AAP ने गुजरात लॉबी को घेरा! ‘ट्रेड डील हटाओ, किसान बचाओ’ अभियान से सियासत तेज
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर आम आदमी पार्टी ने गुजरात में बड़ा अभियान छेड़ने का ऐलान किया है... ‘ट्रेड डील हटाओ, किसान बचाओ’...
4पीएम न्यूज नेटवर्कः इस समय देश में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सियासत जोरों पर हैं.. विपक्ष के द्वारा मोदी सरकार की जमकर आलोचना हो रही है.. विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मोदी ने देश को और यहां के किसानों को ट्रंप के हाथों बेंच दिया है.. वहीं खुद को घिरती देख गुजरात लॉबी साइलेंट मोड पर चली गई है.. और विपक्ष के किसी भी सवाल का सटीक जवाब नहीं मिल पा रहा है.. जिसको लेकर आम आदमी पार्टी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू करने का ऐलान किया है.. इस अभियान का नाम ‘ट्रेड डील हटाओ, किसान बचाओ’ है..
AAP का कहना है कि यह समझौता देश के किसानों, चरवाहों और छोटे कारोबारियों को बड़ा नुकसान पहुंचाएगा.. पार्टी गुजरात के दूर-दराज इलाकों में जाकर लोगों को जागरूक करेगी.. और सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है.. यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है.. जब भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं.. AAP का दावा है कि इस डील से गुजरात के किसानों को खास नुकसान होगा.. क्योंकि अमेरिकी सब्सिडी वाले कृषि उत्पाद भारत में सस्ते दाम पर आएंगे.. और स्थानीय किसानों की फसलें नहीं बिक पाएंगी.. गुजरात में AAP की यह रणनीति भाजपा की लॉबी को फंसाने की कोशिश लग रही है.. क्योंकि गुजरात BJP का गढ़ है.. और यहां किसान मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है..
आपको बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच फरवरी 2026 में एक अंतरिम व्यापार समझौता हुआ है.. यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुआ.. इस डील में दोनों देशों ने एक-दूसरे के उत्पादों पर टैरिफ (आयात शुल्क) कम करने पर सहमति जताई है.. अमेरिका ने भारत के कुछ कृषि उत्पादों पर शुल्क 50% से घटाकर 18% कर दिया है.. जबकि भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर शुल्क कम किया है.. समझौते में भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदने का वादा कर रहा है.. जिसमें कृषि उत्पाद भी शामिल हैं.. अमेरिका से आने वाले उत्पादों में मक्का, सोयाबीन ऑयल, डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स, रेड सोरघम, ट्री नट्स, फ्रूट्स, सोयाबीन ऑयल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं..
जानकारी के मुचाबिक भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क शून्य से 30% तक कम करने का फैसला किया है.. यह डील दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए है.. लेकिन किसानों पर इसका असर बहस का विषय बन गया है.. अमेरिका के किसान भारी सब्सिडी पाते हैं.. जबकि भारतीय किसान MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य).. और अन्य सहायता पर निर्भर हैं.. इस डील से भारतीय बाजार में सस्ते अमेरिकी उत्पाद आने से स्थानीय किसानों को नुकसान हो सकता है..
वहीं इस व्यापार डील से कुछ भारतीय किसानों को फायदा हो सकता है.. चाय, कॉफी, मसाले, फल और अन्य उत्पादों को अमेरिका में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा.. इससे भारतीय निर्यातक किसानों को नया बाजार मिलेगा.. 2024 में भारत का अमेरिका के साथ कृषि व्यापार अधिशेष 1.3 बिलियन डॉलर था, जो बढ़ सकता है.. लेकिन ज्यादातर किसानों के लिए यह नुकसानदायक है.. अमेरिकी किसान हर साल मिलियन डॉलर की सब्सिडी पाते हैं.. जिससे उनके उत्पाद सस्ते होते हैं.. भारत में ये उत्पाद सस्ते दाम पर आएंगे तो स्थानीय किसानों की फसलें नहीं बिकेंगी..
अमेरिकी सोयाबीन ऑयल और DDGS के आयात से भारतीय तिलहन किसानों को नुकसान होगा.. किसान सोयाबीन और मूंगफली से मक्का और चावल की ओर शिफ्ट हो सकते हैं.. संयुक्त किसान मोर्चा ने इसे किसान विरोधी बताया है.. वे कहते हैं कि यह MSP को कमजोर करेगा और कॉरपोरेट को फायदा देगा.. पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में किसान हड़ताल की योजना बना रहे हैं.. गुजरात में कपास और मूंगफली किसान प्रभावित होंगे.. विशेषज्ञ कहते हैं कि यह डील 10 साल में टैरिफ कम करेगी.. लेकिन किसानों को एडजस्ट करने का समय नहीं मिलेगा..


