एक सड़क हादसा या सियासी साजिश

  • भाजपा सरकार की मंशा पर सवाल
  • एमएलए रोड एक्सीडेंट टिकट बचाने या फिर जान से मारने की योजना
  • बृजभूषण राजपूत रोड एक्सीडेंट मामलो में सच्चाई क्यों नहीं आ रही सामने?

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। क्या यह सिर्फ एक सड़क हादसा था या फिर इसके पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी है? क्या एक बीजेपी विधायक पर हमला हुआ या फिर राजनीति में एक नई कहानी गढ़ी जा रही है? बुंदेलखंड की राजनीति बीजेपी विधायक बृजभूषण राजपूत के रोड एक्सीडेंट की खबर के बाद से धधक गयी है। झांसी से चरखारी लौट रहे बीजेपी विधायक बृजभूषण राजपूत की गाड़ी हादसे का शिकार होती है। विधायक सुरक्षित बच जाते हैं। लेकिन हादसे के कुछ घंटों बाद जो बयान आता है वह पूरे मामले को साधारण एक्सीडेंट से उठाकर सियासी बहस के केंद्र में ला देता है।

वाहन के पोजीशन बदलने पर चर्चा

लेकिन कहानी का दूसरा पक्ष भी है। कुछ स्थानीय राजनीतिक सूत्र अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। उनका कहना है कि विधायक के काफिले में हमेशा कई गाडिय़ां चलती हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस वाहन का हादसा हुआ उसकी पोजीशन उसी दिन क्यों बदली गई? क्या यह महज संयोग था या इसके पीछे कोई और वजह थी? फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यही वजह है कि इस मामले में सवाल ज्यादा हैं और जवाब कम है।

टिकट बचाने की कवायद या फिर भ्रष्टाचार के खुलासे के बाद जान को खतरा

कुछ दिन पहले विधायक बृजभूषण राजपूत उस समय चर्चा का केन्द्र बिंदु बने थे जब उन्होंने महोबा में एक कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मिनिस्टर स्वतंत्र देव सिंह का हजारो लोगों के साथ घेराव कर दिया था। उन्होंने जलशक्ति मिशन में भ्रष्टाचार के आरोप लगाये थे। घेराव के बाद से ही वह और उनके पिता लगातार इस बात को कह रहे हैं कि भ्रष्टाचार के खुलासे के बाद विधायक ठेकेदारों के निशाने पर आ गये हैं और उनकी जान को खतरा है। विधायक कोई मामूली आरोप नहीं लगा रहे। विधायक बृजभूषण राजपूत ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को बाकायदा चिट्ठी लिखकर अपनी जान का खतरा बताया है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के बाद मिल रही थीं धमकियां

विधायक का दावा है कि जल शक्ति विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के बाद उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं और यह हादसा उसी सिलसिले की कड़ी हो सकता है। अगर यह दावा सही है तो सवाल सिर्फ एक विधायक की सुरक्षा का नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का है।

अंदरूनी राजनीति और खींचतान

विधायक के आरोपों के बाद बीजेपी असहज स्थिति में आ गयी थी। और चर्चा इस बात की भी जोरो पर है कि विधायक का टिकट कट सकता है। पिछले चुनाव में बुंदलेखंड रीजन से बीजेपी को प्रचंड जीत हासिल हुई थी। इस बार भी बीजेपी अपने उस जीत के मोमेंटम को जारी रखना चाहती है और ग्राउंड रिपोर्ट इस बात की तस्दीक कर रही है कि झांसी से कम से कम दो विधायकों के टिकट को बदला जाएगा। अंदरखाने के सूत्र तो यही कह रहे है कि रोड एक्सीडेंट दाल में काला है और इस एक्सीडेंट की विस्तृत जांच की जाए और जो भी तथ्य सामने आये उसे जनता के सामने रखा जाना चाहिए। क्योंकि दोनों ही बाते अपने आप में लोकतंत्र के लिए मुफीद नहीं है चाहे वह विधायक के भ्रष्टाचार के आरोप हो या फिर अंदरखाने की खबरों के मुताबिक टिकट को बचाने की जद्दोजहद ।

Related Articles

Back to top button