टिकट के साथ धोखा भी बेच रही है एयर इंडिया!
फ्रंट सीट के नाम पर वसूले एक्स्ट्रा पैसे लेकिन दी पीछे वाली सीट, न खाता न बही जो एयर इंडिया कहे वही सही

शिकायत के बाद गलती मानी, माफी भी मांगी लेकिन फिर जिम्मेदारी से भागी एयर इंडिया?
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। एयर इंडिया नाम सुनते ही कभी महाराजा वाली शाही सेवा का सा फील आता था। लेकिन एक बार आप यात्रा करके देखिये तो असलियत सामने होगी। सुविधाओं का ढिढोरा पीटने वाली एयर इंडिया अब यात्रियों की जेब काटने वाली एक ऐसी मशीन बन चुकी है जहां सुविधा सिर्फ टिकट पर लिखी जाती है जमीन पर नहीं दिखाई देती।
एयर इंडिया की शिका=यतों का पिटारा तेजी से भर रहा है। रोज नई तरह की नई शिकायत सामने आ रही है। इस बार एक ऐसी शिकायत सामने आई है जो आना ही नहीं चाहिए थी। हुआ यह कि एक भारतीय ट्रेवलर 21 अप्रैल 25 को दुबई से दिल्ली और दिल्ली से लखनऊ आये। अपनी यात्री को आरामदायक सफर बनाने के लिए उन्होंने एयर इंडिया की फ्लाइट में आगे की सीट सीट नंबर 6एफ को चुना और इसके लिए अतिरिक्त पैसे यानी एयरलाइन ने साफ वादा किया कि पैसे दो सुविधा लो। लेकिन बोर्डिंग के समय अचानक खेल बदल गया। यात्री को पहले सीट 29एफ दी गयी और फिर बिना बताए उसे सीधे विमान के पिछले हिस्से की सीट 33 आवंटित कर दी गयी। यानी जिस सुविधा के लिए पैसा लिया गया था उसे एयर इंडिया ने ऐसे खींच लिया जैसे ग्राहक का कोई अधिकार ही न हो।भी एयर इंडिया को दिए गए।

सबसे बड़ा सवाल क्यों?
क्या विमान में कोई तकनीकी आपात स्थिति थी? क्या सुरक्षा का मामला था? क्या कोई वीआईपी यात्री आया था? या फिर एयरलाइंस के लिए अब यह सब रूटीन मैनेजमेंट बन चुका है? यात्री का आरोप है कि कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। सहमति नहीं ली गई। और शिकायत करने पर जवाबदेही की जगह बेरुखी मिली। यहीं से यह मामला सिर्फ सीट विवाद नहीं रह गया बल्कि यह उपभोक्ता अधिकारों पर हमला बन गया। देश की एयरलाइंस आजकल हर चीज बेच रही हैं सीट का पैसा अलग, लेगरूम का पैसा अलग, खिडक़ी के पास बैठने का पैसा अलग। यानि आसमान में उड़ान कम उगाही ज्यादा दिखाई देने लगी है। लेकिन जब ग्राहक पैसे देकर सुविधा खरीदता है और फिर वही सुविधा बिना जवाबदेही के छीन ली जाती है तो सवाल उठना लाजिमी है कि क्या एयरलाइंस अब टिकट नहीं भ्रम बेच रही हैं? और यह कोई अकेली शिकायत नहीं है। सोशल मीडिया ऐसे मामलों से भरा पड़ा है। कहीं परिवार को अलग-अलग सीटों में बांट दिया जाता है। कहीं प्रीमियम सीट हटाकर आखिरी कतार पकड़ा दी जाती है। कहीं शिकायत करने पर स्टाफ ऐसा व्यवहार करता है जैसे एहसान कर रहा हो और हर बड़ा सवाल कही न कही एयर इंडिया से जाकर जुड़ता है।
एयर इंडिया की उड़ान या यात्रियों के भरोसे का अपहरण
भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। एयरलाइंस खुद को वल्र्ड क्लास और कस्टमर फ्रेंडली बताने में कोई कसर नहीं छोड़ रहीं। लेकिन जमीन पर यात्रियों का अनुभव अक्सर इन दावों का उल्टा दिखाई देता है।ताजा मामला एयर इंडिया का है जहां यात्री ने आरोप लगाया है कि उससे पसंदीदा सीट के नाम पर अतिरिक्त पैसे तो ले लिए गए लेकिन बोर्डिंग के समय उसकी सीट बिना सहमति और बिना उचित कारण बदल दी गई। घटना 21 अप्रैल 25 की है। एयरलाइंस के आफर के बाद यात्रा के दौरान यात्री ने विमान के अगले हिस्से में स्थित सीट 6एफ चुना था इसके लिए अतिरिक्त फीस दी गयी और कुल टिकट का एमाउंट 13,659 रुपये था। लेकिन बोर्डिंग के समय एयर इंडिया ने पहले उसकी सीट एफ की और बाद में पीछे की सीट 33 पर भेज दिया। अब सवाल यह नहीं कि सीट बदली या नहीं। सवाल यह है कि एयरलाइंस आखिर ग्राहक को समझती क्या हैं?
लीगल नोटिस के बाद एयर इंडिया ने गलती मानी लेकिन जिम्मेदारी से भागी
यात्री ने एयर इंडिया को लीगल नोटिस भेजा तो वह फौरन बैक गियर में आ गयी और गलती स्वीकार कर ली। यात्री के मुताबिक एयर इंडिया ने जवाब में खेद जताया और गलती स्वीकार की और रिफंड देने की बात भी कही गई। लेकिन इन सबके बीच फिर एक नया खेल शुरू हो गया। एयर इंडिया ने यात्री से कहा कि वह रिफंड के लिए ट्रैवल एजेंसी से संपर्क करे। एयर इंडिया के इस जवाब के बाद से यहीं सबसे बड़ा सवाल उठता है कि जब सीट एयरलाइन ने बदली गलती एयरलाइन ने की तो जिम्मेदारी ट्रैवल एजेंसी पर कैसे डाल दी गई? क्या यह ग्राहक को थकाकर मामला खत्म कराने की रणनीति है?
क्या कहता है उपभोक्ता कानून
उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि उपभोक्ता कानूनों के मुताबिक अगर किसी सेवा के लिए अतिरिक्त शुल्क लिया गया और वह सेवा उपलब्ध नहीं कराई गई, तो यह सेवा में कमी मान जाएगी। साथ ही इसे अनुचित व्यापार व्यवहार भी माना जा सकता है। कानून यह भी कहता है कि ग्राहक को भ्रमित नहीं किया जा सकता। भुगतान के बाद सुविधा छीनना गलत है। मानसिक उत्पीडऩ भी कानूनी मुद्दा बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यात्री उपभोक्ता आयोग में जाकर सीट शुल्क रिफंड, मानसिक क्षति का मुआवजा और कानूनी खर्च, के साथ दंडात्मक कार्रवाई की मांग कर सकता है।
ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर फिर घमासान
कांग्रेस ने एनडीए सरकार को घेरा, पर्यावरण को अनदेखी कर रही केंद्र सरकार
विपक्ष बोला- चीन के सामने खुद समर्पण कर रहे पीएम मोदी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कांग्रेस का भाजपा व मोदी सरकार पर तीखा हमला जारी है। पार्टी ने एकबार फिर केंद्र सरकार पर ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर उस पर करार वार किया है। वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को केंद्र सरकार पर ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के आलोचकों को चीन के प्रति नरम बताने के लिए प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार स्वयं चीन के सामने निरंतर, सुनियोजित आत्मसमर्पण की नीति अपना रही है। एक्स पर साझा किए गए एक पोस्ट में रमेश ने कहा कि सरकार इस परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय और मानवीय मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
गलवान संघर्ष का जिक्र करते हुए रमेश ने कहा कि 19 जून, 2०2० को प्रधानमंत्री ने चीन को एक अस्पष्ट क्लीन चिट दे दी, जो लद्दाख में शहीद हुए 2० जवानों का घोर अपमान था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने चीन के साथ बातचीत के दौरान लद्दाख के कई क्षेत्रों में पारंपरिक गश्त और पशुपालन के अधिकार छोड़ दिए और दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह मोदी सरकार ही है जिसने चीन के साथ बातचीत में लद्दाख के कई स्थानों पर पारंपरिक गश्त और पशुपालन के अधिकार छोड़ दिए हैं। प्रधानमंत्री की देखरेख में ही भारत का चीन के साथ 2025-26 में लगभग 115 अरब अमेरिकी डॉलर का रिकॉर्ड व्यापार घाटा हुआ, जिससे भारतीय उद्योग, विशेषकर लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भारी नुकसान हुआ।
विपक्ष को प्रचार से कर रहे बदनाम : जयराम
उन्होंने लिखा कि मोदी सरकार ने अब अपने ही माध्यम से एक प्रचार अभियान शुरू किया है, जिसमें ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को लेकर चिंतित सभी लोगों को चीन के प्रति नरम बताया जा रहा है। यह पाखंड की पराकाष्ठा है, खासकर ऐसी सरकार की ओर से जो खुद चीन के सामने निरंतर, सुनियोजित आत्मसमर्पण की नीति का पालन करती है। कांग्रेस नेता ने आगे आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने चीन के साथ संबंधों में कई मोर्चों पर भारत की स्थिति से समझौता किया है।
ऑपरेशन सिंदूर में भी सरकार ने सैन्य अधिकारियों को किया नजरअंदाज
रमेश ने आगे दावा किया कि केंद्र सरकार मई 25 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन की कथित भूमिका के बारे में वरिष्ठ सेना अधिकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर ध्यान देने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने मई 25 में ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में पाकिस्तान की योजना बनाने, निगरानी करने और उसे अंजाम देने में चीन की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में वरिष्ठ सेना अधिकारियों के खुलासों पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
केंद्र व राज्यों को सुप्रीम नोटिस, मांगा जवाब
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। टेट्रा पैक में शराब की बिक्री के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया। कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग नाम की संस्था की याचिका में कहा गया था कि शराब की बोटलिंग से जुड़े नियमों में अस्पष्टता के चलते ऐसा हो रहा है। टेट्रा पैक में स्वास्थ्य चेतावनी नहीं छापी जा रही। पैकेट पर फलों की तस्वीर लगाकर उसे जूस की तरह दिखाया जा रहा है।
याचिकाकर्ता ने इस तरह से बेची जा रही शराब पर बैन लगाने का अनुरोध किया है। कुछ दिन पहले ऐसी ही एक और जनहित याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें उत्तर प्रदेश में टेट्रा पैक में बेची जा रही देसी शराब पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। इसमें उत्तर प्रदेश के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत यूपी की नई एक्साइज पॉलिसी के तहत टेट्रा पैक में देसी शराब की बिक्री को अनिवार्य कर दिया गया है।
16 अप्रैल को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने यह याचिका लगी थी, जिस पर सीजेआई ने याचिकाकर्ता को सीधे कोर्ट आने के बजाय अपनी शिकायत के लिए राज्य के अधिकारियों से संपर्क करने के लिए कहा था. याचिकाकर्ता का कहना था कि इस तरह टेट्रा पैक में बेची जा रही शराब आसानी से शैक्षणिक संस्थानों में पहुंच रही है, जिसकी वजह से अपराध और शराब के दुरुपयोग की घटनाएं बढ़ रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसका बचाव करते हुए कहा था कि पहले देसी शराब बोतलों में बेची जाती थी, लेकिन नई एक्साइज पॉलिसी के तहत टेट्रा पैकिंग में शराब बेचे जाने का फैसला लिया गया है, ताकि सुरक्षा मानकों को बढ़ाया जा सके और मिलावट को रोका जा सके।
सतीशन सरकार का बड़ा फैसला
सिल्वरलाइन रेल कॉरिडोर परियोजना किया रद्द
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
तिरुवनंतपुरम्। केरल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने बुधवार को घोषणा की कि राज्य मंत्रिमंडल ने विवादास्पद तिरुवनंतपुरम-कासरगोड सिल्वरलाइन रेल कॉरिडोर परियोजना को रद्द करने का निर्णय लिया है, जिसे पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने शुरू किया था। एक महत्वाकांक्षी अवसंरचना परियोजना के रूप में प्रचारित इस परियोजना को जनता के व्यापक विरोध का सामना करना पड़ा था।
कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए वीडी सतीशन ने कहा कि सरकार ने राजस्व विभाग को भूमि सीमांकन के लिए लगाए गए सभी सर्वेक्षण पत्थरों को हटाने का निर्देश दिया है और परियोजना के लिए शुरू की गई सभी भूमि अधिग्रहण कार्यवाही रद्द कर दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि मामलों की प्रकृति की समीक्षा करने के बाद सरकार ने राज्य भर में परियोजना के विरोध प्रदर्शनों से संबंधित मामलों को वापस लेने के लिए अदालतों में हलफनामे दाखिल करने का निर्णय लिया है। अर्ध-उच्च गति रेल परियोजना के विरोध प्रदर्शनों में कांग्रेस अग्रणी भूमिका निभा रही थी। पिनारयी विजयन सरकार द्वारा 019 में प्रस्तावित 53० किलोमीटर लंबे सेमी-हाई-स्पीड रेलवे कॉरिडोर का उद्देश्य राज्य की दक्षिणी राजधानी तिरुवनंतपुरम को इसके सबसे उत्तरी जिले कासरगोड से जोडऩा था। इस परियोजना को जनता, राजनीतिक विरोध और बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा, खासकर भूमि अधिग्रहण और विस्थापन से संबंधित चिंताओं को लेकर। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों से ठीक पहले के वर्ष में इस परियोजना की व्यापक आलोचना के बाद, एलडीएफ सरकार ने चुपचाप इस पर आगे की कार्यवाही रोक दी। यह केंद्र सरकार की मंजूरी भी हासिल करने में विफल रही।
वाहन में घुसी कार, चालक समेत चार युवकों की मौत
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
अमरोहा। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में बड़ा हादसा हुआ है। गजरौला में हाईवे पर दिल्ली की तरफ जाते समय अज्ञात वाहन में पीछे से वैगनआर कार घुस गई। हादसे में चालक मोहम्मद सलमान (27) समेत चार युवकों की मौत हुई है। जबकि दो युवक घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
सलमान रामपुर के पंखेवालान गेट बमनपुरी का रहने वाला था। तीन मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है। रामपुर के पंखेवालान गेट बमनपुरी निवासी तनवीर ने पुलिस को बताया कि उनके भाई मोहम्मद सलमान टैक्सी में वैगनआर कार चलाते थे।
दूसरे प्रदेश के पांच युवक रामपुर में दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन रामपुर में उनकी ट्रेन छूट गई। इस कारण बुधवार सुबह वैगनआर में सवार हो गए। उनको सलमान दिल्ली छोडऩे जा रहे थे। करीब 4 बजे उनकी वैगनआर कार ख्यालीपुर ढाल से लगभग 2०० मीटर आगे पहुंची थी। बताया जा रहा है कि यहां पर आगे चल रहे अज्ञात वाहन में कार घुस जाने से कार चालक मोहम्मद सलमान समेत चार युवकों की मौत हो गई। कार में सवार हसनैन व समेतुल इस्लाम घायल हो गए। हादसे की सूचना पाकर यूपी-112 के पुलिस कर्मी पहुंच गए। उन्होंने घायलों को डिडौली कोतवाली क्षेत्र के चौधरपुर स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया। चारों के शव सीएचसी में लाए गए। यहां से उनको मोर्चरी पर भिजवा दिया। इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने बताया कि हादसे में चार युवकों की मौत का मामला सामने आया है। तीन की पहचान नहीं होने के कारण उनके शव मोर्चरी पर रखवाए गए है। उनकी पहचान होने पर ही पता चल सकेगा कि क्या करते थे और कहां जा रहे थे।



