राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

राफेल डील को लेकर पीएम मोदी के खिलाफ विवादित टिप्पणी का मामला, मानहानि के ट्रायल पर कोर्ट ने रोक लगाई, याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किया

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। राफेल डील को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विवादित टिप्पणी का मामले में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. गिरगांव कोर्ट में चल रहे मानहानि के ट्रायल पर कोर्ट ने रोक लगा दी है। राहुल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को नोटिस जारी करके चार हफ्ते में जवाब मांगा है। जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने इस मामले में सुनवाई की थी।
राहुल ने महाराष्ट्र के गिरगांव की अदालत में चल रहे मानहानि के मुकदमे को रद्द करने की मांग की है। बीजेपी कार्यकर्ता की ओर से दायर शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी ने राजस्थान में हुई एक रैली में राफेल सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चोरों का सरदार कहा था। इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका को खारिज कर दिया था, राहुल ने इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की बेंच ने आदेश दिया है। मामला 2018 में राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर राहुल गांधी की कथित टिप्पणियों से जुड़ा है। राहुल ने कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कमांडर-इन-थीफ और चोरों के सरदार जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मानहानि मामले में निचली अदालत में चल रहे ट्रायल पर फिलहाल रोक रहेगी।

गांधी परिवार की संपत्तियों पर रोक लगाने से हाईकोर्ट का इनकार

नेशनल हेराल्ड मामले में गांधी परिवार से जुड़ी संपत्तियों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय-ईडी को दिल्ली हाई कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। हाई कोर्ट ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की कुर्क की गई संपत्तियां छुड़ाने के लिए अपीलीय न्यायाधिकरण जाने से रोकने का आदेश देने से इनकार कर दिया। जस्टिस सचिन दत्ता की अदालत ने साफ किया कि वह इस स्तर पर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं कर रही है। ईडी ने यह याचिका उस ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की है, जिसमें गांधी परिवार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया था। दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत को बताया कि संबंधित कंपनियां ट्रायल कोर्ट के आदेश का इस्तेमाल कर कुर्क की गई संपत्तियों को छुड़ाने के लिए पीएमएलए अपीलीय न्यायाधिकरण का रुख कर रही हैं।

ट्रायल कोर्ट ने ईडी की शिकायत पर उठाए थे सवाल?

इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने 16 दिसंबर, 2025 को ईडीकी शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। अदालत का कहना था कि ईडी की अभियोजन शिकायत कानून के तहत सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि यह पीएमएलए के तहत तय अपराध से जुड़ी एफआईआर आधारित नहीं थी।

तिरंगा फहराना गुनाह है क्या : दिपके
कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने पर भडक़ी सीजेपी, बोले -और उग्र होगा आंदोलन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के बाद सीजेपी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने पर पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस और सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इसे विरोध की आवाज दबाने की कोशिश बताया, हिरासत में लिए गए लोगों को वकील से बात करने देने की मांग की और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक तिरंगा फहराने का आंदोलन जारी रखने का एलान किया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद बढ़ गया है।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने साथियों को हिरासत में लिए जाने पर सरकार और दिल्ली पुलिस को घेरा है। मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने को कानून का उल्लंघन मानता है, तो वह देशद्रोही है। दिपके के मुताबिक, तिरंगा फहराने पर लोगों को हिरासत में लेना समझ से परे है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कार्रवाई के विरोध में आंदोलन और तेज किया जाएगा। दिपके ने बताया कि उनकी टीम मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पहुंची थी और वहां तिरंगा फहराया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उनके साथियों आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे समेत कई लोगों को हिरासत में ले लिया। दिपके ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना कब से अपराध हो गया? उन्होंने मांग की कि अगर तिरंगा फहराने के लिए उनके साथियों पर आरोप लगाए जाते हैं, तो इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जगह रखा गया

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया है कि दिल्ली में हिरासत में लिए गए पार्टी सदस्यों अशुतोष, अजिंक्य और सौरव को अलग-अलग रखा गया है, जबकि उनके साथ मौजूद 11 स्वयंसेवकों को किसी दूसरी जगह ले जाया गया है। दिपके ने बताया कि उन्होंने पार्टी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह से बात की थी, जिन्होंने उन्हें यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब पार्टी के वकील पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी। दिपके के मुताबिक, पार्टी के अन्य सदस्यों को भी वहां हिरासत में लेने की धमकी दी गई। उन्होंने देश में तानाशाही चलने और नियमों की अनदेखी होने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि आखिर सरकार किस बात से डर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में यह भी सवाल किया कि ज्ञानेश कुमार को इतनी अहमियत क्यों दी जा रही है।

‘हिरासत में लिए गए लोगों को वकील से बात करने दें’

मीडिया से बात करते हुए सीजेपी नेता ने हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं के कानूनी अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने उम्मीद जताई कि दिल्ली पुलिस सभी को अपने वकीलों से बात करने की अनुमति देगी। दिपके ने आरोप लगाया कि उनके साथ पहले भी ऐसा हो चुका है, जब उन्हें 24 घंटे तक वकील से बात करने की इजाजत नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि किसी को भी इस तरह हिरासत में लेकर उसके कानूनी अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

सीईसी के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़े मामले की सुनवाई 15 तक टली

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त-सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध मार्च से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 15 अक्टूबर तक के लिए सुनवाई टाल दी है। मामले में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने, इंटरनेट बंद करने और मेट्रो तथा रेल सेवाओं में व्यवधान से जुड़े मुद्दे शामिल हैं. सुनवाई टालने की वजह बेंच की सदस्य जस्टिस वी. मोहना की तबीयत खराब होना है। वह लंबे समय तक सुनवाई करने की स्थिति में नहीं थीं। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने भी अभी तक मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं किया है.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 15 अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले पर इसी दिन आगे सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की विशेष सुनवाई हो रही है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली मेट्रो स्टेशनों और ट्रेन सेवाओं को व्यापक रूप से बंद करना न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही हैं। इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दों को उठाने वाली याचिकाएं दायर करने वाले याचिकाकर्ताओं को मंगलवार को आश्वासन दिया कि उनकी सभी अर्जियों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष कई याचिकाओं का उल्लेख कर उन्हें तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया।

कल 9 घंटे के भीतर 12 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट

75 की स्पीड से हवा भी चलेगी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कल का मौसम 14 अक्टूबर 2026 उत्तर-पूर्वी मानसून के आक्रामक प्रहार के बीच अब एक बार फिर से मौसम विभाग ने नया अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक कल यानी 14 अक्टूबर को यूपी, बिहार, दिल्ली समेत 12 राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक की आंधी चल सकती है।
ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उत्तराखंड में तूफानी हवा चलने की चेतावनी है। वहीं, पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश के चलते तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट देखने को मिल सकती है।
इसके अलावा 3 से अधिक राज्यों में बर्फबारी और ओले गिरने की संभावना है। किसानों को खास सतर्क रहने के लिए कहा गया है। उत्तर भारत के कुछ इलाकों में आकाशीय बिजली और वज्रपात गिरने की चेतावनी है। समुद्री किनारों से मछुआरों को दूर जाने की सलाह दी गई है। वहीं, इस बीच बंगाल की खाड़ी से चलने वाली तेज हवाएं पूर्वी भारत में कहर बरपा सकता है।
ईडी ने रामपुर जेल में जाकर आजम से की पूछताछ

जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की चल रही जांच

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
रामपुर। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट-ईडी ने 13 अक्टूबर को रामपुर जिला जेल में समाजवादी पार्टी के नेता आज़म खान से पूछताछ की। यह पूछताछ मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की चल रही जांच के सिलसिले में की गई।
श्वष्ठ के लखनऊ जोनल ऑफिस की एक टीम दिन में रामपुर जेल पहुँची और एजेंसी की जांच के दौरान इक_ा किए गए सबूतों के आधार पर पूछताछ की। यह पूछताछ उस बैरक में हुई जहांआजम खान अभी बंद हैं, और यह प्रक्रिया जारी रही। सरकारी कॉन्ट्रैक्ट के फंड को प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर्स के ज़रिए दूसरी जगह लगाने और बाद में उनके इस्तेमाल के आरोपों की जांच के तहत फ़ेडरल एजेंसी ने उनका बयान दर्ज किया। इसमें मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी संपत्तियां बनाना भी शामिल है। यह घटनाक्रम करीब ढाई महीने पहले उत्तर प्रदेश और दिल्ली में आज़म खान से जुड़ी दस जगहों पर ईडीकी छापेमारी के बाद हुआ है। ये ऑपरेशन 19 अगस्त को शुरू हुए थे और इनमें उत्तर प्रदेश के रामपुर और सहारनपुर के साथ-साथ दिल्ली की जगहें भी शामिल थीं। जिन जगहों पर तलाशी ली गई, उनमें मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी भी शामिल थीं; इस यूनिवर्सिटी की स्थापना आज़म खान ने 2006 में की थी और यह रामपुर में स्थित एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी है। ईडी ने कहा कि अब तक की जांच से पता चला है कि कुछ कॉन्ट्रैक्टर्स और ट्रस्ट के बीच पैसों का लेन-देन हुआ है और सरकारी कॉन्ट्रैक्ट से फ़ायदा उठाने वाले कॉन्ट्रैक्टर्स ने फंड को मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की तरफ मोड़ दिया, जिसमें भारी डोनेशन और कंस्ट्रक्शन का काम शामिल है।

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