हेलिकॉप्टर इंजन में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, HAL-Safran की बड़ी डील

भारत ने HAL और Safran के SAFHAL JV के तहत 'अरावली' नामक 3,500-4,000 shp हाई-पावर हेलिकॉप्टर इंजन के संयुक्त विकास का करार किया है, यह इंजन IMRH और DBMRH में इस्तेमाल होगा.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भारत ने HAL और Safran के SAFHAL JV के तहत ‘अरावली’ नामक 3,500-4,000 shp हाई-पावर हेलिकॉप्टर इंजन के संयुक्त विकास का करार किया है, यह इंजन IMRH और DBMRH में इस्तेमाल होगा.

भारत अब हाई-पावर हेलिकॉप्टर इंजन बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और फ्रांस की Safran Helicopter Engines ने 50:50 जॉइंट वेंचर SAFHAL Helicopter Engines के जरिए नए-generation हेलिकॉप्टर इंजन अरावली के संयुक्त विकास का करार किया है.

3,500 से 4,000 हॉर्सपावर का इंजन

अरावली 3,500 से 4,000 shp क्षमता वाला हाई-पावर हेलिकॉप्टर इंजन होगा. इसे भारत में ही डिजाइन और विकसित किया जाएगा. यह पहली बार है जब भारत में इतने ज्यादा पावर वाले हेलिकॉप्टर इंजन का संयुक्त रूप से विकास किया जा रहा है.

अब तक भारत में इस तरह के इंजन के मामले में लाइसेंस्ड प्रोडक्शन पर ज्यादा निर्भरता रही है. अरावली प्रोग्राम भारत को लाइसेंस्ड प्रोडक्शन से आगे ले जाकर इंजन के डिजाइन और डेवलपमेंट की स्वदेशी क्षमता विकसित करने में मदद करेगा.

IMRH और नौसेना के हेलिकॉप्टर में लगेगा

अरावली इंजन को HAL के 13 टन के Indian Multi-Role Helicopter यानी IMRH में इस्तेमाल किया जाएगा. इसका नेवल वर्जन Deck-Based Multi-Role Helicopter यानी DBMRH भी इसी इंजन से लैस होगा.

इन हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल सिर्फ सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में ऑफशोर ट्रांसपोर्ट, यूटिलिटी मिशन और VVIP ट्रांसपोर्ट जैसे कामों में भी इनके इस्तेमाल की संभावनाएं हैं.

टुमकुरु में होगा इंजन का निर्माण

अरावली इंजन का निर्माण कर्नाटक के टुमकुरु में SAFHAL की सुविधा में किया जाएगा. प्रोग्राम के तहत HAL को इंजन की कई महत्वपूर्ण तकनीकों में विशेषज्ञता हासिल होगी.

इसमें High Pressure Compressor, Power Turbine, Fuel और Oil Systems, Accessory Gearbox और Engine External Systems जैसी अहम तकनीकें शामिल हैं.

भारतीय इंजीनियरों को मिलेगी बड़ी तकनीकी एक्सपोजर

इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि भारतीय इंजीनियर पूरे डेवलपमेंट प्रोग्राम के दौरान Safran के इंजीनियरों के साथ मिलकर काम करेंगे. इससे भारतीय इंजीनियरों को इंटरनेशनल डिजाइन मेथड, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन की प्रक्रियाओं का सीधा अनुभव मिलेगा.

HAL जिन हिस्सों की डिजाइन और डेवलपमेंट करेगा, उनमें उसे तकनीकी विशेषज्ञता और बौद्धिक संपदा यानी IP भी हासिल होगी. इससे भविष्य में भारत के अपने स्वदेशी एयरो-इंजन प्रोग्राम के लिए मजबूत आधार तैयार हो सकता है.

भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री को भी फायदा

अरावली प्रोग्राम का फायदा सिर्फ HAL तक सीमित नहीं रहेगा. इससे भारतीय कंपनियों के लिए एडवांस्ड इंजन मैन्युफैक्चरिंग में नए अवसर पैदा होंगे. रॉ-मटेरियल, प्रिसीजन मशीनिंग, कास्टिंग और दूसरे हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में घरेलू कंपनियों की भागीदारी बढ़ सकती है. साथ ही भारत में MRO यानी Maintenance, Repair and Overhaul क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा.

2032-33 तक पूरा होने का लक्ष्य

अरावली इंजन का डिजाइन और डेवलपमेंट 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं IMRH और DBMRH प्रोग्राम के लिए AON और CCS की मंजूरी का इंतजार है.

कुल मिलाकर, अरावली सिर्फ एक हेलिकॉप्टर इंजन प्रोग्राम नहीं है, बल्कि भारत के लिए हाई-पावर एयरो-इंजन टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम है. इससे भविष्य की स्वदेशी रोटरक्राफ्ट और एयरो-इंजन तकनीकों के विकास के लिए मजबूत तकनीकी आधार तैयार होने की उम्मीद है.

Related Articles

Back to top button