रत्न भंडार में सुरक्षित हैं कीमती आभूषण, 1978 की सूची से किया जा रहा मिलान
IAS अधिकारी अरबिंद पाधी 25 मार्च को इन्वेंट्री का काम शुरू होने के बाद से ही पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं. पुरी मंदिर प्रशासन 48 साल के अंतराल के बाद अपने रत्न भंडार की इन्वेंट्री करवा रहा है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क:IAS अधिकारी अरबिंद पाधी 25 मार्च को इन्वेंट्री का काम शुरू होने के बाद से ही पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं. पुरी मंदिर प्रशासन 48 साल के अंतराल के बाद अपने रत्न भंडार की इन्वेंट्री करवा रहा है.
ओडिशा में सालाना रथ यात्रा के बाद पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की इन्वेंट्री (सामान की गिनती और लिस्टिंग) का काम फिर से शुरू कर दिया गया है. मंदिर से जुड़े एक सीनियर अधिकारी ने सोमवार को बताया कि अब तक खजाने में रखे गहने और कीमती सामान 1978 की इन्वेंट्री लिस्ट से काफी मेल खाते हैं.
इन्वेंट्री की यह प्रक्रिया राज्य सरकार की ओर से मंजूर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (SOP) का सख्ती से पालन करते हुए, CCTV निगरानी में और मजिस्ट्रेट तथा अधिकृत लोगों की मौजूदगी में की जा रही है. इससे पहले पिछली इन्वेंट्री 19 जुलाई को कराई गई थी, जब रथ यात्रा के दौरान देवी-देवता श्री गुंडिचा मंदिर में थे.
48 साल बाद रत्न भंडार की हो रही पड़ताल
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी ने कहा, “हम सोमवार सुबह 11.30 बजे खजाने के भीतरी कक्ष में गए और शाम 6.55 बजे तक इन्वेंट्री का काम चलता रहा.” IAS अधिकारी पाधी 25 मार्च को इन्वेंट्री का काम शुरू होने के बाद से ही पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं. मंदिर प्रशासन 48 साल के अंतराल के बाद अपने रत्न भंडार की इन्वेंट्री कर रहा है.
पाधी ने कहा कि प्रशासन को खजाने के भीतरी कक्ष में रखे 3 बक्सों की इन्वेंट्री के लिए राज्य सरकार से एक अतिरिक्त SOP मंजूर कराने की जरूरत है. उन्होंने कहा, “इनके आकार को देखते हुए इनकी गिनती भीतरी रत्न भंडार के अंदर नहीं की जा सकी. इसलिए, हम खाता सेजा घर (खजाने के पास एक बड़ा कमरा) में इन्वेंट्री करने की योजना बना रहे हैं.”
भंडार में एंट्री से पहले कड़ी सुरक्षा, SOP का पालन
पाधी ने कहा कि खुद उनके सहित सभी अधिकृत लोगों की रत्न भंडार में प्रवेश करने से पहले और बाद में पूरी सुरक्षा जांच की जाती है. इन्वेंट्री का काम कड़ी सुरक्षा और SOP का पालन करते हुए जारी है.
उन्होंने बताया, “पारदर्शिता बनाए रखने के लिए, सभी कीमती सामानों का एडवांस्ड 3D मैपिंग के साथ-साथ हाई-डेफिनिशन फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी का इस्तेमाल करके डिजिटल रूप से डॉक्यूमेंटेशन किया जा रहा है.”
यह पूछे जाने पर कि यह प्रक्रिया कब तक पूरी होने की उम्मीद है, पाधी ने बताया, “हम इस प्रक्रिया को पूरा करने की जल्दी में नहीं हैं, बल्कि प्रक्रिया की सटीकता और पारदर्शिता पर ज़ोर दे रहे हैं. 1978 में इसमें 72 दिन लगे थे. इस बार, जेमोलॉजिस्ट (रत्न विशेषज्ञों) को शामिल करके और तकनीक का इस्तेमाल करके इन्वेंट्री बहुत सटीकता से की जा रही है.” उन्होंने कहा कि कीमती चीजों में कई तरह के पत्थर जड़े हुए हैं और उनकी जांच की जा रही है.
इन्वेंट्री के काम में जेमोलॉजिस्ट कर रहे योगदान
SJTA अधिकारी ने कहा कि इन्वेंट्री के काम में जेमोलॉजिस्ट की अहम भूमिका है, क्योंकि कुछ चीजों में हीरे समेत कई कीमती पत्थर जड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि रत्न भंडार के अंदर इन्वेंट्री का काम चलने के दौरान, देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना बिना किसी रुकावट के जारी रखने और भक्तों को ‘बाहर कथा’ (बाहरी कक्ष) से आसानी से दर्शन कराने को लेकर सभी इंतजाम कर लिए गए हैं.
पढ़ी ने बताया कि आज (1 सितंबर) को भी इन्वेंट्री का काम किया जाएगा. इस बीच, SJTA अधिकारियों ने बताया कि मंदिर के ‘नाट मंडप’ यानी नृत्य कक्ष में एयर-कंडीशनिंग की सुविधा लगाई गई है, ताकि भक्तों को मंदिर के अंदर जाने में किसी तरह की कोई दिक्कत न हो. उन्हें आराम मिले और गर्मी तथा उमस भरे मौसम से सभी को राहत मिल सके.



