चैतर वसावा के समर्थन में उमड़ा जनसैलाब, जेल से मैदान तक गूंजी आदिवासी आवाज!

आदिवासी समाज के बुलंद नेता चैतर वसावा के समर्थन में आज जनसैलाब उमड़ पड़ा है... सत्ता के दमन और अन्याय के खिलाफ आदिवासियों ने अपनी...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा के लिए न्याय की मांग को लेकर शुरू की गई आदिवासी न्याय यात्रा का पांचवां दिन.. नानी फोकड़ी गांव में बहुत खास रहा.. यहां एक बड़ी सार्वजनिक बैठक का आयोजन किया गया.. इस बैठक में बड़ी संख्या में आदिवासी भाई-बहन, किसान, युवा और महिलाएं पहुंचे.. पूरा मैदान लोगों से भरा हुआ था.. ऐसा लग रहा था जैसे जेल में बंद चैतर वसावा की आवाज अब मैदान में गूंज रही हो.. आपको बता दें कि यह यात्रा 24 अक्टूबर से उमरगाम से शुरू हुई है.. यह गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों से होते हुए अंबाजी तक जाएगी.. यात्रा का मकसद चैतर वसावा को न्याय दिलाना और आदिवासी समाज के हक-अधिकारों की रक्षा करना है.. चैतर वसावा आदिवासी समाज के बेटे हैं.. और उन्होंने हमेशा जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए आवाज उठाई.. सरकार ने उन्हें झूठे केस में फंसाकर जेल भेज दिया.. लेकिन जनता अब सड़क पर उतर आई है..

नानी फोकड़ी की इस बैठक में चैतर वसावा की पत्नी शकुंतलाबेन वसावा मौजूद थीं.. उनके साथ प्रदेश किसान मोर्चा के अध्यक्ष प्रवीण राम, राजूभाई वलवई और कई स्थानीय नेता भी थे.. मंच पर बैठे सभी लोग एक ही बात कह रहे थे.. चैतर वसावा अकेले नहीं हैं.. पूरा आदिवासी समाज उनके साथ खड़ा है.. बैठक की शुरुआत में चैतर वसावा जिंदाबाद,  आदिवासी न्याय यात्रा जिंदाबाद और सत्ता के खिलाफ न्याय की लड़ाई जारी रहेगी जैसे नारों से पूरा मैदान में गूंज उठा.. छोटे-छोटे बच्चे भी नारे लगा रहे थे.. बुजुर्ग लोग हाथ उठाकर समर्थन दे रहे थे.. महिलाओं की संख्या भी काफी अच्छी थी.. सबके चेहरे पर एक ही भाव था.. हम न्याय मांगने आए हैं..

आपको बता दें कि शकुंतलाबेन वसावा ने मंच से लोगों को संबोधित किया.. उन्होंने बहुत सरल शब्दों में कहा कि उनके पति चैतर वसावा हमेशा आम लोगों के लिए लड़ते रहे.. उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर समाज सेवा का रास्ता चुना.. आदिवासी क्षेत्रों में पानी, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा की समस्याओं को लेकर वे हमेशा आवाज उठाते रहे.. लेकिन सरकार को उनकी यह आवाज पसंद नहीं आई.. इसलिए उन्हें झूठे मामले में फंसा दिया गया.. शकुंतलाबेन ने कहा कि जेल में बैठे हुए भी चैतर वसावा की सोच आदिवासी समाज के साथ है.. वे न्याय की राह पर हैं और एक दिन जरूर लौटेंगे..

 

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