Mirzapur: तीन दशक से रास्ते की आस, इतने मीटर के लिए तय करना पड़ता है 17 किमी का सफर

ग्रामीणों के अनुसार गांव से संबंधित अस्पताल की दूरी लगभग 800 मीटर है, लेकिन सीधा रास्ता बाधित होने के कारण मरीज को करीब 17 किलोमीटर का चक्कर लगाकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के अंतिम छोर पर स्थित राजगढ़ विकास खंड क्षेत्र के ग्राम रामपुर-38 में करीब तीन दशक से लंबित आवागमन की समस्या अब ग्रामीणों के लिए महज असुविधा नहीं रह गई है।

सीधा मार्ग उपलब्ध न होने के कारण गांव और आसपास के महत्वपूर्ण स्थलों के बीच दूरी कई गुना बढ़ गई है। शनिवार को गांव निवासी बंधु लाल की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें उपचार के लिए ले जाने में हुई देरी और अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों द्वारा मृत घोषित किए जाने की घटना ने इस पुरानी समस्या की गंभीरता को एक बार फिर सामने ला दिया। ग्रामीणों के अनुसार गांव से संबंधित अस्पताल की दूरी लगभग 800 मीटर है, लेकिन सीधा रास्ता बाधित होने के कारण मरीज को करीब 17 किलोमीटर का चक्कर लगाकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा। घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सामान्य परिस्थितियों में किसी तरह चल रही यह व्यवस्था आपातकाल में कितनी घातक साबित हो सकती है।

तीन दशक से जारी समस्या, कई स्तरों पर पहुंच चुका मामला

रामपुर-38 के ग्रामीणों का कहना है कि आवागमन की यह समस्या करीब 30 वर्षों से बनी हुई है। सीधा मार्ग उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्रामीणों को बाजार, खेत, विद्यालय, अस्पताल, बैंक और डाकघर तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। बरसात, बीमारी और अन्य आपात परिस्थितियों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों द्वारा रेलवे के डीआरएम, एडीआरएम, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर और महाप्रबंधक स्तर तक लगातार पत्राचार और शिकायतें किए जाने की बात कही जा रही है। इसके अलावा प्रधानमंत्री जन शिकायत पोर्टल पर भी 20 से अधिक शिकायतें दर्ज कराने का दावा ग्रामीणों ने किया है। बावजूद इसके स्थायी समाधान के धरातल पर दिखाई न देने को लेकर ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

2024 में रेलवे ट्रैक पर धरना, फिर भी नहीं निकला रास्ता

समस्या को लेकर ग्रामीणों ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान रेलवे ट्रैक पर धरना-प्रदर्शन भी किया था। उस समय भी आवागमन की समस्या को प्रमुखता से उठाते हुए स्थायी समाधान की मांग की गई थी। इसके बाद भी समस्या का लंबित रहना रेलवे और प्रशासनिक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों का कहना है कि मामला अब केवल पत्राचार और रिपोर्टों तक सीमित रखने का नहीं, बल्कि मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करने और ठोस निर्णय लेने का है।

पोल 200/13 और 200/15 के बीच अंडरपास की मांग

रामपुर-38 गांव के ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है। वे किसी दूरस्थ वैकल्पिक मार्ग के बजाय रेलवे पोल संख्या 200/13 एवं 200/15 के बीच अंडरपास निर्माण चाहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे के दोहरीकरण कार्य के दौरान ही इस स्थान पर अंडरपास का निर्माण करा दिया जाए, जिससे भविष्य में आवागमन की समस्या स्थायी रूप से समाप्त हो सके। रेलवे की ओर से स्थल की तकनीकी व्यवहार्यता और संभावित जलभराव को लेकर आपत्तियां सामने आने की बात ग्रामीण बताते हैं। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि स्थल को लेकर तकनीकी संदेह है तो संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों की मौजूदगी में संयुक्त स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और मौके की वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाए।

कागजी कार्रवाई से आगे कब बढ़ेगा समाधान?

बंधु लाल की घटना के बाद ग्रामीणों के बीच यह सवाल फिर प्रमुखता से उठ रहा है कि जब करीब 30 वर्षों से समस्या मौजूद है और मामला रेलवे के उच्चाधिकारियों तथा प्रधानमंत्री जन शिकायत पोर्टल तक पहुंच चुका है, तो स्थायी समाधान अभी तक क्यों नहीं हुआ?

ग्रामीणों का कहना है कि 800 मीटर की दूरी का 17 किलोमीटर में बदल जाना केवल रास्ते की लंबाई का मामला नहीं है। यह ग्रामीणों की दैनिक जिंदगी, बच्चों की पढ़ाई, खेती-किसानी, स्वास्थ्य सेवाओं और विशेष रूप से आपातकालीन परिस्थितियों से सीधे जुड़ा प्रश्न है। अब ग्रामीणों की अपेक्षा केवल आश्वासन की नहीं, बल्कि मौके पर निरीक्षण, तकनीकी परीक्षण और समयबद्ध कार्रवाई की है। ग्रामीणों ने शासन, प्रशासन और रेलवे के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि रामपुर-38 की तीन दशक पुरानी समस्या को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए तथा पोल संख्या 200/13 एवं 200/15 के बीच अंडरपास निर्माण की दिशा में ठोस कार्रवाई शुरू की जाए।

रिपोर्ट – संतोष देव गिरि,मिर्जापुर

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