12 मौतों के बाद जागा प्रशासन! ड्रमंडगंज घाटी हादसे में ट्रेलर चालक पर केस, हाईवे कंपनी पर कब होगी कार्रवाई?

मिर्ज़ापुर के ड्रमंडगंज घाटी में दर्दनाक सड़क हादसे में 12 लोगों की मौत के बाद एआरटीओ ने ट्रेलर चालक और मालिक पर मुकदमा दर्ज कराया। वहीं वाराणसी-रीवा हाईवे निर्माण कंपनी की लापरवाही पर भी बड़े सवाल उठ रहे हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्कः  मिर्ज़ापुर की ड्रमंडगंज घाटी एक बार फिर दर्दनाक हादसे की वजह से सुर्खियों में है। बीते बुधवार की रात बड़का मोड़ घुमान के पास हुए भीषण सड़क हादसे में 12 लोगों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। हादसे के बाद प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हुई और एआरटीओ ने गिट्टी लदे ट्रेलर के अज्ञात चालक और मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।

लेकिन इस कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा सवाल अब भी जस का तस खड़ा है, क्या सिर्फ चालक और वाहन मालिक को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त है, या फिर वर्षों से हादसों का कारण बन रही ड्रमंडगंज घाटी की खतरनाक संरचना और हाईवे निर्माण में हुई लापरवाही की भी जवाबदेही तय होगी?

एआरटीओ ने दर्ज कराया मुकदमा

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) सत्येंद्र प्रताप सिंह ने ड्रमंडगंज थाने में दी गई तहरीर में आरोप लगाया कि गिट्टी लदे ट्रेलर संख्या BR 24 GC 7990 के अज्ञात चालक ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाया, जिसके कारण यह बड़ा हादसा हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि ट्रेलर के पास वैध परमिट नहीं था। इसी आधार पर अज्ञात चालक और ट्रेलर मालिक आशीष पांडेय, निवासी शांतिपुर अमरा खैराचक, गोमती वाराणसी, के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। ड्रमंडगंज थानाध्यक्ष भारत सुमन ने बताया कि बीएनएस की धारा 106(1) और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 192 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

ड्रमंडगंज घाटी फिर बनी मौत की घाटी

स्थानीय लोगों का कहना है कि ड्रमंडगंज घाटी पिछले चार वर्षों से लगातार सड़क हादसों और मौतों की गवाह बनती रही है। सैकड़ों दुर्घटनाएं और कई जानें जा चुकी हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकला। बुधवार रात का हादसा भी उसी लंबे सिलसिले की एक और भयावह कड़ी बन गया, जिसमें 12 लोगों की जान चली गई।

हाईवे निर्माण कंपनी पर कब होगी कार्रवाई?

हादसे के बाद सिर्फ ट्रेलर चालक और मालिक पर कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों और अधिवक्ताओं में नाराजगी है। सवाल यह उठ रहा है कि वाराणसी-रीवा हाईवे के निर्माण में जिन तकनीकी खामियों की लगातार शिकायत होती रही, उनके लिए जिम्मेदार निर्माण कंपनी, इंजीनियरों और ठेकेदारों पर कार्रवाई कब होगी? लालगंज तहसील के अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए साफ कहा कि ड्रमंडगंज घाटी की खतरनाक बनावट ही लगातार हादसों की सबसे बड़ी वजह है।

सीधी चढ़ाई और तेज ढलान बनी जानलेवा

अधिवक्ताओं और स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मार्ग की सबसे बड़ी समस्या इसकी सीधी चढ़ाई और अत्यधिक ढलान है। हाईवे निर्माण के दौरान इसे तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाते हुए सीधे मार्ग में परिवर्तित करने की बात कही गई थी। हालांकि, निर्माण कंपनी ने बाजार से बाहर मार्ग तो निकाल दिया, लेकिन पहाड़ी चढ़ाई वाले खतरनाक हिस्से को जस का तस छोड़ दिया गया। यही हिस्सा आज भी दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि उस समय सही इंजीनियरिंग निर्णय लिए गए होते, तो आज इतनी जानें नहीं जातीं।

प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी उठ रहे सवाल

हादसे के बाद प्रशासनिक कार्रवाई तेज जरूर हुई है, लेकिन जनता यह जानना चाहती है कि केवल एफआईआर दर्ज करने से क्या समस्या का समाधान हो जाएगा? विशेषज्ञ मानते हैं कि सड़क सुरक्षा केवल वाहन चालक की जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि सड़क की डिजाइन, ढलान, मोड़, संकेतक और निर्माण गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। यदि सड़क ही दुर्घटना को न्योता दे रही हो, तो सिर्फ चालक पर कार्रवाई न्याय का पूरा स्वरूप नहीं हो सकता।

लोगों की मांग, स्थायी समाधान चाहिए

ड्रमंडगंज घाटी के आसपास रहने वाले लोग अब सिर्फ जांच नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सड़क की संरचना में सुधार नहीं होगा, तब तक ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं। 12 मौतों के बाद यह मामला केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन चुका है। अब देखना यह होगा कि जांच केवल ट्रेलर चालक तक सीमित रहती है या हाईवे निर्माण की पूरी परतें भी खुलती हैं।

रिपोर्ट – संतोष देव गिरी

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