महंगाई को लेकर खरगे का बीजेपी पर हमला, बोले- जनता परेशान, सरकार बेतुकी बातें कर रही

खरगे ने कहा कि देश में पिछले 12 साल से भाजपा सरकार है और 'अच्छे दिनों' का आलम ये है कि कभी दाल, कभी सब्जी, कभी तेल, कभी चीनी तो कभी प्याज आम आदमी का बजट बिगाड़ देती है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: खरगे ने कहा कि देश में पिछले 12 साल से भाजपा सरकार है और ‘अच्छे दिनों’ का आलम ये है कि कभी दाल, कभी सब्जी, कभी तेल, कभी चीनी तो कभी प्याज आम आदमी का बजट बिगाड़ देती है.

देश में बढ़ती महंगाई को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि 12 साल से भाजपा सरकार है और ‘अच्छे दिनों’ का आलम ये है कि कभी दाल, कभी सब्जी कभी तेल, कभी चीनी आम आदमी का बजट बिगाड़ देती है.

खरगे ने कहा कि देश में महंगाई की मार है लेकिन बीजेपी ध्यान भटकाने वाले स्टंट्स और बेतुकी बातों में उलझाकर अपनी करतूतों से पीछा छुड़ाना चाहती है लेकिन कांग्रेस महंगाई पर सवाल पूछती रहेगी. खरगे ने अपने ट्वीट में प्याज, चीनी, तेल समेत कई चीजों के बढ़ते दामों का जिक्र किया है.

आसमान छू रहे रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम

खरगे ने इस ट्वीट के जरिए ये समझाने की कोशिश की है कि मोदी सरकार के आने से पहले यानी मई 2013 में किन चीजों की क्या कीमत थी. और अब यानी 2026 में उसकी कीमत क्या है और उसमें कितने प्रतिशत का इजाफा हुआ है. मई 2013 की तुलना में अगस्त 2026 तक रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं.

टमाटर: 17.50 से सीधा 120.00 रुपये (585% की भारी बढ़ोतरी)

आटा: 21.00 से बढ़कर 69.00 रुपये (228% की बढ़ोतरी)

प्याज: 23.00 से बढ़कर 73.00 रुपये (217% की बढ़ोतरी)

सरसों का तेल: 102.00 से 263.00 रुपये (157% की बढ़ोतरी)

दालें (तूअर/उड़द/चना): औसतन 140 से 153 रुपये फीसदी तक महंगी

सबसे ज्यादा मार हरी सब्जियों और बुनियादी खाद्य पदार्थों पर पड़ी है. 13 साल पहले जो टमाटर 17.50 रुपये प्रति किलो मिलता था, वह आज 120 पर पहुंच चुका है. इसी तरह प्याज 217 प्रतिशत और आटा 228 फीसदी महंगा हो गया है.

चीनी, तेल की कीमतें दोगुनी से भी अधिक

दूध, चीनी, तेल और दालों जैसी बुनियादी चीजों की कीमतें दोगुनी से भी अधिक हो चुकी हैं. खरगे का कहना है कि जब भी जनता इन बुनियादी हकों और महंगाई पर सवाल उठाती है, तो इसे बेतुके बयानों और स्टंट्स की तरफ मोड़ दिया जाता है. यह आंकड़े साफ बताते हैं कि खोखले दावों से पेट नहीं भरता, जनता को अब ठोस समाधान और राहत की जरूरत है.

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