ऑपरेशन सिंदूर के ‘हीरो’ को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बने राम मंदिर ट्रस्ट के CEO

पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए CEO बने हैं. वह देश के लिए कई बड़े मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर सबसे खास है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए CEO बने हैं. वह देश के लिए कई बड़े मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर सबसे खास है.

5 मुख्य बातें

अयोध्या में लंबी बैठक के बाद CEO के नाम की घोषणा

पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO

सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से भी सम्मानित हैं जितेंद्र मिश्रा

राम मंदिर ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों की भी हुई एंट्री

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को पहले CEO मिल गए. पिछले कई दिनों से इस सवाल की चर्चा हो रही थी और कई नामों को लेकर चर्चा हो रही थी. अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन बुधवार की शाम इसपर विराम लग गया.

ये तय हो गया कि पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले CEO होंगे. ट्रस्ट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी. अयोध्या की मणिराम दास छावनी में लंबी बैठक के बाद CEO के नाम की घोषणा की गई.

एक ही दिन अयोध्या से दो और बड़ी खबरें आईं जो राम मंदिर से जुड़ी हैं. इसे दो बड़े फेरबदल भी कहा जा सकता है. दरअसल, राम मंदिर ट्रस्ट का नया महामंत्री गोविंद देव गिरि को बनाया गया है. वो पहले ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष थे और अब महामंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगे. इसके अलावा ट्रस्ट के नए कोषाध्यक्ष महेश भागचंदका होंगे.

कई ऑपरेशनों में जितेंद्र मिश्रा की रही है बड़ी भूमिका

य़ूपी के देवरिया के रहने वाले पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा देश के लिए कई बड़े मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. अब उन्हें अयोध्या राम मंदिर के CEO की जिम्मेदारी दी गई है. उनके नाम कई उपलब्धियां हैं.

ऑपरेशन सिंदूर में उन्होंने पश्चिमी कमान को लीड किया था. वह 18 तरह के विमान उड़ाने में सक्षम हैं और 3 हजार घंटे की उड़ान का अनुभव भी है. पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा 39 साल एयरफोर्स में सेवा दे चुके हैं और इसी साल 30 अप्रैल को रिटायर हुए थे.

जितेंद्र मिश्रा को सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है और सबसे बड़ी बात ये है कि ऑपरेशन ‘टाइगर हिल’ में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी. इसके अलावा करगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन ‘सफेद सागर’ में भी वह बड़ी भूमिका निभा चुके हैं.

जितेंद्र मिश्रा का प्रोफेशनल करियर

श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO जितेंद्र मिश्रा के प्रोफेशनल करियर की बात करें तो वो NDA के 69वें बैच के कैडेट रहे हैं. उनकी NDA ट्रेनिंग 1 दिसंबर 1985 से शुरू हुई थी. करीब एक साल की ट्रेनिंग के बाद 6 दिसंबर 1986 को उन्हें भारतीय वायुसेना में कमीशन मिला था.

करीब पांच साल बाद 6 दिसंबर 1991 को वो फ्लाइट लेफ्टिनेंट बने थे और इसके लगभग तीन दशक बाद 5 मई 2021 को उन्हें विंग कमांडर के पद पर प्रमोट किया गया था. फिर 1 जून 2023 को वो एयर मार्शल बने और उसके बाद 1 जून 2025 को कमांडर इन चीफ ग्रेड में प्रमोट हुए यानी राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO जितेंद्र मिश्रा ने एयरफोर्स में कई भूमिकाओं में काम किया है. फाइटर कॉम्बैट लीडर और टेस्ट पायलट के अलावा उन्होंने अमेरिका की एयर यूनिवर्सिटी के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज के छात्र भी रहे हैं.

जितेंद्र मिश्रा ने एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल में सीनियर टेस्ट फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर, मिग-21 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, HAL के चीफ टेस्ट पायलट और डायरेक्टर प्रोजेक्ट्स समेत कई अहम पदों पर काम किया है. Su-30 MKI एयरबेस के चीफ ऑपरेशन्स ऑफिसर और मिग-21 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर रहे.

Su-30 MKI के प्रोडक्शन में अहम भूमिका

जितेंद्र मिश्रा ने HAL में चीफ टेस्ट पायलट के तौर पर Su-30 MKI के प्रोडक्शन में अहम भूमिका निभाई. डायरेक्टर प्रोजेक्ट्स के रूप में Su-30 MKI Block IV और ब्रह्मोस इंटीग्रेशन जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा कराने में योगदान दिया.

विमान दुर्घटनाओं में 2 बार बची जान

जितेंद्र मिश्रा 2 अलग-अलग विमान दुर्घटनाओं में बाल-बाल बचे हैं. पहली घटना 14 अगस्त 1987 की है, जब IAF का MiG-21 FL दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. उस समय जितेंद्र मिश्रा पायलट ऑफिसर के तौर पर विमान में सवार थे. इसके करीब चार साल बाद 11 जून 1991 को IAF का MiG-21 M भी दुर्घटना का शिकार हुआ था.

इस विमान में भी उस समय फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में जितेंद्र मिश्रा मौजूद थे. इन 2 बड़े विमान हादसों से सुरक्षित निकलने के बाद भी उन्होंने अपने एयर फोर्स करियर को जारी रखा और आगे चलकर टेस्ट पायलट, स्क्वाड्रन कमांडर और कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी संभाली.

ट्रस्ट की बैठक में शामिल हुए 9 सदस्य

बुधवार सुबह से ही अयोध्या में बड़ी हलचल थी. राम मंदिर ट्रस्ट की लंबी बैठक हुई. बैठक में ट्रस्ट के 9 सदस्य मौजूद थे. मीटिंग में अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज, कृष्ण मोहन मौजूद थे. अयोध्या के डीएम शशांक त्रिपाठी भी मीटिंग में शामिल थे. इसके अलावा कई सदस्य वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े थे. मीटिंग में लंबी बातचीत और मंथन के बाद CEO के नाम की घोषणा की गई.

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने बताया कि CEO पद के लिए जितेंद्र मिश्रा का नाम तय हुआ है, वो पहले CEO बनेंगे. इस पद के लिए पूरे देश से 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे. फिर ट्रस्ट की बैठक में चर्चा करने के बाद जितेंद्र मिश्र का नाम तय हुआ. उनकी ऑपरेशन सिंदूर में भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी. ऑपरेशन सिंदूर में वो कमांडर-इन-चीफ की भूमिका में थे.

तीन नए ट्रस्टी कौन-कौन?

राम मंदिर के तीन नए ट्रस्टी में सबसे चर्चित नाम मदन मोहन पांडेय का है. अयोध्या के रहने वाले पांडेय पेशे से वकील हैं. राम जन्मभूमि मामले में रामलला की ओर से लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ चुके हैं. अयोध्या विवाद की सुनवाई के दौरान मदन मोहन पांडेय रामलला से जुड़े मुकदमों में प्रमुख अधिवक्ताओं में शामिल रहे. उपलब्ध अदालती रिकॉर्ड और रिपोर्ट्स में उन्हें रामलला की ओर से पैरवी करने वाले वकील के तौर पर दर्ज किया गया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट में राम जन्मभूमि विवाद से जुड़े मामलों में भी उनकी लंबी भूमिका रही थी. साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में रामलला की ओर से पैरवी करने वाले वकीलों के सम्मान समारोह में भी मदन मोहन पांडेय को सम्मानित किया गया था.

दूसरा प्रमुख नाम है महेश भागचंदका का. दिल्ली के कारोबारी और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े भागचंदका का राम मंदिर आंदोलन और उससे जुड़े संगठनों के साथ लंबे समय से जुड़ाव रहा है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद से कार्यकर्ता के तौर पर जुड़े रहे हैं. भागचन्दका चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक हैं.

राम मंदिर निर्माण के लिहाज से भी भागचंदका का नाम पहले से खास रहा है. साल 2020 में राम मंदिर भूमि पूजन से जुड़े कार्यक्रमों में वह मुख्य यजमानों में शामिल थे. वहीं, ट्रस्ट के नए सदस्यों में तीसरा नाम डॉक्टर निर्मला यादव का है. 66 साल की निर्मला यादव शिकोहाबाद से हैं. 19 साल तक वह कॉलेज में प्राचार्य थीं. अब रिटायर हैं. वह RSS से जुड़ी रही हैं.

सीईओ की नियुक्ति पर क्या बोले अखिलेश?

राम मंदिर में हुई नियुक्ति और नए बदलाव पर कई नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई. यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि जिस राम मंदिर को लेकर दुनिया भर का विवाद चल रहा था, उसपर सरकार ने पहले ही SIT बैठाकर कड़ी कार्रवाई की है. जितने लोग भी दोषी पाए गए थे, उनको जेल भी भेजा गया. ये ट्रस्ट का विषय है, अच्छी बात ये है कि अब नए CEO आएंगे, तो जो गलतियां वहां हुई हैं वो भविष्य में न हों, इसका ध्यान रखेंगे.

वहीं, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि नई चीज होने से हम और आप पुरानी चीज को भूल जाएंगे क्या? राम धन के साथ जो हुआ, चंदा जिस तरह से वहां से गायब हुआ, आपने सामान्य कर्मचारियों को जेल भेज दिया. आपने बड़े लोगों को क्लीन चिट दी है तो उनको क्यों जेल भेजा, उन लोगों को भी बाहर करो. हमें उम्मीद है कि भविष्य में राम धन में डकैती नहीं होगी.

इसके बाद यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय का भी बयान सामने आया. उन्होंने कहा कि CEO की कोई जरूरत नहीं. वहां धर्माचार्य की नियुक्ति होनी चाहिए. जो धर्म से जुड़े लोग हों, जो जानते हों, जो शंकराचार्य के द्वारा नियुक्त हों. वहां सरकार और जो ट्रस्ट है, उसमें सरकार के लोग भी शामिल हैं. वो लोग अपने लोगों को वहां बैठाकर चढ़ावा चोरी कर रहे थे.

प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम करने पर चर्चा

बुधवार को ट्रस्ट की बैठक में अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई. दान की नकद राशि की गणना प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम करने पर चर्चा हुई. दो बैंक और आईटी कंपनियों से मिले प्रस्तावों का मूल्यांकन कर तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में आगे बढ़ने पर फैसला हुआ. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका और कथित वित्तीय अनियमितताओं की विशेष जांच से जुड़े आदेश पर भी ट्रस्ट ने चर्चा की. ये कहा गया कि जांच से सत्य सामने आने और भ्रम दूर होने की उम्मीद है.

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