UN समिति की रिपोर्ट खारिज, विदेश मंत्रालय बोला- राजनीति से प्रेरित है पूरा मामला
MEA ने बताया कि भारत ने समीक्षा बैठक के दौरान संवैधानिक सुरक्षा उपायों, मजबूत कानूनी ढांचे, बहुलवाद और वंचित समुदायों की सुरक्षा की कोशिशों को सामने रखा.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: MEA ने बताया कि भारत ने समीक्षा बैठक के दौरान संवैधानिक सुरक्षा उपायों, मजबूत कानूनी ढांचे, बहुलवाद और वंचित समुदायों की सुरक्षा की कोशिशों को सामने रखा.
संयुक्त राष्ट्र की ‘नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति’ (UNCERD) की भारत को लेकर जारी की गई रिपोर्ट को केंद्र सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय ने रिपोर्ट पर पलटवार करते हुए कहा कि हम राजनीतिक रूप से प्रेरित और दुर्भावनापूर्ण संदर्भों को खारिज करते हैं. साथ ही यह भी याद दिलाया कि CERD की स्थापना में भारत की अहम भूमिका रही है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने (UN Committee on the Elimination of Racial Discrimination, UNCERD) प्रेस रिलीज जारी कर रिपोर्ट में किए गए ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित और अत्यंत दुर्भावनापूर्ण’ संदर्भों को पूरी तरह खारिज कर दिया. जायसवाल ने कहा कि ऐसे संदर्भों को जिस अवमानना के वे हकदार हैं, उसी के साथ खारिज किया जाता है.
MEA ने यह भी बताया कि जिनेवा स्थित भारतीय मिशन CERD Review के बाद पहले ही विस्तृत प्रेस रिलीज जारी कर चुका है. जायसवाल ने कहा कि 11-12 अगस्त को जिनेवा में हुई ICERD की 11वीं आवधिक समीक्षा (Periodic Review) एक नियमित ट्रीटी बॉडी रिव्यू (Treaty Body Review थी) हुई थी जिसमें, भारत ने रचनात्मक भावना के साथ हिस्सा लिया था.
विदेश मंत्रालय ने रिपोर्ट को लेकर क्या कहा
उन्होंने बताया कि भारत ने समीक्षा बैठक के दौरान संवैधानिक सुरक्षा उपायों, मजबूत कानूनी ढांचे, बहुलवाद और वंचित समुदायों की सुरक्षा की कोशिशों को सामने रखा. साथ ही कहा कि नस्लीय भेदभाव से लड़ने की हमारी प्रतिबद्धता अटूट है.
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में बताया गया कि भारत ने यह भी याद दिलाया कि 1960 के दशक में ICERD के निर्माण और मसौदा तैयार करने में भारत की अहम भूमिका रही थी. MEA के मुताबिक, भारत के अंतर-मंत्रालयी प्रतिनिधिमंडल ने समीक्षा के दौरान ही व्यापक सामान्यीकरण, बिना पुष्ट प्रमाण के आरोपों और Convention के अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़ने की प्रवृत्ति को खारिज कर दिया था. भारत ने यह भी कहा कि समिति की टिप्पणियों का जवाब स्थापित प्रक्रिया के तहत दिया जाएगा.
रिपोर्ट में UN समिति ने क्या कहा
इससे पहले जिनेवा UN समिति ने अपने हालिया सेशन में फिनलैंड, होंडुरास, भारत और कुवैत की समीक्षा करने के बाद अपनी रिपोर्ट जारी की. रिपोर्ट में भारत के लोगों के एक बड़े हिस्से, जिसमें अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, दलित और रोहिंग्या शरणार्थी शामिल हैं- के मानवाधिकारों के उल्लंघन की खबरों को लेकर “गंभीर चिंता” जताई गई. साथ ही समिति ने यह भी कहा कि भारती ऐसे सभी आरोपों की तुरंत, गहन और निष्पक्ष जांच करे और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करे.
समिति ने यह भी जिक्र किया कि इन समुदायों को “नस्लीय आधार पर हिंसा, बल का अत्यधिक प्रयोग, गैर-न्यायिक हत्याएं, उचित प्रक्रिया के बिना मनमानी और लंबी हिरासत, प्रताड़ना, दुर्व्यवहार और यौन हिंसा” का सामना करना पड़ रहा है.



