पीएम के लिए मुसीबत बनी एक फाइल, मधु किश्वर का बड़ा खुलासा
जब पूरा देश 'गुजरात मॉडल' की चर्चा कर रहा था, तब मधु किश्वर वो पहली बड़ी बुद्धिजीवी थीं जिन्होंने अकादमिक दुनिया में मोदी की साख बनाई।

4pm न्यूज नेटवर्क: कल तक जो महिला ‘मोदीनामा’ लिखकर पीएम मोदी को विकास पुरुष और मसीहा बता रही थी, आज उसी मधु किश्वर ने एक ऐसा मोर्चा खोल दिया है जिसने दिल्ली के सत्ता गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। मधु किश्वर—वो नाम जिसने सालों तक मीडिया और बुद्धिजीवियों के सामने नरेंद्र मोदी का ढाल बनकर बचाव किया, आज वो खुद उनकी सबसे बड़ी हमलावर बन गई हैं।
लेकिन इस बार हमला सिर्फ ज़ुबानी नहीं है। ज़िक्र हो रहा है एक ऐसी ‘फाइल’ का, एक ऐसी सीक्रेट जानकारी का, जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि उसे देखकर कभी पीएम साहब के चेहरे की हवाइयां उड़ गई थीं। क्या है उस फाइल में? और आखिर क्यों ‘मोदीनामा’ लिखने वाली एक वफादार समर्थक अचानक इतनी बागी हो गई? क्या यह सिर्फ एक निजी नाराज़गी है, या फिर मोदी सरकार के उस अदृश्य चेहरे का पर्दाफाश है जिसे दुनिया ने अब तक नहीं देखा?
कहानी शुरू होती है 2014 से पहले। जब पूरा देश ‘गुजरात मॉडल’ की चर्चा कर रहा था, तब मधु किश्वर वो पहली बड़ी बुद्धिजीवी थीं जिन्होंने अकादमिक दुनिया में मोदी की साख बनाई। उन्होंने अपनी पत्रिका ‘मानुषी’ के ज़रिए मोदी की छवि को चमकाया और बताया कि कैसे उनके खिलाफ एक प्रोपेगेंडा रचा गया था। लेकिन 2026 आते-आते यह वफादारी नफरत और बगावत में तब्दील हो चुकी है। मधु किश्वर अब मोदी के लिए ‘प्रेडेटर’ जैसे कड़े शब्दों का इस्तेमाल कर रही हैं।
सवाल उठता है—क्यों? क्या सत्ता से मोहभंग हो गया? या फिर जैसा कि वे खुद दावा कर रही हैं, उन्होंने 2014 के बाद से ही एक दूरी बना ली थी क्योंकि उन्हें कुछ ऐसी चीज़ों का एहसास हुआ जो उनके ज़मीर को मंज़ूर नहीं थीं। किश्वर का आरोप है कि मोदी सरकार में मंत्रियों के पद और टिकटों का बंटवारा मेरिट पर नहीं, बल्कि कुछ ‘खास समझौतों’ के आधार पर होता है। यह आरोप इतना संगीन है कि इसने पूरी भाजपा की नैतिकता पर सवालिया निशान लगा दिया है।
पिछले दिनों मधु पूर्णिमा किश्वर ने पीएम मोदी पर महिलाओं को लेकर बहुत ही गंभीर आरोप अपने एक ट्वीट में लगाए थे। यह ट्वीट तेज़ी से वायरल हुआ और इसे लेकर सोशल मीडिया पर काफी बहस भी हुई। कई लोगों ने मधु किश्वर के बयान को सुब्रह्मण्यम स्वामी के पुराने बयानों से जोड़कर भी देखा। लेकिन यह भी सच है कि ‘मोदीनामा’ लिखने वाली मधु किश्वर ने आरोप तो लगाए, पर वे अब तक पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाई हैं। हाँ, इतना ज़रूर है कि इसके बाद बीजेपी आईटी सेल और भाजपा नेताओं ने मधु किश्वर पर ज़बरदस्त हमला बोल दिया था। लेकिन अब उन्हीं मधु किश्वर ने फिर से एक और बड़ा और गंभीर आरोप लगाया है। इस बार मामला एक अफ़सर और एक फाइल से जुड़ा है।
पिछले बार की तरह इस बार भी मधु किश्वर ने एक लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखकर सबको चौंका दिया है। उनका दावा है कि यह जानकारी उन्हें एक ऐसे व्यक्ति से मिली है जिसके पास प्रधानमंत्री के बारे में अंदरूनी सूचनाओं का अच्छा-खासा भंडार है। मधु किश्वर का कहना है कि इसके मूल तथ्यों की पुष्टि कोई भी व्यक्ति साधारण ‘गूगल सर्च’ के ज़रिए कर सकता है। उनके मुताबिक, जिस दिन नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की ज़िम्मेदारी संभाली, उसी दिन मनमोहन सिंह के कार्यकाल (2011) से कैबिनेट सचिव रहे अजीत कुमार सेठ उनसे मिलने पहुँचे। उनके पास एक मोटी फाइल थी और उन्होंने कहा कि— “डॉक्टर साहब (मनमोहन सिंह) ने सुझाव दिया है कि आप इस फाइल को ध्यान से देखें।”
मधु किश्वर आगे लिखती हैं कि मोदी जी ने जैसे ही फाइल के पन्ने पलटने शुरू किए, उनका चेहरा फीका पड़ गया; क्योंकि उस फाइल में उनके खिलाफ कई आपत्तिजनक जानकारियां थीं। घबराए हुए मोदी ने सेठ से पूछा— “यह आपके पास कैसे पहुँची?” सेठ ने शांत स्वर में जवाब दिया कि कैबिनेट सचिव होने के नाते पीएमओ की सभी महत्वपूर्ण फाइलें उनके पास आती हैं। दावा है कि मोदी जी ने चुपचाप फाइल लौटा दी और ‘संकेत’ समझ गए। इसके बाद अजीत कुमार सेठ को न सिर्फ कार्यकाल विस्तार (Extension) दिया गया, बल्कि उन्हें मोदी जी का ही कैबिनेट सचिव नियुक्त कर दिया गया। मधु के मुताबिक, इसका मतलब यह हुआ कि मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी की पहुँच प्रधानमंत्री कार्यालय की गतिविधियों और निर्णयों तक बनी रही।
मधु किश्वर का कहना है कि अजीत कुमार सेठ को 2014 में विस्तार दिया गया और वे जून 2015 तक इस पद पर रहे। वे सवाल उठाती हैं— “क्या आपने दुनिया में कहीं सुना है कि कोई प्रधानमंत्री अपने कट्टर विरोधी के सबसे भरोसेमंद वरिष्ठ अधिकारी को अपने ही पीएमओ का प्रमुख नियुक्त करे?” रिटायरमेंट के बाद भी सेठ को सार्वजनिक उपक्रम चयन बोर्ड (PESB) का अध्यक्ष बना दिया गया। मधु किश्वर अपने ट्वीट में लिखती हैं कि संभवतः यही वजह है कि तमाम तीखी बयानबाज़ी के बावजूद, “56 इंच की छाती” वाले नेता ने सोनिया गांधी, रॉबर्ट वाड्रा और चिदंबरम जैसे लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं दिखाई। वे आरोप लगाती हैं कि सिर्फ सोनिया गांधी ही नहीं, बल्कि देश-विदेश में कई अन्य लोग भी हैं जिनके पास कथित तौर पर “काले कारनामों” की जानकारी है।
सियासी हलकों में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या यह वही फाइल है जिसका ज़िक्र सालों से दबी ज़ुबान में होता रहा है? क्या इसी वजह से भाजपा के अंदर कुछ खास चेहरों को इतनी अहमियत दी जाती है, जिनकी काबिलियत पर अक्सर सवाल उठते हैं? मधु किश्वर का कहना है कि मोदी का ‘पर्सनालिटी डिसऑर्डर’ उन्हें ब्लैकमेल के प्रति संवेदनशील बनाता है, यानी वे दबाव में फैसले लेने पर मजबूर हो जाते हैं। यह इल्जाम सीधे तौर पर भारत की सुरक्षा और शासन व्यवस्था से जुड़ा है। अगर देश का प्रधानमंत्री किसी गुप्त फाइल की वजह से दबाव में है, तो यह राष्ट्र के लिए चिंता का विषय है। पीएमओ और बीजेपी को चाहिए कि इस पूरे मामले की जांच कराएं, क्योंकि अगर आरोप सही हैं, तो देश की सुरक्षा खतरे में है। लेकिन अब तक मधु किश्वर से न तो कोई पूछताछ हुई है और न ही कोई कानूनी कार्रवाई; हाँ, बीजेपी का आईटी सेल उनके पीछे ज़रूर पड़ा है।
कांग्रेस पहले से ही पीएम पर ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ होने का आरोप लगाती रही है और अब उनकी अपनी चहेती रही मधु किश्वर के नए खुलासों ने हड़कंप मचा दिया है। सवाल बड़ा है—क्यों बीजेपी मधु किश्वर पर मानहानि का केस नहीं करती? क्यों मुख्यधारा का मीडिया इन सनसनीखेज आरोपों पर डिबेट नहीं करता? यह खामोशी खुद-ब-खुद बहुत कुछ बयां करती है। क्या मधु किश्वर के पास वाकई वो ‘ब्रह्मास्त्र’ है जिससे सत्ता के गलियारे डरते हैं? या फिर रणनीति यह है कि उन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया जाए ताकि मुद्दा और न भड़के? लेकिन सोशल मीडिया के दौर में सच को दबाना अब मुमकिन नहीं रहा।
मधु किश्वर के आरोपों में सबसे तीखा वार प्रधानमंत्री की कार्यशैली और चरित्र पर है। एक महिला एक्टिविस्ट होने के नाते उन्होंने राजनीति में महिलाओं के साथ होने वाले व्यवहार पर उंगली उठाई है। उन्होंने दावा किया कि सत्ता के ऊंचे पदों तक पहुँचने के लिए महिलाओं को गरिमा के खिलाफ रास्तों से गुज़रना पड़ता है। यह उस सरकार के लिए बड़ी शर्मिंदगी की बात है जो ‘नारी शक्ति’ और ‘बेटी बचाओ’ का नारा बुलंद करती है। अगर उनकी अपनी ही पुरानी समर्थक यह कह रही है कि सत्ता के गलियारों में महिलाओं का शोषण होता है, तो यह सरकार की नैतिक सत्ता पर सबसे बड़ा प्रहार है।



