बचपन में फीस के लिए हुआ अपमान, आज उसी बच्चे ने 400 गरीब बच्चों के लिए खोल दिया शिक्षा का दरवाजा

कानपुर के 28 वर्षीय उद्देश्य सचान की कहानी संघर्ष, संकल्प और बदलाव की ऐसी मिसाल है, जो बताती है कि बचपन का दर्द अगर मकसद बन जाए तो जिंदगी की दिशा बदली जा सकती है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कभी महज कुछ हजार रुपये की स्कूल फीस न भर पाने के कारण जिस बच्चे को स्कूल से बाहर कर दिया गया था, आज वही बच्चा सैकड़ों गरीब और बेसहारा बच्चों के लिए शिक्षा का सहारा बन चुका है।

कानपुर के 28 वर्षीय उद्देश्य सचान की कहानी संघर्ष, संकल्प और बदलाव की ऐसी मिसाल है, जो बताती है कि बचपन का दर्द अगर मकसद बन जाए तो जिंदगी की दिशा बदली जा सकती है। उद्देश्य सचान को बचपन में आर्थिक तंगी के चलते दो बार स्कूल से निकाला गया। फीस न भर पाने का दर्द सिर्फ उन्हें ही नहीं, बल्कि उनके माता-पिता को भी झेलना पड़ा। स्कूल से निकाले जाने के साथ परिवार को कथित तौर पर अपमान का सामना भी करना पड़ा। उस वक्त शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही अनुभव एक दिन उद्देश्य की जिंदगी का सबसे बड़ा मिशन बन जाएगा।

आज उद्देश्य सचान कानपुर के परसौली क्षेत्र में करीब 400 गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देने का काम कर रहे हैं। उनका प्रयास सिर्फ बच्चों को किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह उन्हें ऐसा वातावरण देने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें आर्थिक कमजोरी उनकी शिक्षा और बचपन के बीच दीवार न बने।

पेड़ के नीचे शुरू हुई पढ़ाई, अब बन चुका है स्कूल

उद्देश्य ने गरीब बच्चों को पढ़ाने की शुरुआत बेहद सीमित संसाधनों के साथ की थी। शुरुआती दौर में पेड़ के नीचे बच्चों को पढ़ाने से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे आगे बढ़ा और आज एक स्कूल के रूप में सामने है। उद्देश्य का कहना है कि जिस परेशानी से उन्होंने खुद बचपन में सामना किया, वह किसी दूसरे बच्चे को न झेलनी पड़े। उनका सपना है कि कोई बच्चा सिर्फ इसलिए स्कूल से बाहर न हो क्योंकि उसके परिवार के पास फीस भरने के पैसे नहीं हैं।

उनके स्कूल में बच्चों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं कराई जाती, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान देने की कोशिश की जाती है। स्कूल में पढ़ाई के साथ खेल, संगीत और दूसरी गतिविधियों को भी जगह दी गई है। बच्चों को स्कूल ड्रेस, कॉपी-किताब, पेन और दूसरी जरूरी शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने के साथ उनके भोजन की व्यवस्था भी की जाती है। उद्देश्य इन बच्चों को सिर्फ विद्यार्थी नहीं, बल्कि अपने परिवार के बच्चों की तरह देखते हैं और उन्हें प्यार, अपनापन और सम्मान देने की कोशिश करते हैं।

निजी स्कूलों की फीस से अलग मुफ्त शिक्षा का मॉडल

आज के दौर में अच्छी शिक्षा और बेहतर सुविधाओं के लिए अभिभावकों को बड़ी फीस चुकानी पड़ती है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करना बड़ी चुनौती बन जाता है।

उद्देश्य सचान इसी चुनौती को अपने स्तर पर कम करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका स्कूल उन बच्चों के लिए उम्मीद की जगह बन रहा है, जिनके परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और जिनके लिए निजी स्कूलों की फीस वहन करना मुश्किल है। उनकी कोशिश है कि बच्चों को पढ़ाई के साथ वह सुविधाएं भी मिलें, जो सामान्य तौर पर आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों के बच्चों को आसानी से उपलब्ध होती हैं।

सोशल मीडिया बना मिशन का बड़ा सहारा

उद्देश्य सचान की इस मुहिम को सोशल मीडिया पर भी बड़ी पहचान मिली है। उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर करीब 10 लाख फॉलोअर्स बताए जाते हैं। यही ऑनलाइन समुदाय उनके शिक्षा मिशन को आर्थिक सहयोग देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सोशल मीडिया के जरिए लोग उद्देश्य के काम को देखते हैं, बच्चों की जरूरतों से जुड़ते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहायता करते हैं। इसी सहयोग से उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई, ड्रेस, किताब-कॉपी, भोजन और दूसरी सुविधाओं को जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि उद्देश्य का मानना है कि गरीब और बेसहारा बच्चों की शिक्षा सिर्फ किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। समाज, जनप्रतिनिधियों और सरकार के स्तर पर भी ऐसे प्रयासों को सहयोग मिलना जरूरी है।

KBC के मंच तक पहुंची उद्देश्य की कहानी

गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने की उनकी मुहिम की कहानी अब देश के चर्चित टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति-18 के मंच तक भी पहुंची।

रिपोर्ट — प्रांजुल मिश्रा,कानपुर

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