जौहर यूनिवर्सिटी मामले में आजम खान को झटका, एक और FIR से बढ़ीं मुश्किलें

जेल में बंद समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जेल में बंद समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में नया केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई पिछले दिन हुई छापेमारी के बाद की गई है। मामले में ईडी की जांच अब मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से आगे बढ़ने की संभावना है।

मिली जानकारी के मुताबिक, रामपुर के अजीमनगर थाने में ईडी के निदेशक की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कराई गई थी। इसी FIR को आधार बनाकर प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की है। अब एजेंसी जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय लेनदेन तथा कथित अनियमितताओं की जांच करेगी।

हालांकि, नए केस के दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि आजम खान या किसी अन्य संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आरोप अदालत में साबित हो चुके हैं। मामले में जांच के निष्कर्ष और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी मामले में ED की नई कार्रवाई

जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी लंबे समय से आजम खान से जुड़े विभिन्न विवादों के कारण चर्चा में रहे हैं। अब प्रवर्तन निदेशालय की ओर से नया केस दर्ज किए जाने के बाद यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया है।

जानकारी के अनुसार, ईडी ने इस मामले में पहले छापेमारी की थी। इसके बाद रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू करने की दिशा में कदम उठाया गया है। ईडी की जांच का मुख्य उद्देश्य कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े लेनदेन, धन के स्रोत और संबंधित आर्थिक गतिविधियों की पड़ताल करना हो सकता है। हालांकि, जांच में किन विशिष्ट लेनदेन या दस्तावेजों को आधार बनाया गया है, इसकी विस्तृत जानकारी आधिकारिक रूप से सामने आने पर ही स्पष्ट होगी।

ईडी के मुताबिक, मामले में यूनिवर्सिटी के निर्माण पर हुए खर्च और ट्रस्ट की ओर से आयकर रिटर्न में घोषित पूंजीगत खर्च के बीच बड़ा अंतर सामने आया है. एजेंसी का दावा है कि यूनिवर्सिटी परिसर की इमारतों की अनुमानित निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये है, जबकि मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 2013-14 से 2024-25 के बीच कुल 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दिखाया है. इस तरह दोनों आंकड़ों के बीच करीब 416.14 करोड़ रुपये का अंतर है.

ईडी की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सरकारी ठेकों से जुड़ी निर्माण सामग्री और सरकारी धन का इस्तेमाल जौहर यूनिवर्सिटी परिसर के निर्माण में किया गया. एजेंसी के मुताबिक, ठेकेदारों के जरिए करीब 55.8 करोड़ रुपये, सरकारी कार्यों के जरिए 23.41 करोड़ रुपये और विधायक/विधान परिषद क्षेत्र विकास निधि से 6.60 करोड़ रुपये के काम यूनिवर्सिटी परिसर में कराए जाने का आरोप है. ईडी ने ट्रस्ट को मिले कुछ दान की वास्तविकता पर भी सवाल उठाए हैं.

FIR में कौन-कौन सी धाराएं?

रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61, 316(5) और 318(4) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13(1)(d) और 13(2) लगाई गई हैं. ईडी इस FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच करेगी. मामले में आजम खान, जौहर ट्रस्ट, ठेकेदारों और अन्य लोगों से जुड़े आरोपों की पड़ताल की जाएगी. एजेंसी का फोकस यह पता लगाने पर रहेगा कि यूनिवर्सिटी के निर्माण में इस्तेमाल हुए धन और सामग्री का स्रोत क्या था और क्या किसी तरह की अवैध कमाई या सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़ा मामला बनता है.

पुराने मामले से जोड़कर होगी जांच

ईडी के मुताबिक, नए केस की जांच को पहले से चल रही जांच के साथ जोड़कर आगे बढ़ाया जाएगा. छापेमारी के बाद दर्ज हुए इस नए मामले में निर्माण लागत, घोषित खर्च, सरकारी कार्यों से जुड़े भुगतान और ट्रस्ट को मिले दान की जांच अहम होगी. फिलहाल ईडी की ओर से लगाए गए आरोपों पर जांच जारी है.

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