तिरंगे की ललकार, दिल्ली में बैरिकेड की दीवार

दिपके की हुंकार से क्यों मची हलचल? ‘लहरा दो तिरंगा’ के सामने सत्ता की परीक्षा

सेंट्रल पार्क बंद, पुलिस का नोटिस भारी सुरक्षा इंतजाम
सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में सीजेपी का ऐलान
राहुल गांधी के तांडव से लेकर तिरंगे की राजनीति तक विपक्ष सरकार के बनाए नैरेटिव को उसी के सामने खड़ा कर रहा है

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली में तिरंगा लहराने की पुकार है और जवाब में बैरिकेड खड़े हैं। एक तरफ कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके हैं जो लहरा दो तिरंगा के नाम पर समर्थकों को जुटाने निकले हैं। दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस है जिसने दिपके को नोटिस थमाया है कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को दो दिन के लिए बंद रखा गया है और राजधानी के इस व्यावसायिक इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सवाल अब सिर्फ एक मार्च का नहीं रहा। सवाल यह है कि राष्ट्रीय ध्वज के साथ विरोध जताने की इस मुहिम का राजनीतिक असर कितना दूर तक जाएगा?
सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी ने सीजेपी को एक नया मुद्दा दे दिया है। पार्टी का आरोप है कि उसके नेताओं को प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने के कारण निशाना बनाया गया। पुलिस का पक्ष अलग है। उसके मुताबिक जंतर-मंतर पर प्रतिबंधों और शांति बनाए रखने की शर्तों के उल्लंंघन का मामला है। दोनों पक्षों के बीच यही टकराव अब दिल्ली की सडक़ों पर राजनीतिक सवाल बनकर खड़ा है। दिपके ने मार्च से पहले ही साफ कर दिया कि वह पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। पुलिस ने जहां लोगों से प्रस्तावित जमावड़े में शामिल नहीं होने की अपील की वहीं सीमित संख्या में लोगों को किसी उपयुक्त स्थान पर तिरंगा लेकर राष्ट्रगान गाने की सुविधा देने की बात भी कही। दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रस्तावित प्रदर्शन पर पूर्ण रोक लगाने से इनकार किया लेकिन पुलिस को कानून के मुताबिक भीड़ को नियंत्रित करने की छूट दी। उधर, सेंट्रल पार्क बंद होने और सुरक्षा के भारी इंतजाम ने इस पूरे प्रकरण को और बड़ा बना दिया है।
हाईकोर्ट ने नहीं लगाई पूर्ण रोक लेकिन पुलिस को नियंत्रण का अधिकार : प्रस्तावित मार्च को लेकर मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा। कनॉट प्लेस के एक व्यापारी की याचिका में आशंका जताई गई कि प्रदर्शन से व्यापार, यातायात और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। अदालत ने सीजेपी के प्रदर्शन पर पूर्ण रोक लगाने से इनकार किया। संबधित खबर पेज 8 पर ….

बीजेपी का नैरेटिव लौट कर उसी की ओर आ रहा है

अब इस तस्वीर को व्यापक राजनीति से जोडक़र देखिए। राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के खिलाफ चल रहे विरोध को शिव का तांडव बता चुके हैं। सीजेपी ने उसी राजनीतिक उबाल के बीच तिरंगे को अपने प्रदर्शन का केंद्रीय प्रतीक बनाया है। भाजपा लंबे समय से राष्ट्रवाद राष्ट्रीय ध्वज और देशभक्ति को अपनी राजनीतिक पहचान के प्रमुख हिस्सों में रखती रही है। ऐसे में ‘हर घर तिरंगा’ जैसे अभियान के बाद ‘लहरा दो तिरंगा’ का नारा विपक्षी विरोध की नई प्रतीकात्मक लड़ाई बन सकता है। लेकिन क्या इतना भर किसी राजनीतिक बाजी के पलटने का संकेत है। किसी आंदोलन की ताकत का फैसला केवल नारों, बैरिकेड या सुरक्षा बलों की संख्या से नहीं होता। यह देखना होगा कि कितने लोग साथ आते हैं अलग-अलग विपक्षी दल कितनी एकजुटता दिखाते हैं और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों पर ठोस जवाबदेही की मांग कितनी दूर तक पहुंचती है। चुनाव आयोग ने पक्षपात के आरोपों से इनकार किया है और भाजपा भी विपक्ष के आरोपों को खारिज करती रही है। फिर भी सत्ता के सामने एक मुश्किल सवाल खड़ा है कि आगे क्या होगा।

राष्ट्रवाद का नैरेटिव अब विपक्ष का तिरंगा

सीजेपी के मार्च का राजनीतिक अर्थ भी कम अहम नहीं है। भाजपा ने राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय प्रतीकों को अपनी राजनीतिक पहचान में प्रमुख स्थान दिया है। हर घर तिरंगा जैसे अभियान के जरिए राष्ट्रीय ध्वज को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा गया। अब सीजेपी ने लहरा दो तिरंगा को अपने विरोध का नारा बनाया है। इससे राजनीतिक संदेश की एक नई लड़ाई पैदा होती है। सीजेपी यह सवाल उठा रही है कि अगर तिरंगा देश के हर नागरिक का है तो उसे लेकर शांतिपूर्ण विरोध पर इतनी पाबंदियां क्यों? दूसरी तरफ सरकार और पुलिस के पक्ष में तर्क है कि राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान और कानून-व्यवस्था साथ-साथ चलने चाहिए किसी प्रतीक के इस्तेमाल से प्रतिबंधों का उल्लंघन वैध नहीं हो जाता। यही वह बिंदु है जहां विपक्ष भाजपा के राष्ट्रवाद संबंधी नैरेटिव को चुनौती देने की कोशिश कर सकता है। राहुल गांधी ने हाल में मुख्य चुनाव आयुक्त और एसआईआर को लेकर चल रहे विरोध को शिव का तांडव कहा था। उनका तर्क था कि यह आंदोलन किसी तय योजना से ज्यादा लोगों के दिल और संविधान की रक्षा की भावना से जुड़ा है। उन्होंने अलग-अलग विरोधों को एक व्यापक लोकतांत्रिक प्रतिरोध के रूप में पेश किया।

दिपके को नोटिस, पार्क बंद

दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके को प्रस्तावित मार्च के संबंध में नोटिस दिया और कनॉट प्लेस में भीड़ जुटाने पर प्रतिबंधों का हवाला दिया। सेंट्रल पार्क को दो दिन के लिए बंद रखने का आदेश भी सामने आया। आधिकारिक सूचना में इसके लिए प्रशासनिक कारण बताए गए। पुलिस ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान गाने के लिए नियमों, गरिमा और अनुशासन का पालन होना चाहिए। पुलिस ने सीमित समूह को किसी उपयुक्त स्थान पर तिरंगा लेकर राष्ट्रगान गाने की सुविधा देने की बात भी कही। रिपोर्टों के मुताबिक, 11 लोगों के समूह का विकल्प सामने आया। दूसरी ओर सीजेपी की अपील बड़े जनसमूह को जुटाने की है।

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