यूसुफ पठान को BJP का ‘तोहफा’, चुटकियों में मिली करोड़ों की जमीन
पूर्व क्रिकेटर और TMC सांसद यूसुफ पठान को करोड़ों की जमीन मिलने का मामला चर्चा में है... BJP सरकार के दौरान जमीन आवंटन से...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः पूर्व भारतीय क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान के लिए यह राहत सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा नहीं है.. यह चौदह साल पुराने उस कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम का अंत है.. जिसने उनके करियर और राजनीति दोनों को एक साथ जोड़ दिया था.. उन्नीस अक्टूबर दो हजार छब्बीस को गुजरात सरकार ने वडोदरा के तांदलजा इलाके में.. नौ सौ अठहत्तर वर्ग मीटर के उस विवादित प्लॉट को यूसुफ पठान को आवंटित करने की मंजूरी दे दी.. जिस पर दो हजार चौबीस में वडोदरा नगर निगम ने उन्हें अतिक्रमण का नोटिस भेजा था.. यह फैसला ऐसे समय पर आया जब पठान ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया के साथ जाने का फैसला किया था.. पूरी कहानी दो हजार बारह से शुरू होती है.. जब उन्होंने वडोदरा नगर निगम से उस प्लॉट को निन्यानवे साल की लीज पर देने की मांग की थी.. जो उनके पारिवारिक बंगले से सटा हुआ है..
वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति और सामान्य सभा ने बिना सार्वजनिक नीलामी के सीधे आवंटन का प्रस्ताव पारित कर उसे राज्य सरकार के पास मंजूरी के लिए भेज दिया.. जून दो हजार चौदह में शहरी विकास विभाग ने यह कहते हुए प्रस्ताव खारिज कर दिया.. कि कीमती जमीन के लिए सार्वजनिक नीलामी या खुली बोली जरूरी है.. इसके बाद नगर निगम ने आरोप लगाया कि पठान ने खारिज होने के बावजूद उस प्लॉट को बाड़ लगाकर कब्जा कर लिया.. मामला फिर दो हजार चौबीस में सुर्खियों में आया.. जब पठान ने पश्चिम बंगाल की बहरामपुर सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता.. और सांसद बने.. जून दो हजार चौबीस में नगर निगम ने उन्हें अतिक्रमण हटाने का नोटिस भेज दिया.. पठान ने इसके खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट में अपील की.. जहां उनके वकीलों ने अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को जमीन आवंटित करने वाली सरकारी नीति का हवाला दिया.. जबकि नगर निगम ने दलील दी कि जमीन नगर निगम की है..
जून 2026 में पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के बाद यूसुफ पठान उन बीस तृणमूल कांग्रेस सांसदों में शामिल थे.. जिन्होंने पार्टी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर लिया.. और पठान को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया.. इसके ठीक बाद गुजरात सरकार ने 13 अगस्त 2026 को एक प्रस्ताव पारित किया.. जो उनतीस अगस्त को नगर निगम तक पहुंचा.. 31 अगस्त को पठान ने गुजरात हाईकोर्ट से अपनी अपील वापस ले ली.. यानी पहले राजनीतिक पाला बदला फिर सरकारी मंजूरी आई और फिर कोर्ट से केस वापस लिया गया.. यह क्रम ही इस पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा है.. गुजरात सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक नौ सौ अठहत्तर वर्ग मीटर के इस प्लॉट में से पांच सौ वर्ग मीटर जमीन यूसुफ पठान को आवासीय इस्तेमाल के लिए मुफ्त गिफ्ट की जाएगी.. बाकी बचे चार सौ अठहत्तर वर्ग मीटर का हस्तांतरण पचपन प्रतिशत मूल्यांकन पर किया जाएगा.. यानी उस मूल्य पर पैंतालीस प्रतिशत की छूट दी जाएगी.. जो वडोदरा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी की मूल्यांकन समिति ने सत्रह मार्च दो हजार छब्बीस को तय किया था..
आपको बता दें कि नगर निगम ने जुलाई दो हजार छब्बीस में इस प्लॉट का मूल्यांकन दो लाख दस हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर तय किया था.. इससे पूरे प्लॉट की अनुमानित बाजार कीमत बीस करोड़ तिरेपन लाख रुपये आंकी गई.. सरकारी प्रस्ताव के मुताबिक पांच सौ वर्ग मीटर मुफ्त मिलने का मतलब है.. कि पठान को सीधे तौर पर करीब दस करोड़ पचास लाख रुपये की संपत्ति बिना कुछ दिए मिल रही है.. बाकी चार सौ अठहत्तर वर्ग मीटर पर पैंतालीस प्रतिशत छूट का मतलब है कि.. उन्हें बाजार भाव से कम कीमत चुकानी पड़ेगी.. यानी कुल मिलाकर यह राहत दस करोड़ रुपये से ज्यादा की है.. गुजरात सरकार के प्रस्ताव में एक अहम शर्त यह भी दर्ज है कि यह व्यवस्था भविष्य के लिए मिसाल नहीं मानी जाएगी.. और राजस्व विभाग नगर निगम को उस जमीन के बराबर मूल्य की दूसरी जमीन मुआवजे के तौर पर आवंटित करेगा.. यह शर्त बताती है कि सरकार जानती है कि यह फैसला सामान्य नहीं है.. और इस पर सवाल उठ सकते हैं इसलिए उसने पहले ही सफाई दे दी कि यह सिर्फ इस एक केस के लिए है..



