योगी जी…केडीए की झोली में करोड़ों-अरबों का राजस्व कहां से आए…
जब निजी राजस्व वसूल रहे हैं अतुल राय...

प्रांजुल मिश्रा/4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
कानपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब मंच पर खड़े होकर दहाड़ते हैं तो उनके मुख से एक शब्द अक्सर सुनाई देता है भ्रष्टाचारी बचेगा नहीं हमारी जीरो टॉलरेंस नीति की सरकार है मतलब भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा लेकिन जीरो टॉलरेंस का अब जिम्मेदार अधिकारियों ने मजाक बना कर रख दिया है कथनी व करनी में अंतर सा दिखाई देता है असर सरकार की इमेज दागदार करने में जुटे हैं। भू-माफिया सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाले और सरकारी माल चट करने वाले भ्रष्टाचारी और माफिया सीएम योगी आदित्यनाथ के हाशिए पर हमेशा रहते हैं लेकिन अधिकारी किस तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गुमराह करके अपनी जेब भरने में जुटे हैं।
इसका अंदाजा केवल इस बात से लगाया जा सकता है जब कानपुर विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष की कुर्सी मदन सिंह गर्ब्याल ने संभाली थी तो उनका उद्देश्य साफ था भ्रष्टाचार कतई बर्दाश्त नहीं होगा और प्राधिकरण के राजस्व को बढ़ाना उनकी प्राथमिकता थी… पूर्व उपाध्यक्ष मदन सिंह ने एसडीएम रैंक के विशेषकार्यधिकरियों की कमीं के कारण के साथ-साथ हौंसला बढ़ाने के लिए…युवा लॉबी के हाथों में कमान देते हुए सहायक अभियंताओं को प्रवर्तन प्रभारी बनाकर उनका न केवल कद बढ़ाया बल्कि काम करने का तरीका भी सिखाया लेकिन शर्त साफ थी कंपाउंडिंग रूपी राजस्व से कोई समझौता नहीं होगा और हर 15-20 दिन में प्राधिकरण के राजस्व यानी कंपाउंडिंग को लेकर मीटिंग भी रखते थे.. उस वक्त उनके सामने नंबर बढ़ाने के लिए मजबूरी में सहायक और अवर अभियंता राजस्व यानी कंपाउंडिंग पर जोर देते हुए प्राधिकरण की झोली भरने में लगे थे। लेकिन मुखिया बदलने के बाद वही जिम्मेदार अब आपदा को अवसर बनाकर प्राधिकरण के राजस्व को दरकिनार करते हुए अपने लिए निजी राजस्व वसूलने में लग गए हैं।
प्रवर्तन जोन 1 में हो चुके कई हादसे
जोन 1 बिरहाना रोड जनरलगंज, नौघड़ा, आर्य नगर स्वरूप नगर, rk नगर और जाजमऊ में धड़ल्ले से अवैध निर्माण जारी है एक्स्ट्रा पर एक्स्ट्रा स्लैब पड़ रही है हाल ही में जाजमऊ में छज्जा गिरने से एक बच्चा समेत 7 लोग घायल हो गए थे जिसमें 50 वर्षीय सावित्री नाम की एक महिला की मौत भी हो गई थी उसके बाद भी कानपुर विकास प्राधिकरण के जिम्मेदार अधिकारियों के आशीर्वाद से मौत की इमारतें सकरी गलियों डंके की चोट पर बना रही है जबकि रक्षाबंधन वाले दिन चमनगंज में एक बिल्डिंग धंस भी गई थी दिल्ली वाली घटना के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण द्वारा मजबूरी में उसको डिमोलिश कर दिया था हालांकि जोन 1 में हाल ही में ट्रांसफर होकर आए अवर अभियंता रमाकांत और अवर अभियंता अटल चतुर्वेदी मात्र एक कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं जानकारों की माने तो पूरा जोन प्रभारी अतुल राय के अनुसार चल रहा है 80 प्रतिशत ऐसे निर्माण हैं जो अवर अभियंता रमाकांत और अटल चतुर्वेदी के ट्रांसफर होने के पहले से प्रवर्तन प्रभारी अतुल राय के आशीर्वाद से जारी हैं। अगर उन सभी के खिलाफ तगड़ा एक्शन लेते हुए उन्हें सील करके शमन कराया जाए तो दिवाली के पहले प्राधिकरण की झोली में करोड़ों रुपए का राजस्व आ सकता है…..देश में 4 पीएम संस्थान की निष्पक्ष पत्रकारिता एक मिसाल बन चुकी है हो सकता है 4 पीएम संवाददाता की निष्पक्ष पत्रकारिता के कारण बौखलाये बिल्डर और जिम्मेदार अधिकारी योजनाबद् तरीके आजकल ट्रेंड में चल रहे झूठे मुकदमों में पत्रकारों को फसाना, आरोपों में घिरवाना, धमकाना या हमले करवाना जैसे तमाम कृत्य करवा सकते हैं यदि 4पीएम के संवाददाता के साथ किसी भी तरीके के षड्यंत्रपूर्वक फंसाने का अगर प्रयास हुआ तो इसके जिम्मेदार प्रवर्तन प्रभारी अतुल राय और जिनकी खबर 4 पीएम अखबार में छप चुकी है वह सभी बिल्डर होंगे….।
जोन 1 सबसे बड़ा है जहां करीब 300 से अधिक हैं अवैध निर्माण
दरअसल कानपुर विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन जोन 1 की अगर बात करें तो यह जोन सबसे बड़ा है करीब 300 से अधिक अवैध निर्माण हैं करीब 150+ ऐसे निर्माण हैं जिसमें एक्स्ट्रा पर एक्स्ट्रा स्लैब पड़ी है इस तरह से अगर आंकड़ा निकाला जाए तो स्न्रक्र परचेज और कंपाउंडिंग निकाली जाए तो एक सामान्य कैलकुलेशन के अनुसार देखा जाए तो 70-80 करोड़ से लेकर करीब 1 अरब से भी ज्यादा तक का प्राधिकरण के राजस्व को लाभ मिल सकता है बशर्ते कंपाउंडिंग में आने वाली पूरी रकम को निर्माण करता या भवन स्वामी जमा करें तो.. शहर के सुनियोजित विकास के लिए यह बड़ी धनराशि काम आ सकती है कई ऐसे भी निर्माण है जिनमें अकेले एक-एक निर्माण से अगर सही ढंग से कंपाउंड रेशियो निकाला जाए तो करोड़ों रुपए केवल एक निर्माण से निकल आता है पूरी धनराशि अगर निर्माणकर्ता जमा करें तो प्राधिकरण की झोली भर सकती है। लेकिन प्राधिकरण के राजस्व हित की किसी को परवाह ही कहा है यहां तो जिम्मेदार केवल अपनी झोलियां भरने में जुटे हैं निर्माणकर्ता पूरी कंपाउंडिंग की रकम को जमा ही कहां करता है कुछ रकम फाइल को रन कराने के नाम पर जमा कर देता है जिससे उसके कार्य में विघटन उत्पन्न ना हो उसके बाद निर्माण अध्याशित होने के बाद बिल्डिंग की बची धनराशि राजस्व के खाते में जमा ही नहीं होती है और इसमें उसे जोन के जिम्मेदार अधिकारी भी पूरा सहयोग करते हैं। नाम न छापने की शर्त पर प्राधिकरण के एक जिम्मेदार कर्मचारी ने बताया ज्यादातर बिल्डर और बड़े आर्किटेक्ट जोनल प्रभारी अतुल राय के संपर्क में डायरेक्ट हैं सुपरवाइजर और अभियंताओं से उनकी मुलाकात ही नहीं हो पाती है और हमारे संवाददाता के सामने एक ऐसा निर्माणकर्ता भी आया जिसने बताया कि एक चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी उन्हें फोन करके बोल रहा था की राय साहब के केबिन के बाहर आपका इंतजार कर रहा हूं साहब बैठे आकर मिल लीजिए उसने हमारे संवाददाता को बताया मैं एक-एक इंच मानकों और नक्शे के अनुरूप बना रहा हूं मैं किसी से नहीं मिलूंगा न ही किसी को एक फूटी कौड़ी दूंगा।



