90 दिन की मोहलत पर माने जरांगे, बोले- धोखा मिला तो फिर मुंबई पहुंचेंगे
मनोज जरांगे पाटील ने महाराष्ट्र सरकार से बातचीत के बाद मराठा आरक्षण के लिए 90 दिन की मोहलत दी है. उन्होंने सातारा गजट लागू करने की मांग की. जरांगे ने अनशन स्थगित कर दिया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मनोज जरांगे पाटील ने महाराष्ट्र सरकार से बातचीत के बाद मराठा आरक्षण के लिए 90 दिन की मोहलत दी है. उन्होंने सातारा गजट लागू करने की मांग की. जरांगे ने अनशन स्थगित कर दिया है.
जालना के अंतरवाली सराटी से मुंबई की ओर निकले मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे ने सरकार को तीन महीने यानी 90 दिनों का समय दिया है. उन्होंने मांग की कि तीन महीने के भीतर सातारा गजट को लागू किया जाए. मनोज जरांगे ने कहा कि वह सरकार को तीन महीने का समय दे रहे हैं. अगर सरकार ने इस दौरान धोखा दिया, तो वे मुंबई पहुंचेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि आज से वह अपना अनशन स्थगित कर रहे हैं, लेकिन आंदोलन जारी रहेगा.
उनसे मुलाकात के लिए सरकार का प्रतिनिधिमंडल बीड के पाटोदा पहुंचा. प्रतिनिधिमंडल में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील, मंत्री दादा भुसे, विधायक प्रसाद लाड, विधायक सुरेश धस और बीड के जिलाधिकारी शामिल थे. प्रतिनिधिमंडल ने मनोज जरांगे के साथ बातचीत की. इसके बाद आज सुबह करीब 6 बजे मनोज जरांगे और सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त रूप से चर्चा की.
‘शारीरिक रूप से थक चुका हूं’
मनोज जरांगे ने मुंबई पहुंच चुके करीब 1 लाख 7 हजार समर्थकों से वापस लौटने का भी आह्वान किया. उन्होंने कहा कि फिलहाल समर्थक वापस लौटें, लेकिन सरकार की ओर से मांगों पर धोखा मिलने की स्थिति में आंदोलन फिर से तेज किया जाएगा.
जरांगे ने अपने अनशन के 18वें दिन भाषण दे रहे थे. उन्होंने कहा कि वे इतने शारीरिक रूप से थक चुके हैं कि हजारों समर्थकों के साथ लंबी यात्रा जारी नहीं रख सकते. उन्होंने मराठा समुदाय के लोगों से कहा कि पाटोदा से निकलने के बाद वे उनकी गाड़ी के पीछे न आएं. इसके बजाय, उन्होंने उनसे सीधे खोपोली में मिलने का आग्रह किया. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर काफिला चलता रहा, तो वे यात्रा रोक सकते हैं और पाटोदा में अपना धरना फिर से शुरू कर सकते हैं या अंतरवाली सराटी लौट सकते हैं.
रात करीब 1.30 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बावजूद, जरांगे ने पाया कि हजारों लोग उन्हें सुनने के लिए इंतजार कर रहे थे. इनमें महिलाएं भी शामिल थीं, सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 12 सितंबर को IV फ्लूइड बंद करने के बाद वे मुश्किल से ही अपने हाथ-पैर हिला पा रहे थे.



