ठेकों में ‘हिस्सेदारी’ का आरोप, BJP लेटरहेड पर क्यों उठे सवाल? 

अंजार में ठेकों को लेकर ‘हिस्सेदारी’ के आरोपों ने सियासी माहौल गरमा दिया है... BJP के लेटरहेड को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः अंजार में ठेकों में कथित हिस्सेदारी को लेकर अब सियासत गरमाती नजर आ रही है.. खास बात यह है कि इस पूरे मामले में सवाल किसी विपक्षी दल की ओर से ही नहीं.. बल्कि बीजेपी के अपने लेटरहेड पर सामने आई शिकायतों को लेकर भी उठ रहे हैं.. गुजरात प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. कायनात अंसारी ने एक संवाददाता सम्मेलन में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया.. और अंजार शहर की भाजपा इकाई से जुड़े सदस्यों द्वारा कथित तौर पर उठाई जा रही शिकायतों का हवाला दिया.. उन्होंने सवाल किया कि जब पार्टी के भीतर से ही इस तरह के सवाल सामने आ रहे हैं.. तो फिर भाजपा नेतृत्व आखिर चुप क्यों है.. क्या इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच नहीं होनी चाहिए..

आपको बता दें कि मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है.. बल्कि सीधे तौर पर जनता के पैसे और शहर के विकास से जुड़ा हुआ है.. सवाल यह है कि नगर के विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए आवंटित किया गया टैक्सपेयर का पैसा वास्तव में विकास कार्यों पर खर्च हो रहा है.. या फिर कथित तौर पर ‘शेयर’ के रूप में बांटे जाने के आरोपों के घेरे में आ रहा है.. डॉ. कायनात अंसारी ने इसी सवाल को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार और भाजपा नेतृत्व से जवाब मांगने की बात कही.. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है.. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि शिकायतें सामने आई हैं.. तो उनकी जांच कब होगी और जांच के निष्कर्ष जनता के सामने कब रखे जाएंगे..

अंजार में सफाई व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं.. आरोप है कि शहर में स्वच्छता और सफाई के नाम पर करीब 33 लाख रुपये खर्च किए गए.. लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात संतोषजनक नजर नहीं आ रहे हैं.. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि अगर सफाई व्यवस्था पर लाखों रुपये खर्च किए गए हैं.. तो फिर शहर की गलियों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर सफाई का असर दिखाई क्यों नहीं दे रहा.. क्या खर्च किए गए 33 लाख रुपये का पूरा और पारदर्शी हिसाब जनता के सामने रखा गया है.. किन कार्यों पर कितना पैसा खर्च हुआ? किस एजेंसी या ठेकेदार को काम दिया गया.. काम की निगरानी किस अधिकारी या विभाग ने की.. और सबसे महत्वपूर्ण सवाल क्या काम वास्तव में तय मानकों के मुताबिक हुआ..

डॉ. कायनात अंसारी के आरोपों के बाद यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का विषय बनता दिखाई दे रहा है.. विपक्ष का कहना है कि जनता के टैक्स से आने वाले पैसे का इस्तेमाल पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए.. और किसी भी तरह की अनियमितता की शिकायत सामने आने पर उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है.. वहीं बीजेपी से जुड़े लोगों की ओर से सामने आने वाली कथित शिकायतों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है.. अगर पार्टी के ही किसी स्थानीय पदाधिकारी या सदस्य की ओर से सवाल उठाए गए हैं.. तो भाजपा नेतृत्व को इन शिकायतों पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए.. क्योंकि मामला केवल पार्टी की छवि का नहीं.. बल्कि सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और स्थानीय विकास से जुड़ा हुआ है..

 

 

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