जूनियर्स से रैगिंग करना पड़ा भारी, जालौन मेडिकल कॉलेज के 17 छात्र निलंबित

प्रशासन का कहना है कि कॉलेज परिसर में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के उरई स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का मामला सामने आया है। जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू की। शुरुआती कार्रवाई में वर्ष 2025 बैच के जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग के मामले में 7 सीनियर छात्रों को एक सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया गया। इसके साथ ही प्रत्येक छात्र पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ रैगिंग का वीडियो

जानकारी के अनुसार, राजकीय मेडिकल कॉलेज, उरई में वर्ष 2025 बैच के जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन का ध्यान इस मामले की ओर गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए कॉलेज प्रशासन ने जांच शुरू की। जांच के शुरुआती चरण में सात सीनियर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इन छात्रों पर जूनियर विद्यार्थियों के साथ रैगिंग करने का आरोप था।

17 छात्र 3 महीने के लिए सस्पेंड

कॉलेज प्रशासन ने दोषी पाए गए सभी 17 सीनियर छात्रों को तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया है. इसके साथ ही प्रत्येक छात्र पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है. इस कार्रवाई के जरिए कॉलेज प्रशासन ने साफ कर दिया है कि रैगिंग से जुड़े मामलों में किसी भी छात्र को छूट नहीं दी जाएगी.

प्रशासन का कहना है कि कॉलेज परिसर में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है. रैगिंग के कारण जूनियर छात्रों को किसी तरह की परेशानी या दबाव का सामना न करना पड़े, इसके लिए नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा.

जूनियर से मोबाइल नंबर मांगना भी पड़ेगा भारी

कॉलेज प्रशासन ने रैगिंग रोकने के लिए 21 अक्टूबर को एक कार्यालय नोटिस जारी किया था. इसमें स्पष्ट किया गया कि सीनियर छात्रों द्वारा जूनियर विद्यार्थियों से मोबाइल नंबर मांगना या उन्हें नंबर देने के लिए मजबूर करना भी रैगिंग नियमों के तहत दंडनीय है. इसके अलावा जूनियर छात्रों को उल्टे-सीधे मैसेज भेजने पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.

इसके बाद 25 अक्टूबर को एक और नोटिस जारी कर पहले दिए गए निर्देशों का पालन करने को कहा गया. जूनियर छात्रों को बताया गया कि वे किसी भी सीनियर छात्र को मोबाइल नंबर देने के लिए बाध्य नहीं हैं. यदि किसी वरिष्ठ छात्र की ओर से गलत मैसेज आता है तो वे संबंधित नंबर को ब्लॉक कर एंटी रैगिंग कमेटी को इसकी जानकारी दे सकते हैं. कॉलेज प्रशासन ने यह भी कहा कि ऐसे मैसेज को आगे भेजने या वायरल करने वाले जूनियर छात्र भी नियमानुसार कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं.

छात्रावासों में लगाए गए हेल्पलाइन नंबर

राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी ने बताया कि कॉलेज में एंटी रैगिंग कमेटी सक्रिय है. छात्रों की मदद के लिए जरूरी संपर्क नंबर छात्रावासों में भी लिखे गए हैं, ताकि किसी परेशानी की स्थिति में वे तुरंत समिति से संपर्क कर सकें. प्रधानाचार्य ने स्पष्ट किया कि कॉलेज परिसर में रैगिंग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

विद्यार्थियों को सुरक्षित माहौल देने और उनके सम्मान की रक्षा के लिए आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे. कॉलेज प्रशासन ने छात्रों से अपील की है कि रैगिंग या किसी भी तरह के अनुचित व्यवहार की जानकारी मिलने पर इसकी सूचना तुरंत संबंधित समिति को दें.

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