मंत्री के औचक निरीक्षण से जिला अस्पताल में हड़कंप, बाहर की दवाइयों और कथित वसूली पर मांगा जवाब
मंत्री के औचक निरीक्षण के दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर कई शिकायतें सामने आईं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के बांदा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर उस समय हड़कंप मच गया, जब सड़क हादसे में घायल जल शक्ति मंत्री रामकेश निषाद के एक रिश्तेदार को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया।
बताया जा रहा है कि घायल को सिर में गंभीर चोट लगी थी और इलाज के दौरान सीटी स्कैन की जरूरत पड़ी, लेकिन मशीन में तकनीकी खराबी के कारण जांच समय पर नहीं हो सकी। मामले की जानकारी मिलने के बाद जल शक्ति मंत्री रामकेश निषाद अचानक जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर पहुंच गए।
मंत्री के औचक निरीक्षण के दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर कई शिकायतें सामने आईं। मरीजों को बाहर से दवाइयां लिखे जाने, ऑपरेशन थिएटर से जुड़ी सुविधाओं के नाम पर कथित रूप से पैसे लिए जाने और अस्पताल में अन्य अव्यवस्थाओं की शिकायतों पर मंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने मौके पर मौजूद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) से जवाब-तलब किया और व्यवस्थाओं में लापरवाही को लेकर कड़ी फटकार लगाई।
सड़क हादसे में घायल हुए मंत्री के रिश्तेदार
जानकारी के मुताबिक, जल शक्ति मंत्री रामकेश निषाद के रिश्तेदार सड़क हादसे में घायल हो गए थे। हादसे के बाद उन्हें उपचार के लिए बांदा जिला अस्पताल लाया गया। घायल के सिर में गंभीर चोट होने के कारण चिकित्सकीय जांच के लिए सीटी स्कैन की आवश्यकता बताई गई।
आरोप है कि जिला अस्पताल में लगी सीटी स्कैन मशीन में तकनीकी खराबी होने के कारण जांच समय पर नहीं हो सकी। अस्पताल में अपने रिश्तेदार के इलाज में आ रही परेशानी की जानकारी मिलने के बाद मंत्री रामकेश निषाद खुद जिला अस्पताल पहुंचे।
मंत्री के अस्पताल पहुंचते ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और अस्पताल प्रशासन में हलचल मच गई। उन्होंने सीधे ट्रामा सेंटर पहुंचकर मरीजों के इलाज और वहां उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया।
ट्रामा सेंटर में व्यवस्थाओं का लिया जायजा
औचक निरीक्षण के दौरान मंत्री ने ट्रामा सेंटर में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों से बातचीत की। इस दौरान अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं और इलाज की प्रक्रिया को लेकर मरीजों से जानकारी ली गई।
मरीजों और तीमारदारों की ओर से अस्पताल में बाहर की दवाइयां लिखे जाने की शिकायत भी सामने आई। निरीक्षण के दौरान कुछ मरीजों के पास बाहर से खरीदी गई दवाइयां मिलने पर मंत्री ने अधिकारियों से इस संबंध में जवाब मांगा।
मंत्री ने सवाल किया कि जब सरकारी अस्पताल में मरीजों के लिए आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था है, तो फिर मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदने की जरूरत क्यों पड़ रही है। इस मामले में उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।
बाहर की दवाइयों को लेकर मंत्री ने जताई नाराजगी
जिला अस्पताल में बाहर से दवाइयां लिखे जाने की शिकायत को मंत्री ने गंभीरता से लिया। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को उपलब्ध सरकारी सुविधाओं और दवाइयों का लाभ मिले।
मंत्री ने अधिकारियों से यह भी कहा कि गरीब और जरूरतमंद मरीज इलाज के लिए सरकारी अस्पताल पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि उन्हें अस्पताल के बाहर से दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है तो यह गंभीर विषय है।
इस दौरान CMO और CMS से जवाब-तलब करते हुए मंत्री ने अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार और शिकायतों की जांच के निर्देश दिए।
ऑपरेशन थिएटर की सुविधाओं के नाम पर कथित वसूली का आरोप
निरीक्षण के दौरान अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर से जुड़ी सुविधाओं को लेकर भी शिकायत सामने आई। आरोप लगाया गया कि स्ट्रेचर और अन्य सुविधाओं के नाम पर मरीजों से करीब 300 रुपये तक लिए जा रहे हैं।
कथित अवैध वसूली की शिकायत सामने आने के बाद मंत्री ने नाराजगी जताई और मामले की जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि जांच में मरीजों या उनके परिजनों से अनधिकृत तरीके से पैसे लिए जाने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी अस्पताल में इलाज कराने आने वाले गरीब मरीजों से किसी भी प्रकार की अनधिकृत वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
CMO-CMS को लगाई फटकार
निरीक्षण के दौरान सामने आई शिकायतों को लेकर जल शक्ति मंत्री ने अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा। अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने CMO और CMS को फटकार लगाई।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अस्पताल में मरीजों को इलाज के लिए किसी प्रकार की परेशानी न हो। दवाइयों की उपलब्धता, जांच सुविधाओं, ट्रामा सेंटर की व्यवस्था और मरीजों से जुड़े अन्य मामलों की नियमित निगरानी की जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अस्पताल में आने वाला प्रत्येक मरीज सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का हकदार है और उसकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचाने की बात
मंत्री रामकेश निषाद ने कहा कि मरीजों के इलाज में लापरवाही और गरीब मरीजों से कथित अवैध वसूली जैसे मामलों को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
उन्होंने पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाने की बात भी कही। मंत्री के इस रुख के बाद अस्पताल प्रशासन में और अधिक हलचल देखने को मिली।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अस्पताल में सामने आई शिकायतों की जांच कराई जाए और यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
CMO ने भी जांच की बात कही
मामले को लेकर बांदा के CMO डॉ. विजेंद्र सिंह ने बताया कि मंत्री जी के रिश्तेदार सड़क हादसे में घायल होकर जिला अस्पताल पहुंचे थे। उनके मुताबिक, सीटी स्कैन मशीन में तकनीकी समस्या होने के कारण जांच में दिक्कत आई थी।
CMO ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता या अवैध वसूली में किसी की भूमिका सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
मंत्री के रिश्तेदार के पहुंचने के बाद ही क्यों खुली अस्पताल की पोल?
इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति या मंत्री के रिश्तेदार के अस्पताल पहुंचने के बाद ही वहां की कमियां अधिकारियों और प्रशासन की नजर में आती हैं?
यदि अस्पताल में बाहर की दवाइयां लिखे जाने, जांच सुविधाओं में दिक्कत और मरीजों से कथित वसूली जैसी शिकायतें पहले से मौजूद थीं, तो इन पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
आम मरीजों और उनके तीमारदारों की शिकायतों को लेकर भी अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनकी समस्याओं पर भी इसी तरह तत्काल कार्रवाई की जाएगी?
आम मरीजों को कब मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा?
बांदा जिला अस्पताल में सामने आया यह मामला केवल एक मरीज तक सीमित नहीं है। सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले अधिकांश मरीज बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं।
ऐसे में यदि जांच मशीनें खराब रहती हैं, मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं या किसी सुविधा के नाम पर अतिरिक्त रकम लिए जाने की शिकायत सामने आती है, तो इसका सीधा असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ता है।
मंत्री के औचक निरीक्षण के बाद अब स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की है।
रिपोर्ट -इकबाल खान, बांदा



