आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, पैरोल बढ़ाने से इनकार, अब जाना होगा जेल

आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है... शीर्ष अदालत ने उनकी परोल बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है... वहीं इस फैसले के बाद आसाराम...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः आसाराम बापू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है.. उनकी बीस दिन की पैरोल आज मंगलवार को समाप्त हो रही है.. और उन्होंने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पैरोल बढ़ाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी.. अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया.. और साफ निर्देश दिया कि उन्हें जोधपुर जेल में सरेंडर करना होगा.. इससे पहले आसाराम ने बीमार पत्नी से मिलने के लिए भी याचिका लगाई थी.. जिसे कोर्ट ने पहले ही खारिज कर दिया था.. जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने उनके वकील को जमानत संबंधी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी.. अदालत ने स्पष्ट किया कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने पहले ही छब्बीस अक्टूबर तक पैरोल दी हुई है.. और अब उसे बढ़ाना संभव नहीं है..

जानकारी के मुताबिक आसाराम को जोधपुर और गांधीनगर में दर्ज दो अलग-अलग दुष्कर्म के मामलों में दोषी ठहराया गया है.. दोनों मामलों में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है.. सुप्रीम कोर्ट इन दोनों मामलों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था.. एक याचिका गुजरात के मामले में अंतरिम जमानत की थी.. जबकि दूसरी राजस्थान उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ अपील थी.. जिसमें दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा गया था.. पीठ ने कहा कि आसाराम के जेल में आत्मसमर्पण करने के बाद ही अदालत कानून के एक महत्वपूर्ण प्रश्न पर विस्तार से सुनवाई करेगी.. इस पूरे प्रकरण में अदालत ने समय-सीमा का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया..

वकील दवे ने दलील दी कि आसाराम को अन्य धाराओं में दोषी ठहराया जा सकता है.. लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा तीन सौ छिहत्तर के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता.. क्योंकि यह आरोप उनके अनुसार बनता ही नहीं है.. पीठ ने अपने आदेश में लिखा कि पक्षकारों के वकीलों ने बताया है कि.. दोषी याचिकाकर्ता वर्तमान में पैरोल पर है.. और उसे बीस दिन की पैरोल दी गई थी.. पैरोल की अवधि समाप्त होने और आत्मसमर्पण करने के बाद ही अपील पर आगे की सुनवाई की जाएगी.. मामले को सत्रह नवंबर को फिर से सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया.. अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया कि कानूनी प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए..

शुरुआत में दवे ने कहा कि राजस्थान के मामले में शीर्ष अदालत की एक अन्य पीठ ने पहले नोटिस जारी किए थे.. और इस पीठ के समक्ष अपील पहली बार सूचीबद्ध हुई है.. राजस्थान और गुजरात दोनों राज्यों की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा.. और उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता को दोनों राज्यों में दोषी ठहराया जा चुका है.. आसाराम ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय में पैरोल की याचिका दायर की थी.. जिसे खारिज कर दिया गया था.. इसके बाद उन्होंने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था.. फिर उन्होंने राजस्थान उच्च न्यायालय में एक और याचिका लगाई जिस पर बीस दिन की पैरोल मंजूर हुई थी..

वहीं यह पूरा मामला नाबालिग से दुष्कर्म से जुड़ा है.. जिसमें आसाराम को दोषी करार दिया गया है.. अदालत ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि पैरोल एक अस्थायी राहत है.. और इसे अनिश्चितकाल तक नहीं बढ़ाया जा सकता.. स्वास्थ्य संबंधी दलीलों को भी पर्याप्त नहीं माना गया.. पीठ ने कहा कि जब पैरोल की अवधि खत्म हो चुकी है.. तो आसाराम को निर्धारित समय पर जेल वापस लौटना ही होगा.. सत्रह नवंबर की तारीख तय करके अदालत ने आगे की सुनवाई के लिए रास्ता साफ किया.. दोनों राज्यों के अभियोजन पक्ष ने आसाराम की अपीलों का विरोध किया..

आपको बता दें कि आसाराम की उम्र पचासी वर्ष बताई जा रही है.. उनके वकील ने स्वास्थ्य और परिवार की स्थिति का हवाला देते हुए राहत मांगी थी.. अदालत ने इन दलीलों को गंभीरता से सुना लेकिन अंत में पैरोल बढ़ाने से इनकार कर दिया.. जोधपुर जेल में सरेंडर करने का आदेश देते हुए पीठ ने कानूनी प्रक्रिया की प्राथमिकता को स्पष्ट किया.. पहले बीमार पत्नी से मिलने की याचिका भी खारिज हो चुकी थी.. इस तरह आसाराम को लगातार दो बार सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है.. उनका कानूनी संघर्ष अब जेल में आत्मसमर्पण के बाद ही आगे बढ़ेगा..

 

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