ऋषभ के वायरल वीडियो में ऐसा क्या था? लखनऊ पुलिस पर उठे 5 सवाल
राजधानी लखनऊ के सहादतगंज स्थित ब्राह्मण टोला में चबूतरे और पार्किंग के मामूली विवाद को लेकर हुए सनसनीखेज ट्रिपल मर्डर केस में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: राजधानी लखनऊ के सहादतगंज स्थित ब्राह्मण टोला में चबूतरे और पार्किंग के मामूली विवाद को लेकर हुए सनसनीखेज ट्रिपल मर्डर केस में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है।
मुख्य आरोपी ऋषभ शुक्ला समेत पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब प्रशासन ने पीड़ित परिवार की मांग पर एक और बड़ा कदम उठाया है। आरोपी के कथित अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई के बाद अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की टीम ETS मशीन लेकर मौके पर पहुंची है। टीम की ओर से नजूल भूमि का फॉरेंसिक और प्रशासनिक सर्वे किया जा रहा है।
इस कार्रवाई को ट्रिपल मर्डर केस से जुड़े जमीन और निर्माण विवाद की जांच के लिहाज से अहम माना जा रहा है। प्रशासनिक टीम मौके पर जमीन की वास्तविक स्थिति, निर्माण की सीमा और संबंधित भूमि के रिकॉर्ड का मिलान करने में जुटी है।खुद प्रमुख सचिव (आवास) और यूपी के DGP राजीव कृष्ण ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है. वहीं, फरार चल रहे आरोपी की बहन और चाचा पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया गया है.
घटना के चार दिन बाद सामने आए दो वायरल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के दावों ने लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सवाल 1: जब पहले से शिकायत थी तो पुलिस क्यों सोती रही?
चबूतरे और पार्किंग का यह विवाद कई दिनों से चल रहा था. पीड़ित पक्ष लगातार सहादतगंज थाने और स्थानीय चौकी के चक्कर काट रहा था, लेकिन पुलिस ने मामले को अनदेखा किया. अगर समय पर निरोधात्मक कार्रवाई होती, तो यह घटना टल सकती थी.
सवाल 2: क्या मौके पर पहुंचने में हुई आपराधिक देरी?
सामने आए पहले वीडियो में मुख्य आरोपी ऋषभ शुक्ला “मुझे मार रहे हैं” चिल्लाते हुए ताबड़तोड़ गोलियां चलाता दिख रहा है. दूसरे वीडियो में एक सब-इंस्पेक्टर आरोपी को पकड़ता दिख रहा है. सवाल यह है कि जब मारपीट और फायरिंग काफी देर तक चलती रही, तो क्या पुलिस बल समय पर नहीं पहुंचा?
सवाल 3: सिर्फ सस्पेंशन ही काफी क्यों?
मामला तूल पकड़ने पर चौकी इंचार्ज और थाना प्रभारी (इंस्पेक्टर) को निलंबित कर दिया गया है. लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या विभागीय निलंबन उन तीन बेगुनाहों की जान वापस ला सकता है? क्या दोषी पुलिसकर्मियों पर आपराधिक लापरवाही का केस दर्ज होगा?
सवाल 4: पुलिस हिरासत से आरोपी कैसे चिल्लाता रहा?
वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी की मौजूदगी के बावजूद आरोपियों का दुस्साहस साफ दिख रहा है. यह राजधानी के बीचों-बीच कानून-व्यवस्था (Law & Order) के खौफ पर बड़ा प्रश्नचिह्न है.
सवाल 5: जनआक्रोश के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?
घटना के बाद जब पीड़ित परिवार ने सड़क पर उतरकर धरना-प्रदर्शन और सरकार विरोधी नारेबाजी की, तब जाकर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक मौके पर पहुंचे. क्या बिना प्रदर्शन के पीड़ित परिवार की सुनवाई संभव नहीं थी?
बुलडोजर के बाद ETS मशीन से सर्वे; LDA और DGP मौके पर
घटना का संज्ञान शासन स्तर पर लिए जाने के बाद प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. आरोपी के घर पर बुलडोजर की आंशिक कार्रवाई के बाद शुक्रवार को एलडीए (LDA) प्रशासन की टीम अत्याधुनिक ETS मशीन लेकर मौके पर पहुंची. आरोपी द्वारा नजूल (सरकारी) भूमि पर किए गए अवैध कब्जे और निर्माण की सटीक मैपिंग की जा रही है ताकि पूरी तरह बुलडोजर एक्शन लिया जा सके.
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यूपी के डीजीपी राजीव कृष्ण और प्रमुख सचिव (आवास) खुद ब्राह्मण टोला पहुंचे. उन्होंने रोते-बिलखते पीड़ित परिवार को न्याय का आश्वासन दिया और कहा कि आरोपियों को अदालत से कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी.
5 आरोपी गिरफ्तार, 2 पर 25-25 हजार का इनाम घोषित
पुलिस ने मुख्य आरोपी ऋषभ शुक्ला समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. घटना के बाद से ही फरार चल रही आरोपी ऋषभ शुक्ला की बहन और उसके चाचा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 25-25 हजार का इनाम घोषित कर दिया है. पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं. पीड़ित परिवार अपनी मांग पर अड़ा है कि हत्यारों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए फांसी की सजा दी जाए और उनके पूरे अवैध साम्राज्य पर बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया जाए.



