अपने ही विभाग के आगे विवश हैं फणनवीस
सीएम के आदेश के बाद भी महाराष्ट्र का नगर विकास विभाग मौन

- अजमेरा ग्रुप की कुप्रबंधन से लोगों को नहीं मिल रही रोशनी
- सिटी मॉल के पीवीआर में पोस्टरों से पाटकर किया अंधेरा
- बीएमसी ने भी किनारा किया
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। भाजपा के दिग्गज नेता व महाराष्ट्र के सीएम देवेन्द्र फणनवीस जिनको अगले पीएम के रूप में चर्चा में भी देखा जा रहा है वे अपने राज्य केनगर विकास विभाग केआगे विवश हैं। दरअसल पिछले दिनों 4पीएम केसंपादक, वरिष्ठ पत्रकार व फिल्ममेकर संजय शर्मा ने अपने कार्यालय जो कि ओशिवारा में है वहां पर रोशनी की कमी की शिकायत सीएम व बीएमसी को की थी। उन्होंने बताया था सिटी मॉल में ओशिवारा के ऑफिस के सामने मिर्जापुर मूवी के पोस्टर खिड़कियों केसामने लगा दिए गये हैं। इसकी वजह से उसके पास केसारे ऑफि़सों की प्राकृतिक रोशनी बंद हो गयी है। जब लोगों ने मॉल प्रबंधन से इसकों हटाने के लिए कहा तो प्रबंध तंत्र इन पोस्टरों को हटाने को तैयार नहीं हुआ।
सबसे बड़ी बात सीएम से शिकायत व आश्वासन के बाद भी सीएम के नगर विकास विभाग ने 72 घंटों बाद भी कोई कार्रवाई नही की। इसी से पता चलता है कि इस विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ों की पैठ कितनी गहरी है कि सीएम की भी नहीं सुनाता है। आपको बता दें सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश है कि कोई भी व्यक्ति या संस्था किसी की रोशनी नहीं रोक सकता है। सिटी मॉल ओशिवारा प्रबंधन व पीवीआर की मनमानी के चलते वहां के आस-पास के कार्यालय केलोग परेशान है। इस बाबत जब बीएमसी कमिश्नर को मेल किया गया तो बताया गया जांच कराई जा रही है। पर कई दिनों के बाद अब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। जानकारी के बाद पता चला कि मुंबई के कई इलाकों में अवैध पार्र्किंग, होर्डिंग लगीं हैं। पर करोड़ो की अवैध की कमाई के चलते बीएमसी कोई कार्रवाई नहीं करता है।
पुलिस के सामने आश्वासन के बाद भी अजमेरा प्रबंध मुकरा
वरिष्ठ पत्रकार संजय शर्मा ने बताया कि उन्होंने जब इस समस्या के लिए सीएम देवेन्द्र फणनवीस को मेल से शिकायत की तो तुरंत उनकेकार्यालय से जवाब आया कि आपकी समस्या के बारे में नगरविकास विभाग को जानकारी दे दी गई है आपकी समस्या का निराकरण हो जाएगा। उसके मैने पुलिस में भी शिकायत की। बाद कार्यालय में पुलिस आई। पुलिस ने कहा रोशनी बंद करना अनुचित है। अजमेरा केमैनेजर ने पुलिस के सामने कहा का तुरंत हट जाएगा। पर पुलिस केजाने के बाद वह मुकर गए बोले इस पोस्टर को हटा नहीं पाएंगे इससे काफी रेवेन्यू मिलता है।

अन्य लोगों ने भी सीएम से की गुहार
अन्य भुक्त भोगियों ने इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों को की है पर कोई सुनवाई अभी तक नहीं हुई है। बता दें सूत्रों से पता चला है कि इन पोस्टरों व प्रचार केलिए बहुत पैसा मिला है इस लिए वे इसने नहीं हटा रहे है। पर उनकी इस अंधेरगर्दी का शिकार वहां केलोग हो रहे हैं। मॉल व पीवीआर प्रबंधन की ओर से तो गुंडागर्दी जारी है। लोगों ने महाराष्ट्र केसीएम देवेन्द्र फणनवीस तत्काल इन पोस्टरों को हटाने के आदेश देने की अपील की है। उधर पीडि़त लोगों का दावा है कि कुछ भी हो जाए बीएमसी कोई कार्रवाई नहीं करेगी क्योंकि प्रचार कंपनी बहुत उन्हें उपकृत करती है।
बेंगलुरु के एक बड़े वित्तीय घोटाले में भी फंसा है अजमेरा ग्रुप
अजमेरा ग्रुप से जुड़े विवाद का मुख्य मामला बेंगलुरु का एक बड़ा वित्तीय घोटाला (पोंजी स्कीम) है। जून 26 में, पीएमएलए स्पेशल कोर्ट ने ठगी के शिकार निवेशकों को राहत देते हुए अजमेरा ग्रुप की कुर्क की गई 8.41 करोड़ रुपए की संपत्ति पीडि़तों को वापस लौटाने का ऐतिहासिक आदेश दिया। अजमेरा ग्रुप और एमएफ एंटरप्राइजेज ने बिना किसी लाइसेंस या आरबीआई/सेबी की अनुमति के जनता से पैसे जमा करवाए । भरकम रिटर्न का झूठा लालच दिया गया था। आरोप था कि कुल 25००.6 करोड़ रुपए अवैध रूप से जुटाए गए, जिसमें से करीब 72.9 करोड़ रुपए निवेशकों को वापस नहीं लौटाए गए और गबन कर लिए गए। प्रवर्तन निदेशालय 8.41 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियां कुर्क की थीं।
मुंबई में कई विवाद
मुंबई के पास कल्याण (पश्चिम) स्थि (योगीधाम क्षेत्र) में 18 दिसंबर 24 की रात को अगरबत्ती के धुएं को लेकर एक विवाद हुआ था, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गया। इस घटना में तीन लोग घायल हो गए थे और यह मामला राजनीतिक रूप से काफी चर्चा में आया था। फ्लैट के बाहर अगरबत्ती जलाने और उसके धुएं को लेकर पड़ोसी लता कलविकटे और अखिलेश शुक्ला (तथा उनकी पत्नी गीता शुक्ला) के बीच बहस हुई थी। यह बहस जल्द ही मारपीट में बदल गई। आरोप है कि मुख्य आरोपी अखिलेश शुक्ला और बाहर से बुलाए गए लोगों ने स्थानीय मराठी परिवार (देशमुख परिवार) पर हमला किया, जिसमें अभिजीत देशमुख को सिर पर गंभीर चोटें आईं।



