सोहराबुद्दीन केस में नया मोड़, 2005 फर्जी एनकाउंटर केस फिर सुर्खियों में! 

सोहराबुद्दीन शेख 2005 एनकाउंटर केस से जुड़ी कानूनी लड़ाई एक बार फिर चर्चा में है... हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः 2005 के सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है.. गुजरात के गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी.. और उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की मौत से जुड़े इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.. सोहराबुद्दीन शेख के छोटे भाई नयाबुद्दीन शेख ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.. इस याचिका में बॉम्बे हाई कोर्ट के 7 मई के उस आदेश को चुनौती दी गई है..

जिसमें 22 आरोपियों को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा गया था.. इस मामले में 22 आरोपी थे.. इनमें गुजरात और राजस्थान पुलिस के 21 अधिकारी शामिल थे.. आरोप था कि पुलिस की टीम ने सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी.. और उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति को हिरासत में लिया.. और बाद में उनकी मौत को मुठभेड़ का रूप दिया गया.. जानकारी के मुताबिक 22वां आरोपी एक फार्महाउस का मालिक था.. जहां कथित तौर पर सोहराबुद्दीन और कौसर बी को रखा गया था..

बॉम्बे हाई कोर्ट ने आरोपियों को बरी करने के फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को पर्याप्त सबूतों के साथ साबित नहीं कर पाया.. कोर्ट के मुताबिक पूरा मामला परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित था.. और घटनाओं को जोड़ने वाली कई महत्वपूर्ण कड़ियां मौजूद नहीं थीं.. हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि उसे ट्रायल कोर्ट के फैसले में दखल देने का कोई ठोस आधार नहीं मिला.. मुंबई की स्पेशल CBI कोर्ट ने दिसंबर 2018 में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था.. इसके खिलाफ सोहराबुद्दीन के भाइयों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की थी..

हाई कोर्ट ने इन अपीलों को खारिज करते हुए कहा था कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि सोहराबुद्दीन शेख.. और कौसर बी का गुजरात और राजस्थान पुलिस ने अपहरण किया था.. इसके साथ ही अभियोजन पक्ष कथित फर्जी एनकाउंटर के पीछे की साजिश और मकसद को भी साबित नहीं कर पाया.. वहीं मामले में एक अहम बात यह भी रही कि अभियोजन पक्ष के 92 गवाह बाद में अपने पहले के बयानों से मुकर गए थे.. हाई कोर्ट ने कहा था कि केवल इस वजह से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि ट्रायल सही तरीके से नहीं चला..

स्पेशल ट्रायल कोर्ट ने भी आरोपियों को बरी करते समय कहा था कि अभियोजन पक्ष कोई ठोस मामला साबित नहीं कर पाया.. कोर्ट के सामने ऐसा पर्याप्त सबूत नहीं था.. जिससे यह साबित हो सके कि सोहराबुद्दीन.. और अन्य लोगों को मारने की कोई साजिश रची गई थी.. और इसमें आरोपी अधिकारियों की कोई भूमिका थी.. सोहराबुद्दीन के भाइयों ने अप्रैल 2019 में हाई कोर्ट का रुख किया था.. उनकी अपील में ट्रायल के दौरान हुई कथित कमियों का भी जिक्र किया गया था.. उन्होंने कुछ ऐसे मामलों का हवाला दिया था.. जहां गवाहों ने बाद में दावा किया कि स्पेशल कोर्ट ने उनकी गवाही को सही तरीके से दर्ज नहीं किया..

वहीं इस मामले में CBI की भूमिका भी काफी अहम रही है.. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच CBI को सौंपी गई थी.. बाद में निष्पक्ष सुनवाई के लिए मामले का ट्रायल गुजरात से मुंबई स्थानांतरित कर दिया गया था.. पिछले साल CBI ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कहा था कि वह आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को स्वीकार कर चुकी है.. और उसके खिलाफ आगे अपील करने की योजना नहीं है.. ऐसे में अब सोहराबुद्दीन के भाई की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका इस मामले को एक बार फिर देश की सबसे बड़ी अदालत के सामने ले आई है..

 

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