आदिवासी न्याय यात्रा का भावुक समापन, चैतर वसावा के समर्थन में अंबाजी में प्रार्थना
आदिवासी न्याय यात्रा के अंतिम दिन चैतर वसावा के समर्थन में उमरगाम से अंबाजी तक यात्रा निकाली गई... अंबाजी में चैतर वसावा...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः आदिवासी न्याय यात्रा के अंतिम दिन आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा के समर्थन में उमरगाम से अंबाजी तक निकाली गई यह यात्रा भावुक माहौल में समाप्त हुई.. गुजरात के पूर्वी आदिवासी क्षेत्रों से गुजरती यह यात्रा कई दिनों तक चली.. और हर जगह आदिवासी समाज का अपार समर्थन मिला.. जेल में बंद चैतर वसावा के हक और न्याय की मांग को लेकर निकली इस यात्रा ने पूरे आदिवासी पट्टे को एकजुट कर दिया.. आपको बता दें कि यात्रा का अंतिम पड़ाव अंबाजी में पहुंचकर धार्मिक और भावनात्मक रूप धारण कर लिया.. मां अंबा के पावन मंदिर के परिसर में जमा हजारों लोगों ने न्याय की पुकार लगाई.. वहीं यह सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि आदिवासी अस्मिता.. और अधिकारों की आवाज बन गया था..
जानकारी के मुताबिक अंबाजी के पवित्र स्थल पर चैतर वसावा की पत्नी वर्षाबेन वसावा.. और शकुंतलाबेन वसावा ने मां जगदंबा के चरणों में प्रार्थना की.. दोनों ने भावुक होकर मां अंबा से चैतर वसावा को शीघ्र न्याय दिलाने की मन्नत मांगी.. वहीं मंदिर के प्रांगण में दीप जलते रहे और भक्ति का माहौल छाया रहा.. जानकारी के लिए आपको बता दें कि आदिवासी समाज में मां अंबा का विशेष स्थान है.. और इस प्रार्थना ने पूरे आयोजन को और अधिक पवित्र बना दिया.. आसपास खड़े कार्यकर्ता और आम लोग भी आंखों में आंसू लिए इस दृश्य को देख रहे थे.. पत्नियों की यह विनती सिर्फ परिवार की नहीं बल्कि पूरे समुदाय की आशा का प्रतीक बन गई.. मां की दिव्य उपस्थिति में हुई इस अनुष्ठान ने सबके मन को छू लिया..
वहीं इस प्रार्थना और अनुष्ठान के दौरान आम आदमी पार्टी के नेता, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद थे.. प्रदेश के कई नेताओं ने भी मां अंबा के दर्शन किए और चैतर वसावा के शीघ्र रिहाई की कामना की.. यात्रा के दौरान जगह-जगह हुई जनसभाओं में आदिवासी समाज ने अपनी एकजुटता दिखाई थी.. उमरगाम से शुरू हुई यह यात्रा वलसाड, नवसारी, डांग, तापी, भरूच और अन्य जिलों से होती हुई अंबाजी पहुंची.. हर पड़ाव पर पारंपरिक नृत्य, ढोल और नारों से स्वागत किया गया.. लोग कह रहे थे कि चैतर वसावा आदिवासी हक के लिए लड़ते हैं.. इसलिए उन पर अन्याय सहन नहीं किया जाएगा..
चैतर वसावा को आदिवासी समाज का मजबूत आवाज माना जाता है.. वे जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की बात करते रहे हैं.. पांचवीं अनुसूची, वन अधिकार, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर उन्होंने विधानसभा में आवाज उठाई.. समर्थकों का कहना है कि इन्हीं आवाजों के कारण उन पर मुकदमे दर्ज किए गए और उन्हें जेल भेज दिया गया.. यात्रा इसी अन्याय के खिलाफ निकाली गई थी.. पत्नियों ने खुद आगे आकर जिम्मेदारी संभाली और गांव-गांव लोगों से जुड़ीं.. उनकी उपस्थिति ने यात्रा को और अधिक भावुक और प्रभावी बना दिया.. जिसको लेकर लोग कह रहे थे कि झांसी की रानी की तरह ये दोनों महिलाएं लड़ रही हैं..



