योग करते समय न करें ये गलतियां

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
आजकल फिट और एक्टिव रहने के लिए बड़ी संख्या में लोग योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं। कोई तनाव कम करने के लिए योग करता है तो कोई शरीर को लचीला बनाए रखने, बेहतर पोस्चर और सामान्य फिटनेस के लिए। लेकिन सिर्फ योगासन करना ही काफी नहीं है, उसे सही तरीके और अपनी क्षमता के अनुसार करना भी उतना ही जरूरी है। कई बार लोग जल्दी रिजल्ट पाने के चक्कर में शरीर को जरूरत से ज्यादा खींचते हैं, वार्म-अप को नजरअंदाज कर देते हैं या बिना सही तकनीक समझे कठिन आसन करने लगते हैं। कुछ लोग सांस रोककर आसन करते रहते हैं, जबकि कुछ दर्द होने के बावजूद अभ्यास जारी रखते हैं। ऐसी गलतियां खासतौर पर योग की शुरुआत करने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं। योग को आमतौर पर धीमी, नियंत्रित और जागरूक गतिविधि के रूप में किया जाता है। इसमें शरीर की क्षमता, सांस और मुद्रा के बीच तालमेल महत्वपूर्ण होता है। इसलिए किसी भी आसन को देखकर तुरंत कॉपी करने के बजाय उसकी सही तकनीक सीखना और अपनी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखना बेहतर है।
सांस लेने के तरीके को नजरअंदाज करना
योग में सांस पर ध्यान देना अभ्यास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन कई लोग कठिन मुद्रा में पहुंचते ही अनजाने में सांस रोक लेते हैं। सांस को अनावश्यक रूप से रोकना या बहुत तेजी से सांस लेना अभ्यास को असहज बना सकता है।
बिना वार्म-अप के न करेंआसन
कई लोग योग मैट बिछाते ही सीधे कठिन आसनों या स्ट्रेचिंग से शुरुआत कर देते हैं। यह आदत सही नहीं मानी जाती। शरीर को अभ्यास के लिए तैयार करने के लिए शुरुआत में कुछ हल्की गतिविधियां और आसान मूवमेंट किए जा सकते हैं। कुछ मिनट हल्का वार्म-अप करने से शरीर धीरे-धीरे गतिविधि के लिए तैयार होता है। इसके बाद आसान आसनों से शुरुआत करके धीरे-धीरे अभ्यास की तीव्रता बढ़ाई जा सकती है। जैसे गर्दन, कंधे, हाथ-पैर और शरीर के दूसरे हिस्सों को हल्के मूवमेंट से तैयार करें और फिर आसनों की ओर बढ़ें।
योग को सिर्फ तेज एक्सरसाइज समझना
कुछ लोग योग करते समय हर मूवमेंट को बहुत तेजी से करने लगते हैं। लेकिन कई योग अभ्यासों में शरीर की जागरूकता, नियंत्रित मूवमेंट और सांस पर ध्यान महत्वपूर्ण होता है। हर योग शैली की अपनी तकनीक और गति होती है। इसलिए केवल तेजी से आसन बदलना योग का उद्देश्य नहीं है। इसलिए जिस योग शैली का अभ्यास कर रहे हैं, उसकी तकनीक और गति को समझें।
गलत पोस्चर में आसन करना
किसी योगासन का नाम जान लेना और उसे सही तरीके से करना दो अलग बातें हैं। हाथ, पैर, गर्दन, रीढ़ या कूल्हों की स्थिति थोड़ी भी गलत होने पर आसन का तरीका बदल सकता है। सोशल मीडिया वीडियो देखकर बिना तकनीक समझे आसन कॉपी करना इसलिए उचित नहीं है। इसलिए शुरुआत में प्रशिक्षित योग शिक्षक से बेसिक पोस्चर सीखें। जरूरत पडऩे पर योग ब्लॉक, स्ट्रैप या अन्य उपयुक्त सहायता का इस्तेमाल प्रशिक्षक की सलाह से किया जा सकता है।
शरीर को जरूरत से ज्यादा खींचना
योग में लचीलापन महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर आसन में शरीर को अधिकतम सीमा तक खींचना जरूरी है। कई शुरुआती लोग दूसरों को देखकर खुद को उसी मुद्रा में लाने की कोशिश करते हैं। इससे शरीर पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है। योग में जितना ज्यादा स्ट्रेच, उतना ज्यादा फायदा वाला नियम लागू नहीं होता। इसलिए जहां तक शरीर सहजता से जा रहा है, वहीं तक आसन करें। धीरे-धीरे अभ्यास के साथ अपनी क्षमता विकसित करें।
दर्द होने के बावजूद योग करना
योग करते समय हल्का खिंचाव और असहनीय दर्द एक जैसी चीजें नहीं हैं। अगर किसी आसन के दौरान तेज दर्द, चक्कर, सांस लेने में परेशानी या अचानक असहजता महसूस हो तो उसे नजरअंदाज करके अभ्यास जारी नहीं रखना चाहिए। बल्कि तुरंत आसन से बाहर आएं और आराम करें। बार-बार समस्या होने पर योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ या प्रशिक्षित योग शिक्षक से सलाह लें। खासकर चोट, सर्जरी, गर्भावस्था या किसी पुरानी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में योग अभ्यास शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
रिकवरी को नजरअंदाज करना
रोज योग करना अच्छी आदत हो सकती है, लेकिन शरीर को आराम की जरूरत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर लगातार थकान, दर्द या कमजोरी महसूस हो रही है तो आराम करना जरूरी हो सकता है। योग सत्र के अंत में कुछ समय शांत होकर आराम करना भी अभ्यास का हिस्सा बनाया जा सकता है।



