मणिपुरी शिक्षक की हत्या ने गृहमंत्री शाह की पुलिस और राजधानी दिल्ली की सुरक्षा पर उठाया सवाल!

हाय रे मॉबलिचिंग : मणिपुर के संगीत टीचर को गुंडो ने पीट-पीट कर मार डाला

  • अपराधों की राजधानी बनती दिल्ली गृहमंत्री की नाक के नीचे घटनाएं होता बवाल
  • दिल्ली में कौन सुरक्षित : मॉब लिचिंग बनता फैशन जिसको चाहो पीटकर मार दो!
  • 8 लोग गिरफ्तार घटना ने पकड़ा तूल आखिर क्या कसूर था टीचर का

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। रात का वक्त था। घर के बाहर शोर था। एक आदमी नीचे उतरा। उसने बस इतना कहा शोर मत करो। उसे क्या पता था कि जिस शोर को रोकने के लिए वह घर से बाहर निकला है वही शोर उसकी जिंदगी का आखिरी शोर बन कर रह जाएगा। मणिपुर के टीचर और शोर मचा रहे लोगों के बीच बहस हुई।
बात बढ़ी फिर हाथ चले मुट्ठिया  तनी और एक आदमी पर बहुत से लोग टूट पड़े। वह बचने के लिए भागा लेकिन भीड़ ने पीछा नहीं छोड़ा वह अपने घर तक पहुंचा मगर मौत उसके पीछे पीछे घर में दाखिल हो चुकी थी। 54 वर्षीय मणिपुरी संगीत शिक्षक और कलाकार चोंगथम विक्रम सिंह अस्पताल पहुंचे लेकिन गंभीर चोटों के बाद उनकी मौत हो गई। पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया है और सात आरोपियों को गिरफ्तार तथा एक नाबालिग को पकड़े जाने की जानकारी दी है।

अमित शाह जी दिल्ली में कानून का खौफ किससे पूछकर खत्म हुआ?

सवाल बड़ा है जहां घटना हुई है वह कोई दूरदराज का कस्बा नहीं है यह दिल्ली है देश की राजधानी वही दिल्ली जहां संसद है प्रधानमंत्री का कार्यालय है गृह मंत्रालय है गृह मंत्री अमित शाह का कार्यालय है दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है सुरक्षा एजेंसियों का पूरा ढांचा है सीसीटीवी हैं पेट्रोलिंग है इंटेलिजेंस है। पुलिस कंट्रोल रूम है फिर भी एक नागरिक अपने घर के बाहर खड़े लोगों से सिर्फ इतना कहता है कि शोर कम करिए और कुछ देर बाद उसकी जान चली जाती है। तो सवाल बहुत सीधा है गृहमंत्रि अमित शाह बताए कि दिल्ली में कानून का खौफ किससे पूछकर खत्म हुआ? किसने इन लोगों को यह भरोसा दिया कि विवाद को बातचीत से नहीं, ताकत से सुलझाया जा सकता है? किसने यह भरोसा दिया कि अगर एक आदमी सामने खड़ा है तो कई लोग उस पर टूट सकते हैं? और सबसे बड़ा सवाल क्या दिल्ली में कानून आने से पहले भीड़ पहुंच रही है? विक्रम सिंह की मौत को किसी जातीय या नस्ली मकसद से जोड़ देना अभी जल्दबाजी होगी। पुलिस ने भी कहा है कि ऐसा कोई मकसद अभी स्थापित नहीं हुआ है और जांच जारी है। लेकिन यह भी सच है कि उनकी मौत के बाद पूर्वोत्तर समुदाय में गुस्सा और असुरक्षा की भावना सामने आई है। राहुल गांधी ने भी सवाल उठाया कि दिल्ली में रहने वाले पूर्वोत्तर के परिवार आखिर खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करें।

राहुल ने उठाया दिल्ली की कानून व्यवस्था पर सवाल, गृह मंत्रालय को घेरा

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मणिपुर के संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की दिल्ली में हुई मौत को लेकर राजधानी की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि विक्रम सिंह की हत्या जिस तरह हुई उसने दिल्ली में रह रहे पूर्वोत्तर के लोगों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा है कि विक्रम सिंह अपने घर के बाहर हो रहे शोर को लेकर आपत्ति जताने के लिए बाहर निकले थे लेकिन उनके साथ मारपीट की गई और उनकी जान चली गई। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब राजधानी में अपने ही घर के बाहर एक व्यक्ति सुरक्षित नहीं है तो दिल्ली में रहने वाले पूर्वोत्तर के परिवार खुद को कितना सुरक्षित महसूस कर रहे होंगे।

गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस जिम्मेदार

राहुल गांधी ने इस घटना को सिर्फ एक आपराधिक घटना तक सीमित न रखते हुए गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाया। राहुल गांधी के मुताबिक खास तौर पर पूर्वोत्तर के लोगों को निशाना बनाए जाने की आशंकाओं से जुड़ी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा तंत्र क्या कर रहा है इसका जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने मामले की जल्द और निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की और विक्रम सिंह के परिवार के प्रति संवेदना जताई। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी विक्रम सिंह की मौत को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि इस घटना को केवल शराब के नशे में हुई हिंसा या किसी एक रात की आपराधिक वारदात बताकर नजरअंदाज करना पर्याप्त नहीं होगा। उनका आरोप है कि लंबे समय से तेज आवाज में संगीत सार्वजनिक स्थानों पर हंगामा और नियमों की अनदेखी जैसी घटनाओं पर पर्याप्त सख्ती नहीं होने से लोगों में कानून का डर कमजोर हुआ है। पवन खेड़ा ने तर्क दिया कि किसी व्यक्ति की हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार भले ही सीधे सरकार के हाथ में न हो लेकिन कानून के प्रति लापरवाही का माहौल बनने की जिम्मेदारी से सरकार पूरी तरह अलग नहीं हो सकती। यानी राजनीतिक बहस अब सिर्फ यह नहीं है कि विक्रम सिंह के हत्यारे कौन हैं बल्कि सवाल यह भी है कि राजधानी में कानून का डर आखिर कितना बचा है और क्या हर नागरिक को अपनी सुरक्षा के लिए खुद ही लडऩा पड़ेगा?

और यही सवाल सबसे खतरनाक है

अगर देश की राजधानी में रहने वाला नागरिक अपने घर में भी यह सोचने लगे कि बाहर निकलना सुरक्षित है या नहीं तो सरकार की सुरक्षा व्यवस्था का मतलब क्या रह जाता है? विक्रम सिंह कोई अपराधी नहीं थे। वह संगीत सिखाते थे वह वर्षों से दिल्ली में रह रहे थे उन्होंने इस शहर में अपनी जिंदगी बनाई थी वह रात भी शायद बाकी रातों जैसी ही थी लेकिन एक छोटी सी आपत्ति ने हिंसा का रूप लिया और एक परिवार का संसार उजड़ गया।

घर के सामने शोर मचाने से मना कर रहे थे चोंगथम

मणिपुर के रहने वाले संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की बीती रात मॉबलिचिंग कर कुछ लोगों ने हत्या कर दी। हत्या करने का कारण सिर्फ इतना है कि उन्होंने अपने घर के सामने इक्टठा हुए लोगों से जोकि शराब पी रहे थे और शोर मचा रहे थे को कहीं और जाने के लिए कहा। चोंगथम दिल्ली के आश्रम इलाके में अपने परिवार के साथ रह रहे थे। चोंगथम इंफाल के रहने वाले गिटारिस्ट और संगीतकार थे। वह रॉक बैंड्स का हिस्सा रह चुके है और पिछले कुछ वर्षों से काम नहीं कर रहे थे। वह कई वर्षों से संगीत प्रस्तुत करते रहे थे और संगीत शिक्षक भी थे। चोंगथम के बेटे याइफाबा और उनकी मां घटना के समय घर पर ही थे। याइफाबा ने बताया कि उन्होंने तेज आवाजें और सिंह के चीखने की आवाज सुनी। याइफाबा के मुताबिक जब उन्होंने दरवाजा खोला तो चार पांच लोगों को अपने पिता पर हमला करते देखा।

सड़क पर अदालत, पुलिस उठाये लाश

यह सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है। यह उस मानसिकता की कहानी है जिसमें कुछ लोगों को अचानक यह भ्रम हो जाता है कि सामने वाले की जिंदगी से बड़ी उनकी ताकत है। यही वह जगह है जहां मॉब लिंचिंग का भूत दिल्ली के दरवाजे पर आकर खड़ा हो जाता है। मॉब लिंचिंग का मतलब सिर्फ यह नहीं कि किसी को भीड़ ने मार दिया। असली डर उस मानसिकता का है जिसमें भीड़ को भरोसा हो जाए कि कानून बाद में आएगा पहले हम फैसला करेंगे। आज विक्रम सिंह थे कल कोई और हो सकता है आज शोर का विरोध था कल रास्ते का विवाद हो सकता है आज लाठी डंडे घूसे चले कल हथियार भी उठ सकता है। सवाल यह नहीं कि दिल्ली पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया या नहीं सवाल यह है कि क्या कानून का डर इतना कमजोर हो गया है कि लोग पहले सड़क पर अदालत लगाएं और फिर पुलिस को लाश उठाने के लिए बुलाया जाए?

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