CEC और SIR पर पंजाब विधानसभा सख्त, प्रस्ताव पारित कर रखीं ये मांगें

इस प्रस्ताव के जरिए सरकार ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष रखा।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पंजाब विधानसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR के मुद्दे पर सरकार की ओर से प्रस्ताव पेश किया गया था। इस प्रस्ताव के जरिए सरकार ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष रखा।

प्रस्ताव के सर्वसम्मति से पारित होने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस घटनाक्रम को पंजाब की राजनीति और चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

सरकार की ओर से सदन में पारित किया गया प्रस्ताव इस प्रकार है:
1. यह सदन नागरिकों को कथित तौर पर उनके मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करता है और मांग करता है कि सभी योग्य नागरिकों के मतदान के अधिकार की संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.

2. यह सदन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच तंत्र स्थापित करने की मांग करता है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जवाबदेही तय की जा सके.

3. यह सदन मांग करता है कि जांच के दौरान यदि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक उल्लंघनों के ठोस सबूत मिलते हैं, तो लागू कानून के अनुसार उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की जाए.

4. यह सदन केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक प्राधिकारियों से यह सुनिश्चित करने की अपील करता है कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और जवाबदेही बनी रहे, तथा उचित अग्रिम कार्रवाई के लिए इस प्रस्ताव की एक प्रति भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजी जाए.

5. बाबासाहेब आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से भारत के प्रत्येक नागरिक को मतदान का समान अधिकार दिया था, लेकिन ज्ञानेश कुमार ने संविधान को तार-तार करते हुए भारत के नागरिकों को इस अधिकार से वंचित करने का काम किया है.

यह सदन दृढ़ता से दोहराता है कि लोकतंत्र में हर योग्य नागरिक का वोट बहुमूल्य है. किसी भी नागरिक को मतदान के अधिकार से अवैध रूप से वंचित करना संवैधानिक लोकतंत्र के मूल मूल्यों के खिलाफ है. देश के लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनता के मतदान के अधिकारों की रक्षा करना और चुनावी संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना अनिवार्य है.

प्रस्ताव में क्या की गई मांग?

प्रस्ताव के जरिए मांग की गई कि अब तक हुई SIR की जांच की जाए और करोड़ों लोगों के वोट काटे जाने के लिए दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. प्रस्ताव के जरिए चुनाव आयोग की स्वतंत्रता बचाये जाने की मांग की गई है.

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रस्ताव पर बहस के दौरान कहा कि 13 करोड़ से ज्यादा लोगों के वोट SIR के जरिए काट दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी खुद ही चुनाव आयोग के जरिए वोट काट देती है और खुद ही अपने समर्थकों के वोट जोड़ देती है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR लोकतंत्र के खिलाफ है इसलिए लोकतंत्र बचाने के लिए SIR को रद्द करना चाहिए. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली साफ और निष्पक्ष नहीं है.

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