ट्रवाद की क्लास लेने वाली बीजेपी अब खुद हाजिरी लगाने में उलझी दिखायी दे रही है। कपिल सिब्बल ने सवाल ही ऐसा पूछा कि क्या पीएम मोदी ने गुजरात के सीएम रहते हुए पूरा वंदेमातरम गाया? क्या पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेई ने पूरा वंदेमातरम गीत गाया है।
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने वंदे मातरम के केवल दो अंतरे गाने को लेकर कांग्रेस पर हमला बोलने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर पलटवार किया है। सिब्बल ने सवाल उठाया है कि जिस फैसले को आज कांग्रेस की गलती बताकर राष्ट्रवाद की राजनीति चमकाई जा रही है क्या उस कसौटी पर बीजेपी के बड़े नेता खुद भी खरे उतरते हैं। सिब्बल ने कहा है कि यदि कांग्रेस वर्किंग कमेटी के 1937 के फैसले के तहत केवल दो अंतरे गाना एंटी नेशनल है तो फिर यह सवाल भी पूछा जाना चाहिए कि क्या पीएम नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए अपने आधिकारिक कार्यक्रमों में पूरा वंदे मातरम् गाया? क्या अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री रहते हुए हमेशा पूरा वंदे मातरम् गाया? उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा है कि गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी के उस फैसले को एंटी नेशनल करार दिया जिसमें वंदे मातरम के दो अंतरे गाने की बात कही गई थी।
सिब्बल का तर्क है कि अगर बीजेपी आज इसी आधार पर कांग्रेस की राष्ट्रभक्ति पर सवाल उठा रही है तो फिर उसे अपने नेताओं और अपनी सरकारों के रिकॉर्ड पर भी जवाब देना चाहिए। यानी अब वंदे मातरम् की सियासत में बहस कांग्रेस के 1937 के फैसले से निकलकर बीजेपी के दरवाजे तक पहुंच गई है। सवाल सीधा है राष्ट्रवाद की परीक्षा के नियम सबके लिए एक जैसे होंगे या फिर विपक्ष के लिए अलग और सत्ता पक्ष के लिए अलग?

अब बीजेपी के समाने सवालों का आइना

वंदे मातरम की बहस में कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने निकली बीजेपी के सामने सवालों का ऐसा आईना आ खड़ा हुआ कि पूरी राजनीतिक कहानी ही पलट गई। अब पूछा जाने लगा कि अगर पूरा गीत गाना ही राष्ट्रभक्ति का नया पैमाना है तो इतिहास के पन्नों में झांकने का अधिकार सिर्फ सत्ता पक्ष के पास क्यों हो। इस बार इतिहास के पन्नों को खंगालते हुए कांग्रेस और दूसरे नेताओं ने सत्ता पक्ष की ओर से उछाले गये सवाल को वापस सत्ता पक्ष के पास भेज दिया। गौरतलब है कि जब सवाल वापस आता है तो वह व्हाट्सऐप फॉरवर्ड मैसेज की तरह नहीं आता।वह रजिस्टर्ड पोस्ट से आता है और उसके ऊपर लिखा होता है कि भेजने वाले को वापस कर दिया जाए। बीजेपी ने कांग्रेस से सवाल पूछा कि वंदे मातरम पूरा क्यों नहीं गाया? अब सवाल बीजेपी के दरवाजे पर खड़ा है और कह रहा है कि पहले आप बताइए आपकी पूरी हिस्ट्री में किसने कितना गाया? और यही इस पूरी कहानी का असली मजा है। जिस राष्ट्रवाद को लेकर विपक्ष की क्लास लगाई जा रही थी उसी क्लास में अब मास्टर साहब की अपनी कॉपी चेक होने लगी है। जिस स्केल से कांग्रेस की देशभक्ति नापी जा रही थी वही स्केल घूमकर सत्ता पक्ष की मेज पर पहुंच गया है।

मामला सिर्फ वंदे मातरम् का नहीं रहा

अब सवाल यह है कि क्या भारतीय राजनीति में राष्ट्रभक्ति भी फुल वर्जन और शॉर्ट वर्जन में बांटी जाएगी? क्या देशप्रेम के लिए भी कोई प्लेलिस्ट बनेगी? क्या चुनाव आयोग से पहले कोई राष्ट्रभक्ति आयोग बनेगा? क्या नेताओं को मंच पर जाने से पहले साउंड टेस्ट देना होगा? माइक चेक वन टू थ्री वंदे मातरम पीछे से आवाज आएगी स्टॉप आपने दूसरी लाइन पर सांस क्यों ली? संदिग्ध मामला है। बीजेपी ने वंदे मातरम पर कांग्रेस को घेरने की कोशिश की अब उसी वंदे मातरम उससे पूछे गये सवालों पर बचती नजर आ रही है।

कांग्रेस से सवाल पूछा गया कि पूरा वंदे मातरम् क्यों नहीं गाया?

बीजेपी लंबे समय से राष्ट्रवाद के मुददे पर कांग्रेस को घेरती चली आयी है। इस बार भी कुछ ऐसा ही ताना बाना बुना गया। कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में सिर्फ दो छंद गाये जाने वाले वंदे मातरम के प्रस्ताव वाली लाइन को बीजेपी ने पकड़ लिया और राष्ट्रवाद के नैरेटिव में कांग्रेस को उलझाने के लिए इसे एंटी नेशनल बता दिया गया। सवाल पूछने वालों ने ऐसा माहौल बनाया कि मानो देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी ने किसी गुप्त तहखाने से राष्ट्रभक्ति की अधूरी पंक्तियां बरामद कर ली हों। लगा कि अब देश की सारी समस्याएं किनारे रख दीजिए। महंगाई बाद में देखेंगे बेरोजगारी का नंबर बाद में आएगा। शिक्षा स्वास्थ्य, सडक़, किसान सब अपनी अपनी फाइल लेकर वेटिंग रूम में बैठें। पहले राष्ट्रभक्ति का सिंगिंग टेस्ट होगा और नियम भी बड़े शानदार होंगे बीजेपी पूछेगी कितना गाया? विपक्ष जवाब देगा आपने कितना गाया? बीजेपी कहेगी मुद्दा मत भटकाइए विपक्ष कहेगा आईना देखिए!

भारतीय राजनीति में मुद्दा जरूरी है

राजनीति में विरोधी को घेरने के लिए मुद्दा चाहिए। मुद्दा नहीं मिले तो पुरानी फाइल खोलो फाइल में कुछ न मिले तो इतिहास की अलमारी खंगालो वहां भी कुछ न मिले तो किसी बयान की आधी लाइन पकड़ लो और अगर कुछ भी हाथ न आए तो राष्ट्रवाद की तुरही बजा दो। तुरही बजते ही पूरा माहौल बदल जाता है। अब बहस यह नहीं होती कि देश में क्या हो रहा है। बहस यह होती है कि देश से प्यार कौन ज्यादा करता है। और देशप्रेम की यह प्रतियोगिता बड़ी दिलचस्प है। इसमें जज ही खिलाड़ी है खिलाड़ी ही कमेंटेटर है कमेंटेटर ही अंपायर है और जरूरत पडऩे पर फैसला बदलने वाला थर्ड अंपायर भी वही।

पैलेट गन मामले में डीसीपी से मिले राहुल गांधी

एफआईआर दर्ज नहीं होने पर धरने पर बैठे

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान हुए पैलेट गन के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज शुक्रवार को पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के डीसीपी ऑफिस पहुंचे। वहीं, इस दौरान राहुल गांधी ने घायल छात्र का हवाला देते हुए इस मामले में डीसीपी से कार्रवाई की मांग की। हालांकि उन्हें डीसीपी के ऑफिस से निराश ही लौटना पड़ा। संसद मार्ग से बाहर आए राहुल गांधी ने कार्रवाई नहीं होने पर धरना शुरू कर दिया। डीसीपी के कार्यालय के बाहर ही राहुल गांधी का धरना चल रहा है। धरने में राहुल गांधी के साथ साहिल लोहचब भी हैं।
जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी ने शुक्रवार को डीसीपी से मिलकर पैलेट गन के मुद्दे पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। लेकिन उनकी शिकायत पर मामला दर्ज नहीं किया गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुणे में केवल महिला श्रोताओं के लिए आयोजित होने वाले छात्रों की गूंज कार्यक्रम से पहले एक वीडियो साझा कर विचार मांगे हैं। उन्होंने महिलाओं से उनके संघर्ष, सपनों, समाज के व्यवहार और हिंसा जैसी परिस्थितियों पर खुलकर विचार साझा करने का आह्वान किया। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि महिलाओं के सामने मौजूद परिस्थितियों को बेहतर बनाने के लिए ऐसी चर्चा होना बेहद आवश्यक है। राहुल ने कहा कि भारतीय महिलाओं के सामने मौजूद परिस्थितियों को बेहतर बनाने के लिए इस तरह की चर्चा जरूरी है। कांग्रेस नेता पुणे में अपना कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ आयोजित करने जा रहे हैं, जिसमें केवल महिला श्रोता होंगी।

पुणे में केवल महिलाओं के लिए ‘छात्रों की गूंज’

लोकसभा में विपक्ष के नेता ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि पुणे में केवल महिलाओं के लिए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘उस कार्यक्रम की प्रस्तुति तैयार करते समय, मैंने अपनी टीम की महिलाओं से 2०-3० मिनट का समय निकालकर इस पर अपने विचार साझा करने को कहा कि एक भारतीय महिला होने के नाते वे क्या महसूस करती हैं। उन्होंने इस बात पर विचार साझा किए कि वे भारतीय महिला होने के बारे में क्या महसूस करती हैं, समाज उनके साथ कैसा व्यवहार करता है, अच्छी चीजें क्या हैं और बुरी बातें क्या हैं।

महिलाओं की प्रतिक्रियाएं भी पढक़र सुनाई

उन्होंने कुछ महिलाओं की प्रतिक्रियाएं भी पढक़र सुनाईं। वीडियो के साथ ‘एक्स’ पर पोस्ट में राहुल ने पूछा कि भारतीय महिला होने का क्या मतलब है। उन्होंने कहा, ‘मैं जानना चाहता हूं कि आप क्या महसूस करती हैं। समाज की नहीं, परिवार की नहीं, आपकी अपनी आवाज क्या कहती है? आपके संघर्ष, आपकी रुकावटें, आपका नजरिया और आपके सपने। आपकी कहानी क्या है? राहुल ने कहा, ‘मुझे लगा कि यह एक अच्छा अभ्यास था, जिसने मुझे आपकी भावनाओं को समझने में मदद की। हमारी टीम ने तय किया कि क्यों न इसे सभी के लिए खोला जाए और उन महिलाओं से पूछा जाए, जो इस कार्यक्रम में आ रही हैं या इसे देखने जा रही हैं, कि वे एक भारतीय महिला होने के बारे में क्या महसूस करती हैं।

झारखंड में सीजीएल और सीडीपीओ नियुक्ति रद करने के आदेश पर रोक

हाईकोर्ट का राज्य सरकार से मामले पर जवाब दाखिल करने का निर्देश
अगली सुनवाई 15 सितंबर को

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
रांची। झारखंड हाई कोर्ट से सीजीएल और सीडीपीओ परीक्षा से जुड़े अभ्यर्थियों और चयनित कर्मियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अदालत ने झारखंड में सीजीएल परीक्षा और सीडीपीओ की नियुक्ति को रद करने के आदेश पर रोक लगा दी है।
हाई कोर्ट में सीजीएल परीक्षा रद करने के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह अंतरिम राहत दी है। गुरुवार को भी तीन याचिकाओं पर राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगाई गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को इस पूरे मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए आगामी 15 सितंबर 26 की तिथि निर्धारित की है। सरकार के जवाब आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर आगे की प्रशासनिक और कानूनी स्थिति क्या रहने वाली है। दूसरी ओर, झारखंड हाई कोर्ट में पीसीसीएफ नियुक्ति मामले को लेकर भी सुनवाई हुई। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए सोमवार की तिथि तय की है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि चूंकि अभी इस मामले में अंतिम नियुक्ति नहीं हुई है, इसलिए इस पर सोमवार को विस्तार से सुनवाई की जाएगी।

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