मोदी-शाह की अहंकारी सरकार का अंत होकर रहेगा : सीजेपी

जन्मदिन पर जेल, तिरंगे पर घमासान

  • सीजेपी नेताओं को जेल भेजने पर भड़के नेता प्रतिपक्ष
  • सौरव व आशुतोष को पांच दिन की न्यायिक हिरासत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। राजनीति की राह ही ऐसी है लाइक सब्सक्राइब के बाद अरेस्टिंग की मंजिल आती जरूर है। खबर जंतर मंतर से जहां कॉकरोच जनता पार्टी के नेता आशुतोष रांका को ठीक हैप्पी बर्थडे वाले दिन अदालत ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उनके साथ सौरभ दास भी जेल की सलाखों के पीछे भेजे गये हैं किस्मत वाले रहे अजिंक्य शिंदे जिन्हें आदालत ने निजि बांड पर रिहा कर दिया। इस खबर ने काकरोचों को अंदर से हिला कर रख दिया है। नेताओं के बयान आ रहे हैं कि मोदी शाह की तानशही सरकार का अंत निकट आ चुका है और जल्द ही सरकार को जाना होगा। अजिंक्य शिंदे ने कहा है कि वह सिर्फ जंतर मंतर पर हाथ में तिरंगा लेकर भारत माता का जयकारा कर रहे थे और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि दिल्ली पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया पुलिस की पाबंदियों का उल्लंघन किया और पहले दिए गए शांति बनाए रखने के बॉन्ड की शर्तों को तोड़ा। इसी आधार पर कार्रवाई की गई। दूसरी तरफ सीजेपी के नेताओं का कहना है कि वे अपनी बात रखने और राष्ट्रीय ध्वज फहराने पहुंचे थे। रिहा हुए अजिंक्य शिंदे ने दावा किया कि उन्होंने तिरंगा लहराया और ‘भारत माता की जयÓ का नारा लगाया, लेकिन इसके बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन के लिए जेल भेज दिया गया। पार्टी के वकील ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

जेल से निकलेगी अगली रणनीति या आंदोलन बदलेगा अपना रास्ता?

सौरव दास और आशुतोष रांका की पांच दिन की न्यायिक हिरासत के बाद सीजेपी के सामने अब कई रास्ते हैं। पहला कानूनी राहत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना। दूसरा दिल्ली पुलिस से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख और स्थान तय करने की मांग पर आगे बढऩा। तीसरा एसआईटार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने अभियान को जारी रखना। 12 अक्टूबर को सीजेपी नेताओं ने दिल्ली पुलिस से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख देने और प्रदर्शन स्थल उपलब्ध कराने की मांग की थी। उन्होंने पुलिस से कार्रवाई में तनाव कम करने की अपील भी की थी। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी कानूनी और आंदोलनकारी दोनों मोर्चों पर सक्रिय रहना चाहती है। अब देखना होगा कि पार्टी अपनी अगली रणनीति में किस रास्ते को प्राथमिकता देती है अदालत में चुनौती प्रशासन से बातचीत या नए विरोध कार्यक्रम।

युवाओं को जेल भेजना कायरता : राहुल

लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी नेताओं को जेल भेजना कायरता का काम है। यह बयान तब आया जब सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया जबकि अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट में लिखा शांतिपूर्ण विरोध में जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराना अपराध नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता का काम है। छात्र, युवा, पत्रकार, इंडिया ब्लॉक, अलग-अलग बैनर के एक ही कारण है कि नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा जंतर-मंतर भारत के लोगों का है हम इसे वापस लेंगे तीन सीजेपी सदस्यों को जंतर-मंतर में अतिक्रमण के लिए निवारक गिरफ्तारी के तहत पकड़ा गया था जिसे अब निर्धारित विरोध स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित कर दिया गया है। उन पर अतिक्रमण, बॉन्ड उल्लंघन और लोक सेवकों के कर्तव्य में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके के साथ सौरव दास और आशुतोष रांका को 10 अक्टूबर के विरोध से जुड़े मामले में 50,000 रुपए का बॉन्ड भरने और इस शर्त पर रिहा किया गया था कि वे एक साल तक शांति भंग के किसी भी मामले में शामिल नहीं होंगे। इस बार सौरव दास और आशुतोष रांका पर अतिक्रमण और बॉन्ड शर्तों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है। उन्हें आदतन अपराधी के तौर पर देखा जा रहा है।

साझा मोर्चे की परीक्षा

सीजेपी नेताओं की न्यायिक हिरासत ने विपक्षी दलों के सामने विरोध के अधिकार और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाने का एक नया मुद्दा रखा है। आम आदमी पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने हिरासत की आलोचना करते हुए इसे तिरंगा लहराने से जोड़ा और कार्रवाई को तानाशाही बताया। कांग्रेस भी लगातार सरकार की तानाशही का निंदा कर रही है।

जंतर-मंतर पर ताला विरोध की आवाज कहां जाएगी?

जंतर-मंतर लंबे समय से दिल्ली में राजनीतिक और सामाजिक विरोध प्रदर्शनों की पहचान रहा है। ऐसे में इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का फैसला सीजेपी के विरोध का एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। दिल्ली पुलिस ने इसके बजाय रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया। सीजेपी का तर्क है कि जंतर-मंतर जैसे केंद्रीय स्थान पर प्रदर्शन की अपनी राजनीतिक दृश्यता होती है। दूसरी ओर प्रशासन के सामने सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी है। अब असली सवाल यह है कि क्या वैकल्पिक स्थानों पर भी प्रदर्शनकारियों को प्रभावी ढंग से अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।

खुल गया लड़ाई का नया मोर्चा

सीजेपी ने इस कार्रवाई को राजनीतिक लड़ाई का नया मोर्चा बना दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। उधर सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने से विवाद और गहरा गया है। जन्मदिन पर जेल पहुंचने की घटना ने इस पूरे प्रकरण को प्रतीकात्मक रंग दे दिया है। तिरंगे से शुरू हुई बहस अब गिरफ्तारी विरोध के अधिकार और कानून के पालन तक पहुंच गई है। सीजेपी के वकील अभिष्ट हेला ने मीडिया से बातचीत में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पुलिस ने इस आशंका के आधार पर नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की मांग की कि वह कोई अपराध कर सकते हैं।

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