गुजरात फतह की तैयारी, सुरजेवाला ने बनाया बड़ा प्लान, 3 मुद्दों पर BJP को घेरने की रणनीति
गुजरात में कांग्रेस ने आगामी चुनावी तैयारी तेज कर दी है... कांग्रेस के गुजरात प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने संगठन को मजबूत करने...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः अगले साल देश के कई अहम राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं.. वहीं चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अभी से सियासी हलचल तेज हो गई है.. सभी पार्टियां अपने संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने में जुटी हैं.. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में भी अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं.. गुजरात में लंबे समय से सत्ता में काबिज बीजेपी को चुनौती देने के लिए कांग्रेस ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं.. पार्टी लगातार बैठकों और रणनीतिक मंथन के जरिए चुनावी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है.. इसी कड़ी में कांग्रेस ने दिग्गज नेता रणदीप सुरजेवाला को गुजरात का नया प्रभारी बनाया है.. जिम्मेदारी मिलने के बाद सुरजेवाला ने भी गुजरात को लेकर अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है..
बताया जा रहा है कि गुजरात में बीजेपी को राजनीतिक चुनौती देने के लिए कांग्रेस इस बार अपनी चुनावी रणनीति में कुछ अहम बदलाव करने की तैयारी में है.. सूत्रों के मुताबिक, रणदीप सुरजेवाला ने गुजरात प्रभारी की जिम्मेदारी संभालने के बाद पार्टी नेताओं के साथ शुरुआती बातचीत में चुनावी रणनीति को लेकर कई अहम बातें रखीं.. सुरजेवाला का गुजरात से पुराना राजनीतिक जुड़ाव भी रहा है.. 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान, जब कांग्रेस ने बीजेपी को कड़ी चुनौती दी थी.. तब सुरजेवाला पार्टी के मीडिया प्रबंधन से जुड़े अहम जिम्मेदारियों में थे.. उस चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन पिछले मुकाबलों की तुलना में बेहतर रहा था.. इसके अलावा सुरजेवाला की राजनीतिक पहचान कर्नाटक से भी जुड़ी रही है.. जहां उन्हें 2020 में कांग्रेस का प्रभारी महासचिव बनाया गया था..
इसके बाद 2023 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव हुए और कांग्रेस ने वहां जीत हासिल कर सरकार बनाई.. इसी राजनीतिक अनुभव को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने गुजरात की जिम्मेदारी भी रणदीप सुरजेवाला को सौंपी है.. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में पार्टी गुजरात में संगठन को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.. सूत्रों के अनुसार, नई जिम्मेदारी मिलने के बाद सुरजेवाला ने गुजरात को लेकर एक खास रणनीति तैयार की है.. गुजरात के पार्टी नेताओं के साथ पहली महत्वपूर्ण बैठक में उन्होंने चुनाव को लेकर तीन प्रमुख रणनीतिक बिंदुओं पर जोर दिया.. इनमें सबसे पहला मुद्दा राज्य से जुड़े स्थानीय विषयों को चुनावी चर्चा के केंद्र में रखना बताया जा रहा है.. यानी कांग्रेस राष्ट्रीय मुद्दों की जगह गुजरात के स्थानीय सवालों पर ज्यादा फोकस करना चाहती है..
सूत्रों के मुताबिक, सुरजेवाला की पहली रणनीति यह है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को राष्ट्रीय मुद्दों की बजाय स्थानीय.. और राज्य से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए.. पार्टी का फोकस गुजरात की जनता से जुड़े सवालों पर रखने की योजना है.. इसमें राज्य की सरकार, स्थानीय प्रशासन, विकास, रोजगार और दूसरे क्षेत्रीय मुद्दों को चुनावी बहस का हिस्सा बनाया जा सकता है.. कांग्रेस का मानना बताया जा रहा है कि राज्य के चुनाव में स्थानीय मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देने से जनता के साथ सीधा जुड़ाव बनाया जा सकता है.. इस रणनीति के तहत पार्टी अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी स्थानीय स्तर पर सक्रिय करने की तैयारी में है.. यानी चुनावी अभियान को दिल्ली के मुद्दों से हटाकर गुजरात की राजनीति.. और गुजरात की जनता के सवालों के आसपास रखने की कोशिश की जाएगी..
रणदीप सुरजेवाला की बताई जा रही दूसरी रणनीति भी काफी अहम है.. सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस गुजरात चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधे व्यक्तिगत हमलों से बचने की रणनीति अपना सकती है.. इसके बजाय पार्टी के राजनीतिक हमलों के केंद्र में गुजरात सरकार, मुख्यमंत्री, मंत्री और स्थानीय विधायक रहेंगे.. यानी कांग्रेस का निशाना सीधे दिल्ली के बड़े नेताओं की बजाय राज्य की बीजेपी सरकार और उसके कामकाज पर केंद्रित रखने की योजना बताई जा रही है.. पार्टी राज्य के मुद्दों को सामने रखकर सरकार से सवाल करने की कोशिश करेगी.. इस रणनीति के तहत कांग्रेस स्थानीय नेतृत्व को ज्यादा सक्रिय भूमिका देने की तैयारी में है.. ताकि चुनावी अभियान में राज्य के नेताओं की मौजूदगी और भागीदारी बढ़ाई जा सके..
कांग्रेस की तीसरी रणनीति कारोबार और गुजरात की राजनीतिक-सामाजिक सोच से जुड़ी बताई जा रही है.. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी चुनाव प्रचार के दौरान अडानी और अंबानी का नाम लेकर सीधे हमले करने से भी बच सकती है.. इसके पीछे पार्टी की रणनीतिक सोच यह बताई जा रही है कि गुजरात में व्यापार.. और कारोबार को काफी महत्व दिया जाता है.. अडानी और अंबानी दोनों का गुजरात से जुड़ाव रहा है.. और बड़े कारोबारी समूहों के तौर पर उनकी पहचान है.. ऐसे में कांग्रेस अपने चुनावी अभियान को उद्योगपतियों के खिलाफ सीधे हमले की बजाय राज्य सरकार की नीतियों.. और स्थानीय मुद्दों तक सीमित रखना चाहती है.. पार्टी का फोकस जनता से जुड़े सवालों पर रखने की कोशिश की जा रही है.. ताकि चुनावी संदेश को स्थानीय स्तर पर ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके..



