‘काजीकमालपुर में बिजली संकट के बीच जेई का बयान चर्चा में, बोले- ‘बेड फुल तो भी मरीज भर्ती’
काजीकमालपुर कस्बे में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: काजीकमालपुर कस्बे में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कस्बे की बिजली आपूर्ति के लिए लगे ट्रांसफार्मर पर पहले से ही क्षमता से अधिक विद्युत भार है, इसके बावजूद विभाग की ओर से लगातार नए कनेक्शन दिए जा रहे हैं। इनमें कमर्शियल कनेक्शनों की संख्या बढ़ने से ट्रांसफार्मर पर अतिरिक्त भार पड़ने की बात कही जा रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक, ओवरलोड की समस्या के चलते कस्बे का ट्रांसफार्मर लगभग हर साल खराब होकर फुंक जाता है। ट्रांसफार्मर के खराब होने के बाद कस्बे और आसपास के ग्रामीणों को लंबे समय तक बिजली संकट का सामना करना पड़ता है। बार-बार ट्रांसफार्मर खराब होने से जहां घरेलू उपभोक्ता परेशान होते हैं, वहीं दुकानदारों और छोटे कारोबारियों का कामकाज भी प्रभावित होता है।
इसी बीच ट्रांसफार्मर की क्षमता से अधिक कनेक्शन दिए जाने को लेकर काजीकमालपुर पावर हाउस के जेई रवि शर्मा का कथित बयान चर्चा में आ गया है। ग्रामीणों के अनुसार, जब जेई से ओवरलोड ट्रांसफार्मर पर नए कनेक्शन दिए जाने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने अस्पताल में मरीजों की भर्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि अस्पताल में बेड फुल होने के बाद भी मरीजों को भर्ती किया जाता है, उसी तरह ट्रांसफार्मर से भी कनेक्शन दिए जाते हैं।
जेई के इस कथित बयान को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि ट्रांसफार्मर पहले से ही निर्धारित क्षमता के मुकाबले अधिक भार झेल रहा है तो उस पर और कनेक्शन जोड़ने के बजाय विद्युत व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाने के बजाय उसी ट्रांसफार्मर पर लगातार भार बढ़ा रहा है।
पहले से जुड़े हैं कई कमर्शियल कनेक्शन
ग्रामीणों का कहना है कि काजीकमालपुर कस्बे के चौराहे पर स्थित दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को पहले से ही गांव के इसी विद्युत ट्रांसफार्मर से कमर्शियल कनेक्शन दिए गए हैं। इससे ट्रांसफार्मर पर घरेलू भार के साथ व्यावसायिक भार भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, दिन के समय दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों का विद्युत उपयोग बढ़ने से ट्रांसफार्मर पर दबाव रहता है। वहीं गर्मियों में घरों में पंखे, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ने के कारण कुल विद्युत भार और बढ़ जाता है। ऐसे में ट्रांसफार्मर पर ओवरलोड की स्थिति बनने की आशंका रहती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ओवरलोड के कारण आए दिन बिजली के फाल्ट सामने आते हैं। कई बार आपूर्ति बाधित हो जाती है और उपभोक्ताओं को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया तो आने वाले समय में समस्या और गंभीर हो सकती है।
हाल ही में खुली दूध डेयरी को भी कनेक्शन देने की बात
ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि कस्बे में हाल ही में खुली एक दूध डेयरी को भी इसी ट्रांसफार्मर से कमर्शियल कनेक्शन दिए जाने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब मौजूदा ट्रांसफार्मर पहले से ही अधिक भार झेल रहा है और बार-बार खराब होने की स्थिति बनती है, तब नए व्यावसायिक कनेक्शन दिए जाने से समस्या और बढ़ सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि किसी नए व्यावसायिक प्रतिष्ठान को कनेक्शन देने से पहले संबंधित क्षेत्र की विद्युत क्षमता और ट्रांसफार्मर पर मौजूद कुल भार का आकलन किया जाना चाहिए। यदि ट्रांसफार्मर की क्षमता पर्याप्त नहीं है तो पहले अतिरिक्त ट्रांसफार्मर अथवा क्षमता वृद्धि की व्यवस्था की जानी चाहिए।
हर साल ट्रांसफार्मर फुंकने से परेशान हैं ग्रामीण
काजीकमालपुर के ग्रामीणों के अनुसार, ट्रांसफार्मर के बार-बार खराब होने की समस्या नई नहीं है। उनका कहना है कि लगभग हर साल ट्रांसफार्मर फुंकने के कारण विद्युत आपूर्ति प्रभावित होती है। ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद उसे बदलने या मरम्मत होने तक लोगों को बिजली की समस्या झेलनी पड़ती है।
बिजली संकट का सबसे अधिक असर गर्मियों में दिखाई देता है। भीषण गर्मी के दौरान बिजली की मांग पहले ही बढ़ जाती है। ऐसे में यदि ट्रांसफार्मर खराब हो जाए तो घरों में रहने वाले लोगों के साथ-साथ दुकानदारों और छोटे व्यापारियों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार ट्रांसफार्मर बदलने के बजाय विभाग को यह पता लगाना चाहिए कि आखिर ट्रांसफार्मर बार-बार क्यों खराब हो रहा है। यदि इसकी वजह लगातार बढ़ता विद्युत भार है तो समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है।
क्षमता से अधिक भार पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों ने विद्युत विभाग से कई सवाल किए हैं। उनका कहना है कि संबंधित ट्रांसफार्मर की निर्धारित क्षमता कितनी है और वर्तमान में उस पर कितना विद्युत भार है, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। इसके अलावा ट्रांसफार्मर से जुड़े घरेलू और कमर्शियल कनेक्शनों की संख्या की भी जांच होनी चाहिए।
ग्रामीण यह भी जानना चाहते हैं कि यदि ट्रांसफार्मर की क्षमता सीमित है तो उस पर नए कमर्शियल कनेक्शन किस आधार पर स्वीकृत किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जांच में ट्रांसफार्मर ओवरलोड पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय करते हुए व्यवस्था में सुधार किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से जांच की मांग की
मामले को लेकर ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के उच्चाधिकारियों से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि मौके पर टीम भेजकर ट्रांसफार्मर की वास्तविक क्षमता, उस पर मौजूद कुल कनेक्शनों और वास्तविक विद्युत भार की जांच कराई जाए।
ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि ट्रांसफार्मर क्षमता से अधिक भार झेल रहा है तो नए कनेक्शन देने की व्यवस्था की भी समीक्षा की जाए। साथ ही भविष्य में बढ़ने वाले विद्युत भार को ध्यान में रखते हुए पहले से विद्युत ढांचे को मजबूत किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली जैसी आवश्यक सुविधा के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे उपभोक्ताओं को बार-बार फाल्ट, लो-वोल्टेज और ट्रांसफार्मर खराब होने की समस्या का सामना न करना पड़े।
क्षमता बढ़ाने या अलग ट्रांसफार्मर लगाने की मांग
ग्रामीणों की सबसे प्रमुख मांग है कि काजीकमालपुर कस्बे में विद्युत आपूर्ति के लिए लगाए गए ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाई जाए या फिर आवश्यकता के अनुसार अलग ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाए। उनका कहना है कि इससे मौजूदा ट्रांसफार्मर पर पड़ रहा अतिरिक्त भार कम किया जा सकता है।
यदि कस्बे में कमर्शियल गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं तो उनके लिए अलग विद्युत व्यवस्था करने की भी मांग उठ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि घरेलू और व्यावसायिक भार को ध्यान में रखते हुए विद्युत नेटवर्क की क्षमता का विस्तार किया जाना चाहिए।
जेई के बयान से बढ़ा मामला
काजीकमालपुर में ट्रांसफार्मर के ओवरलोड होने और नए कनेक्शन दिए जाने का मामला पहले से ही ग्रामीणों के बीच चिंता का विषय था, लेकिन जेई रवि शर्मा के बताए जा रहे ‘बेड फुल होने के बाद भी मरीज भर्ती’ वाले कथित बयान ने इसे और चर्चा में ला दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय अधिकारी को उपभोक्ताओं की समस्या को गंभीरता से लेते हुए विद्युत व्यवस्था सुधारने की दिशा में कदम उठाना चाहिए। उनका आरोप है कि यदि ट्रांसफार्मर की क्षमता से अधिक भार है तो नए कनेक्शन देने के बजाय अतिरिक्त विद्युत व्यवस्था करना अधिक जरूरी है।
अब ग्रामीणों की नजर विद्युत विभाग के उच्चाधिकारियों की ओर है। वे चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और ट्रांसफार्मर की क्षमता तथा उस पर स्वीकृत कनेक्शनों की वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। साथ ही ओवरलोड की समस्या का स्थायी समाधान करते हुए जरूरत के अनुसार नया ट्रांसफार्मर अथवा अधिक क्षमता का ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाए।



