जल जीवन मिशन में 73 करोड़ का खेल, CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा!
गुजरात के जल जीवन मिशन को लेकर CAG रिपोर्ट में कथित अनियमितताओं का बड़ा खुलासा सामने आया है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः मोदी के गुजरात में जल जीवन मिशन को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है.. गुजरात विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन CAG की रिपोर्ट सदन में पेश की गई.. रिपोर्ट में जल जीवन मिशन से जुड़ी परियोजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं.. और ठेकेदार को करीब 73 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान का उल्लेख किया गया है.. रिपोर्ट के अनुसार योजना के तहत जिन ग्रामीण परिवारों तक घर-घर नल का कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था.. वहां कुछ मामलों में काम के नाम पर सामुदायिक नल.. और पानी की टंकी बनाकर ही परियोजना को पूरा मान लिया गया.. ऐसे में सवाल यह है कि क्या योजना का वास्तविक उद्देश्य पूरा हुआ या कागजों पर आंकड़े पूरे किए गए..
CAG की रिपोर्ट में जल जीवन मिशन के तहत किए गए कार्यों.. और उनके भुगतान को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं.. रिपोर्ट के अनुसार कुछ गांवों में हर घर तक नल का कनेक्शन उपलब्ध कराने के बजाय गांव में एक सामुदायिक नल.. और पानी की टंकी का निर्माण कर दिया गया.. इसके बाद परियोजना को पूरा मानने की स्थिति सामने आई.. जबकि जल जीवन मिशन का मूल उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को उनके घर तक नल से पानी उपलब्ध कराना है.. ऐसे में सामुदायिक नल और टंकी के निर्माण को घर-घर नल कनेक्शन के बराबर मानना सवाल खड़े करता है.. CAG की टिप्पणियों के बाद अब यह मुद्दा गुजरात में राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है.. और सरकार से जवाबदेही की मांग भी उठ सकती है..
रिपोर्ट में गुजरात में जल जीवन मिशन की योजना.. और उसके क्रियान्वयन के आंकड़ों को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है.. राज्य सरकार की वार्षिक कार्ययोजना और ई-जल शक्ति पोर्टल से जुड़े आंकड़ों के अनुसार.. वर्ष 2022 में राज्य के करीब 91 लाख 18 हजार ग्रामीण परिवारों को नल से जल योजना के तहत कवर करने की बात कही गई थी.. लेकिन अप्रैल 2024 में 27 जिलों की जिला वार्षिक कार्ययोजनाओं में लगभग 15 लाख घरों तक नल कनेक्शन उपलब्ध कराने से संबंधित आंकड़े सामने आए.. इन आंकड़ों के बीच अंतर ने योजना की वास्तविक प्रगति और सरकारी दावों पर सवाल खड़े किए हैं.. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर लक्ष्य और जमीनी स्तर पर किए गए काम के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों दिखाई देता है..
जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है.. जिसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में लोगों को उनके घर तक पाइप के जरिए सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है.. इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन देने.. और पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है.. लेकिन CAG की रिपोर्ट में जिन अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है.. वे योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं.. अगर किसी गांव में प्रत्येक घर तक नल कनेक्शन देने के बजाय केवल सामुदायिक नल.. और टंकी का निर्माण किया गया.. तो यह जांच का विषय बनता है कि भुगतान किस आधार पर किया गया.. साथ ही यह भी देखना जरूरी है कि जिन परिवारों को योजना का लाभ मिलना था.. उन्हें वास्तव में घर पर पानी मिला या नहीं..
CAG की रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आंकड़े भी सामने आए हैं.. रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना के लिए पाइप की खरीद के मामले में 54 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया.. इसके अलावा गलत GST के कारण करीब 19 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वित्तीय देनदारी या नुकसान का उल्लेख किया गया है.. इन दोनों आंकड़ों को जोड़ने पर करीब 73 करोड़ रुपये का मामला सामने आता है.. यही वजह है कि यह मुद्दा अब सिर्फ योजना के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रह जाता.. बल्कि सरकारी धन के इस्तेमाल और भुगतान की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करता है.. आखिर पाइप खरीद में इतनी बड़ी राशि का भुगतान किस प्रक्रिया के तहत हुआ.. और GST से जुड़ी गलती कैसे हुई.. इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे..



