राजघाट हादसे में अधिवक्ता की मौत के बाद बड़ा आरोप, CMO समेत अस्पताल कर्मियों पर केस
राजघाट बैकुंठ धाम में रविवार को आकाशीय बिजली गिरने के बाद गुम्बदनुमा इमारत की छत ढहने से घायल अधिवक्ता आलोक कुमार अस्थाना की मौत के बाद मामला और गरमा गया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: राजघाट बैकुंठ धाम में रविवार को आकाशीय बिजली गिरने के बाद गुम्बदनुमा इमारत की छत ढहने से घायल अधिवक्ता आलोक कुमार अस्थाना की मौत के बाद मामला और गरमा गया है।
हादसे में घायल अधिवक्ता की मौत के बाद उनकी पत्नी ने सदर अस्पताल के सीएमओ और कर्मचारियों पर इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कोतवाली पुलिस को तहरीर दी। पुलिस ने सीएमओ और अस्पताल के अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद नाराज अधिवक्ताओं ने अस्पताल का घेराव समाप्त किया।
बारिश से बचने के लिए गुम्बद में ली थी शरण, तभी गिरी बिजली
बताया गया कि लोग राजघाट बैकुंठ धाम में अंत्येष्टि में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए कई लोग गुम्बदनुमा चबूतरे के नीचे बैठ गए। इसी बीच तेज आवाज के साथ आकाशीय बिजली गिरी और इमारत की छत/छज्जा भरभराकर नीचे आ गिरा। मलबे की चपेट में आने से अधिवक्ता आलोक अस्थाना और उनके साथी अधिवक्ता संजय सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए।
प्रत्यक्षदर्शी महिला के मुताबिक, हादसा अचानक हुआ। लोग बारिश से बचने के लिए गुम्बद के नीचे बैठे थे। बिजली गिरने के बाद छत का हिस्सा भरभराकर नीचे आ गया और वहां बैठे लोग उसकी चपेट में आ गए।
सदर अस्पताल पहुंचने के बाद शुरू हुआ विवाद
हादसे के बाद घायल आलोक अस्थाना को उपचार के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया। मृतक की पत्नी शालिनी अस्थाना का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी उनके पति को समय पर समुचित उपचार नहीं मिला। उन्होंने तहरीर में आरोप लगाया कि अस्पताल के डॉक्टरों और जिम्मेदार अधिकारियों ने इलाज में लापरवाही बरती।
शालिनी का आरोप है कि सीएमओ ने उनसे कथित रूप से कहा, “यहां रोज 10 लोग मरते हैं, एक और मर जाएगा तो क्या हो जाएगा।” उनका यह भी आरोप है कि करीब एक घंटे तक एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। पत्नी ने तहरीर में दावा किया है कि समय पर इलाज नहीं मिलने और कथित तौर पर जानबूझकर बरती गई लापरवाही के कारण उनके पति की मौत हुई।
आलोक अस्थाना की मौत की खबर मिलते ही अधिवक्ताओं में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में अधिवक्ता अस्पताल पहुंच गए और घेराव कर विरोध जताया। मामला बढ़ता देख पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पत्नी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज होने के बाद अधिवक्ताओं ने घेराव खत्म किया।
CM योगी ने लिया संज्ञान, घायलों के उपचार के निर्देश
राजघाट में आकाशीय बिजली गिरने और हादसे की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को घायलों के समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आवश्यकता के अनुसार मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
आकाशीय बिजली गिरने से हुई मौत के मामले में पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की बात कही गई है। प्रशासन की ओर से परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है।
अब जांच में उठेंगे कई बड़े सवाल
हादसे के बाद जहां प्राकृतिक आपदा ने एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया, वहीं अधिवक्ता की मौत के बाद सदर अस्पताल की व्यवस्था और इलाज को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। क्या घायल को समय पर उपचार मिला?
एंबुलेंस मिलने में देरी क्यों हुई? अस्पताल में उस समय कौन-कौन से चिकित्सक और कर्मचारी ड्यूटी पर थे? और क्या समय पर इलाज मिलने से अधिवक्ता की जान बचाई जा सकती थी? इन सवालों का जवाब अब पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद अस्पताल प्रशासन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। वहीं, प्रशासन ने परिवार को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के साथ मुख्यमंत्री राहत कोष से भी मदद दिलाने का आश्वासन दिया है।
रिपोर्ट- अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर



