योगी जी.. जो अधिकारी विस अध्यक्ष के सामने बना था शेर, क्यों हुआ पूंजीपतियों के आगे ढेर!

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क/प्रांजुल मिश्रा
कानपुर। उपरोक्त हेडिंग पढ़ आप भी सोच रहे होंगे आखिर जो लिखा है इसका मतलब क्या है.. उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक ऐसा वाकय़िा हुआ था जिसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया था कि क्या सच में अधिकारी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ही काम कर रहे हैं या मुख्य मंत्री जी को धोखा दे रहे हैं ? क्योंकि उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री से ज्यादा पावर वाली कुर्सी में बैठे विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के सामने योगी जी का एक अधिकारी शेर बन बैठा था.. जिसे विधानसभा अध्यक्ष के गुस्से का भी सामना करना पड़ा था हालांकि एक मैनेजमेंट गुरु ने प्रकरण पर मिट्टी डालकर विस अध्यक्ष महाना का गुस्सा शांत करवा दिया था लेकिन वही अधिकारी अब पूंजीपतियों के आगे ढेर हो चुका है मानों पूरी तरह से नतमस्तक हो…!
यह बात है जून 2026 की जब अवैध निर्माण के खिलाफ कार्यवाही करने के उद्देश्य से कानपुर विकास प्राधिकरण के जोन 1ए का प्रवर्तन दस्ता निकला हुआ था विशेष अभियान के तहत अवैध निर्माणों को सील किया जा रहा था इसी दौरान प्रवर्तन प्रभारी अतुल राय ने बीजेपी से महाराजपुर विधानसभा के विधायक और उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के भाई बिट्टू महाना के पूर्व में हुए निर्माण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई करते हुए बेसमेंट में चल रहे रेस्टोरेंट को सील करके चले आए थे , क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में अधिकारी शेर बनकर दिखावे की कार्यवाई तो करते हैं लेकिन सरकार की छवि को ढाल बनाकर दिखावे की इस कार्यवाही का इस्तेमाल भी खूब किया जा रहा है। इसके कई उदाहरण सामने है जहां पीठ पीछे स्व हित साधे गए ?

निष्पक्ष जांच करवा करके इन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी : सचिव

वह इस पूरे प्रकरण पर जब कानपुर विकास प्राधिकरण के सचिव अभय कुमार पाण्डेय से बात की गई तो उन्होंने बताया प्रकरण संज्ञान में आए हैं मामले की निष्पक्ष जांच करवा करके इन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रवर्तन जोन 1 ए के प्रवर्तन प्रभारी अतुल राय के कार्यकाल में 300+ अवैध निर्माण

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के सामने शेर बने प्रवर्तन जोन 1ए के प्रवर्तन प्रभारी अतुल राय के कार्यकाल में 300+ अवैध निर्माण इसकी बानगी हैं कई तो ऐसे निर्माण हैं जो दस्तावेजों में सील हैं लेकिन सील बिल्डिंगों में डंके की चोट पर धड़ल्ले से अवैध निर्माण जारी हैं.. एक्स्ट्रा स्लैवो का अंबार लगा हुआ है मानों जैसे दिवाली की सेल में कोई बम्पर ऑफर निकला हो हां वो बात अलग है कार्यवाही के नाम पर प्रवर्तन प्रभारी अतुल राय सुस्त पड़े हैं, जबकि अगर उन पर कड़ा एक्शन लिया जाए तो करोड़ों-अरबों रुपए का राजस्व प्राधिकरण की झोली में आ सकता है। ज़्यादा दूर न जाइए तो केडीए ऑफिस से चंद कदमों की दूरी पर गोविंद त्रिवेदी के वेदांता अस्पताल को ले लीजिए जिसमें दो एक्ट्रा स्लैबो का निर्माण हो गया पाँचवीं स्लैब को ध्वस्तीकरण होना था.. पचासों लाख के आसपास या उससे ऊपर लगने वाले आमेलन शुल्क का शायद अता पता नहीं है..इसके बाद में रोड ऑफिसर बंगलों से चंद कदमों की दूरी पर बनें डॉ. स््य कटियार के प्रथा हॉस्पिटल में दो एक्ट्रा स्लैबो का निर्माण हो गया.. मधुराज हॉस्पिटल में बेसमेंट का उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है हां सूत्रों ने बताया लाखों रुपए कार्यवाही के नाम पर वसूल लिए गए… स्वरूप नगर-आर्यनगर स्थित संगम पान के बगल में बबलू जैन का डंके की चोट पर अवैध निर्माण जारी है।

दस्तावेजों में तो सील लेकिन निर्माण बराबर जारी

चमनगंज में बाबा स्वीट्स दस्तावेजों में तो सील था लेकिन निर्माण बराबर जारी रहा इसी तरह से रक्षा बंधन के पावन अवसर पर धसने वाली बिल्डिंग जिसे डिमोलिश करवाया गया उसी संकरी गली के सामने सील बिल्डिंग में निर्माण जारी है अधिकारियों की मेंहरबानी से अब तो सील का पट्टा भी हटा दिया गया मेंहरबानी यहीं ख़त्म नहीं हुई इसी तरह से चमनगंज-प्रेमनगर में बनें कानपुर सिटी हॉस्पिटल में एक्स्ट्रा स्लैब डाल दी गई और मौके पर हॉस्पिटल संचालित भी रहा… जिम्मेदारों के कारनामें और भी है लेकिन सवाल ये उठता है कि विधानसभा अध्यक्ष से मोर्चा लेनें वाले बेहद ईमानदार छवि के प्रवर्तन प्रभारी अतुल राय इन सभी पूंजीपतियों के आगे नत्मस्तक क्यों हैं जैसे बिट्टू महाना के बेसमेंट के खिलाफ एक्शन लिया था उसी तरह से बाकी जगह एक्शन लेने में क्यों उनके हाँथ कांप रहे हैं….? अगर इन सबके खिलाफ तगड़ा एक्शन लिया जाए तो शायद करोड़ों रुपए का राजस्व प्राधिकरण की झोली में आ सकता है लेकिन प्राधिकरण के राजस्व से मतलब किसको है यहां तो जिम्मेदारों को अपना निजी राजस्व वसूलना होता है।

आर्थिक बदहाली की सच्चाई स्वीकार करे मोदी सरकार: जयराम रमेश
कांग्रेस ने महंगाई को लेकर केंद्र पर साधा निशाना

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कांग्रेस ने बढ़ती महंगाई, कर्ज और कथित तौर पर घटती आमदनी को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि सरकार को आर्थिक बदहाली की सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने एवं महंगाई पर काबू पाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में यह दावा भी किया कि केंद्र सरकार महंगाई की वास्तविक स्थिति छिपाने के लिए आंकड़ों को ‘‘तोड़-मरोडक़र’’ पेश कर रही है और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों का सबसे अधिक खामियाजा युवाओं तथा मध्यम वर्ग को भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, बढ़ती महंगाई, बढ़ता कर्ज, घटती कमाई, मोदी सरकार में मध्यम वर्ग के हिस्से आई सिर्फ तबाही। रमेश ने दावा किया कि अर्थव्यवस्था की स्थिति और रोजगार के घटते अवसरों से युवा पीढ़ी सबसे अधिक प्रभावित हो रही है। उनके मुताबिक, कंपनियां पहले की तुलना में कम भर्तियां कर रही हैं और कई लोगों की वर्षों पुरानी नौकरियां भी जा रही हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि महंगाई की तुलना में आमदनी और बचत घट रही है, जबकि परिवारों पर कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई परिवार रोजमर्रा का खर्च पूरा करने के लिए भी उधार लेने को मजबूर हैं।

मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए घरेलू बजट संभालना मुश्किल

उन्होंने कहा कि वेतन या तो ठहरा हुआ है या महंगाई को ध्यान में रखने पर लोगों की वास्तविक क्रय शक्ति कम हुई है। रमेश ने दावा किया कि एक ओर अमीरों की संपत्ति और कॉरपोरेट मुनाफा बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए घरेलू बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विषम आर्थिक परिस्थितियों में परिवार अपनी बचत खर्च करके गुजर-बसर करने के लिए मजबूर हैं, लेकिन सरकार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों का हवाला देकर जमीनी वास्तविकता को नकार रही है।

जीडीपी के आंकड़े जमीनी स्थिति को नहीं छिपा सकते

कांग्रेस महासचिव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि बढ़ती आर्थिक असमानता देश की प्रमुख चिंताओं में से एक है। उन्होंने कहा, जीडीपी के आंकड़े कभी यह नहीं बताते कि विकास का लाभ किसे मिल रहा है और आम आदमी की जिंदगी कितनी बेहतर हो रही है। रमेश ने दावा किया कि जब आय और संपत्ति का बड़ा हिस्सा कुछ लोगों के पास सिमटता जाए तथा आम परिवार महंगाई, कर्ज और घटती बचत के दबाव में हों, तो जीडीपी के आंकड़े जमीनी स्थिति को नहीं छिपा सकते। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास का दावा तभी सार्थक है जब उसका लाभ आम आदमी तक पहुंचे। रमेश ने कहा, ‘‘हमारी स्पष्ट मांग है कि सरकार आर्थिक बदहाली की सच्चाई स्वीकार करे, रोजगार के अवसर बढ़ाए और महंगाई पर काबू पाने के लिए ठोस कदम उठाए।

लखनऊ में बेलगाम हुआ क्राइम!

सीपी तरुण गाबा के 91 दिन… 33 मर्डर से दहला नवाबों का शहर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। नवाबों का शहर लखनऊ इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन वजह सुकून देने वाली नहीं, बल्कि डराने वाली है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपराध पर लगाम लगाने के लिए बीते दिनों प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 2001 बैच के तेज-तर्रार आईपीएस तरुण गाबा को लखनऊ का नया पुलिस कमिश्नर बनाया था। 29 जुलाई को उन्होंने लखनऊ की कमान संभाली थी। लेकिन उनके इन 91 दिनों के कार्यकाल में लखनऊ में हत्याओं की जैसे बाढ़ सी आ गई है।
इन 91 दिनों में करीब 33 हत्याएं हो चुकी हैं, जिनमें कई मामले पुलिस की लापरवाही की ओर इशारा करते हैं। इस पूरे दौर की सबसे दर्दनाक घटना हाल ही में सआदतगंज इलाके में सामने आई। यहां कार पार्किंग को लेकर हुए मामूली विवाद में एक ही परिवार के तीन लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। स्थानीय लोगों ने सआदतगंज पुलिस पर सीधा आरोप लगाया कि अगर पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की होती, तो यह खौफनाक वारदात टल सकती थी। मामला तूल पकडऩे के बाद पुलिस प्रशासन की नींद खुली और सआदतगंज इंस्पेक्टर संतोष कुमार आर्य और कश्मीरी मोहल्ला चौकी इंचार्ज अजय कुमार चौरसिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

जुलाई और अगस्त के आंकड़े

सआदतगंज की यह घटना अकेली नहीं है। कमिश्नर तरुण गाबा के कार्यभार संभालने के बाद से ही वारदातों का सिलसिला शुरू हो गया था। 31 जुलाई को गोसाईगंज में आजाद रावत की हत्या से शुरुआत हुई। इसके बाद 3 अगस्त को बीकेटी में अनिल कुमार की हत्या हुई। 5 अगस्त को पारा में 21 साल की युवती की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। 6 अगस्त को आशियाना में ज्ञानेंद्र सिंह, 7 अगस्त को इंदिरानगर में पंकज और 8 अगस्त को हसनगंज में शिवानी की हत्या हुई। 9 अगस्त को कृष्णा नगर में सिगरेट न देने पर युवक की हत्या कर दी गई, तो 10 अगस्त को मडय़िांव के फैजुल्लागंज में शुभम सोनी की जान ले ली गई। इसके बाद 13 अगस्त को जानकीपुरम में आशीष सोनी और 14 अगस्त को रहीमाबाद में 75 वर्षीय बुजुर्ग छत्रपाल की हत्या कर दी गई। 19 अगस्त को माहीगवां में शराब के ठेके के बाहर मोनू उर्फ दिलीप सिंह की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। 20 अगस्त को गोमती नगर दो हत्याओं और एक सुसाइड से दहल उठा। 25 अगस्त को मडिय़ांव में एक बुजुर्ग की चाकू मारकर हत्या हुई। 30 अगस्त को सुशांत गोल्फ सिटी से लापता धीरेंद्र प्रताप सिंह और मानक नगर में पूजा परवीन की हत्या के साथ अगस्त का महीना खत्म हुआ।

सितंबर का महीना शुरू होते ही अपराध का ग्राफ और ऊंचा हो गया

1 सितंबर को माहीगवां के सतीश यादव की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। 2 सितंबर को जानकीपुरम के ढ्ढश्वञ्ज कैंपस के जंगल में एक युवती का शव बरामद हुआ। 6 सितंबर को महानगर थाना क्षेत्र में खाकी को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई, जहां एक हेड कांस्टेबल ने अपनी ही पत्नी की हत्या कर दी। 12 सितंबर को मडय़िांव थाने के सामने बुजुर्ग की चाकू से हत्या कर दी गई और एक अन्य को घायल कर दिया गया। 14 सितंबर को कृष्णा नगर में 32 वर्षीय रामबाबू मौर्य की हत्या हुई। 17 सितंबर को काकोरी में महिला की गला रेतकर हत्या और मोहनलालगंज में रामकिशोर की हत्या की गई। 18 सितंबर को बंथरा में 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला छिदाना गौतम की गला रेतकर हत्या कर दी गई। 29 सितंबर को केजीएमयू के असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट पवन कुमार की हत्या का मामला सामने आया।

अक्टूबर के महीने में भी हालात नहीं सुधरे

1 अक्टूबर को नाका में 42 वर्षीय गीता भागचंदानी की हत्या हुई। 3 अक्टूबर को अलीगंज में लूडो खेलने के विवाद में राहुल अवस्थी की जान चली गई। 9 अक्टूबर को कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत और कृष्णा नगर में एक दोस्त द्वारा दूसरे दोस्त की हत्या का मामला सामने आया। 11 अक्टूबर को कृष्णा नगर क्षेत्र में मां और बेटी की दोहरी हत्या ने सबको हिला कर रख दिया। और अंत में 26 अक्टूबर को सआदतगंज में ट्रिपल मर्डर की इस घटना ने 91 दिनों में कुल हत्याओं का आंकड़ा 33 तक पहुंचा दिया।91 दिनों में 33 हत्याएं इस बात का गंभीर संकेत हैं कि राजधानी में अपराधियों के मन से कानून का खौफ कम हो रहा है। कमिश्नर तरुण गाबा के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस बिगड़ते क्राइम ग्राफ को रोकने और जनता में सुरक्षा का भरोसा वापस कायम करने की है।

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