पीएम आवास योजना में करोड़ों के घोटाले का आरोप, डूडा के संविदाकर्मियों पर उठे गंभीर सवाल

मीरजापुर में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में करोड़ों रुपये के घोटाले और फर्जी भुगतान के आरोप सामने आए हैं। डूडा विभाग के संविदाकर्मियों पर दोहरी किस्त, नियमों की अनदेखी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। जानिए पूरी स्पेशल रिपोर्ट।

4पीएम न्यूज नेटवर्क:  गरीबों को पक्का घर देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना अब मीरजापुर में सवालों के घेरे में आ गई है. जिस योजना को जरूरतमंद परिवारों के सिर पर छत देने के लिए बनाया गया था, उसी योजना में कथित भ्रष्टाचार, फर्जी भुगतान और विभागीय मिलीभगत के आरोप सामने आने लगे हैं. मामला इतना गंभीर बताया जा रहा है कि अब स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी इसकी चर्चा तेज हो गई है.

मीरजापुर के जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) विभाग पर आरोप है कि यहां कुछ संविदाकर्मी योजना समाप्त होने और संविदा खत्म होने के बावजूद पिछले दो वर्षों से विभाग में सक्रिय हैं. सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बिना वेतन और बिना वैध संविदा के ये कर्मचारी किसके संरक्षण में विभागीय कामकाज में दखल दे रहे हैं.

संविदा खत्म, फिर भी विभाग में सक्रिय कर्मचारी

सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़े कुछ संविदाकर्मी योजना समाप्त होने के बाद भी डूडा कार्यालय में लगातार बने हुए हैं. आरोप है कि ये लोग प्रधानमंत्री आवास योजना में सत्यापन, फाइलों की प्रक्रिया और लाभार्थियों से जुड़े कार्यों में दखल देते रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि अहरौरा, चुनार और नगर पालिका क्षेत्रों में आवास योजना के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं. कई लाभार्थियों ने ऑफ रिकॉर्ड यह भी दावा किया कि शिकायत करने पर उन्हें योजना से वंचित करने की धमकी तक दी जाती थी.

करोड़ों के भुगतान में गड़बड़ी का आरोप

मामले का सबसे गंभीर हिस्सा भुगतान में कथित अनियमितताओं को लेकर सामने आया है. आरोप है कि करीब 200 से अधिक लाभार्थियों को प्रधानमंत्री आवास योजना की दूसरी किस्त दो-दो बार जारी कर दी गई. सूत्रों के अनुसार, अप्रैल और मई महीने में लगभग 900 लाभार्थियों को एक साथ भुगतान किया गया, जिसमें करीब 200 लोगों को डबल भुगतान होने की बात कही जा रही है. इस कथित गड़बड़ी में लगभग 1.25 करोड़ रुपये के भुगतान पर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है.

पति-पत्नी दोनों को मिला योजना का लाभ?

जांच की मांग के बीच कुछ ऐसे मामलों की भी चर्चा है, जिनमें कथित तौर पर नियमों को दरकिनार कर भुगतान किए गए. आरोपों के मुताबिक कुछ लाभार्थियों को तय मानक से अधिक राशि दी गई, जबकि एक ही परिवार के पति और पत्नी दोनों को अलग-अलग आवास योजना का लाभ मिला. स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि पूरे मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए तो कई और नाम सामने आ सकते हैं.

राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगे

विभागीय सूत्रों का दावा है कि कुछ संविदाकर्मियों को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है, जिसकी वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही. यही कारण है कि संविदा समाप्त होने के बाद भी उनका विभाग में प्रभाव बना हुआ है. बीजेपी से जुड़े कुछ स्थानीय नेताओं ने भी मुख्यमंत्री से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में भ्रष्टाचार से सरकार की छवि प्रभावित हो रही है.

विभागीय गोपनीयता पर भी उठे सवाल

सूत्रों के मुताबिक, संविदा समाप्त होने के बावजूद कुछ लोग विभागीय गोपनीय फाइलों तक पहुंच रखते हैं. इससे सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिला मुख्यालय के पास स्थित इस विभाग में लंबे समय से मनमानी और जवाबदेही की कमी देखने को मिल रही है, लेकिन उच्च अधिकारियों की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं हुई.

नए परियोजना निदेशक पर टिकी निगाहें

डूडा विभाग में अब परियोजना निदेशक का प्रभार उपजिलाधिकारी संतोष कुमार ओझा को सौंपा गया है. इससे पहले विभाग का अतिरिक्त प्रभार अजीत कुमार के पास था. अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि नए अधिकारी इन आरोपों की जांच किस स्तर तक कराते हैं और क्या कथित अनियमितताओं में शामिल लोगों पर कार्रवाई होती है या नहीं.

जांच के बाद ही साफ होगी सच्चाई

प्रधानमंत्री आवास योजना देश की सबसे महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक मानी जाती है. ऐसे में यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी हो जाती है. हालांकि अभी तक इन आरोपों पर संबंधित विभाग की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. ऐसे में जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और किस स्तर तक जिम्मेदारी तय होगी.

रिपोर्ट – संतोष देव गिरी

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