ईरान के पलटवार से हिल गया अमेरिका! ट्रंप पर बढ़ा दबाव
अमेरिका ईरान से पंगा लेकर बुरी तरह फंस गया है। एक ओर जहाँ अमेरिका का हर दिन 24 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहा है, तो वहीं दूसरी ओर तेल और गैस की किल्लत के बाद डॉलर का टूटना शुरू हो सकता है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अमेरिका-ईरान जंग में अब बड़ा गेम शुरू हो चुका है। न सिर्फ जंग की रणनीति बदल रही है, बल्कि मोहरे और प्यादे भी बदलना शुरू हो चुके हैं। एक ओर जहाँ बड़ी खबर निकलकर सामने आई है कि अंदरखाने में चीन पूरी तरह से ईरान के साथ खड़ा है, तो वहीं दूसरी ओर अब नॉर्थ कोरिया ने भी ईरान को खुला सपोर्ट करते हुए अमेरिका को ललकारा है।
इससे जहाँ एक ओर ट्रंप की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई है, तो वहीं दूसरी ओर मिडिल ईस्ट में नाटो देशों ने डर की वजह से अपने एयरबेसों की सुरक्षा बढ़ानी शुरू कर दी है। कहाँ से और कैसे यह बड़ी खबर सामने आई है कि चीन अंदरखाने में ईरान का फुल सपोर्ट कर रहा है और कैसे रूस के बाद नॉर्थ कोरिया के सामने आने के बाद पूरा गेम पलट गया है,
अमेरिका ईरान से पंगा लेकर बुरी तरह फंस गया है। एक ओर जहाँ अमेरिका का हर दिन 24 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहा है, तो वहीं दूसरी ओर तेल और गैस की किल्लत के बाद डॉलर का टूटना शुरू हो सकता है। ऐसे में ट्रंप को न सिर्फ जोरदार झटका लगा है, बल्कि हॉर्मुज पर बढ़ी ईरान की पहरेदारी के बाद इजराइल और अमेरिका, दोनों के तेवर कुछ ठंडे पड़े हैं। लेकिन पिछले 12 दिनों में ईरान ने जिस बहादुरी से जंग लड़ी है, वह अपने आप में इतिहास है।
दुनिया के सुपर पावर देशों के सामने ईरान ने न सिर्फ ट्रंप की हवा निकाल दी है, बल्कि पूरी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर इतनी हिम्मत और इतना जज्बा ईरान लाता कहाँ से है? क्योंकि ईरान 12 दिन बाद भी उसी मजबूती से लड़ रहा है। हॉर्मुज हो, मिडिल ईस्ट हो या फिर इजराइल, वह सब तरफ अकेले ही पंगा लिए पड़ा है। लेकिन अब खबर आ रही है कि ईरान को न सिर्फ रूस नैतिक मदद कर रहा है, बल्कि चीन पीछे से ईरान को ऐसा डेटा ट्रांसफर कर रहा है, जिससे ईरान अपने टारगेट को सही तरीके से अचीव कर पा रहा है। आपको बता दें कि हालात यह है कि अमेरिका क्या करने वाला है और इजराइल की सेना का अगला कदम क्या होने वाला है, इतने अहम डेटा ईरान के पास चीन के जरिए पहुँच रहे हैं।
सोशल मीडिया के हवाले से खबर लिखी है कि ईरान को सारी जानकारी चीन ही दे रहा है। भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को ईरान पर पहली मिसाइल चलने से पहले ही चीनी सोशल मीडिया पर संकेत मिलने लगे थे कि अमेरिका बड़ा हमला करने की तैयारी कर रहा है। इंटरनेट पर अमेरिकी सैन्य तैयारियों से जुड़ी सैटेलाइट तस्वीरें तेजी से फैलने लगी थीं। इन तस्वीरों की खास बात यह थी कि इनमें असामान्य रूप से बहुत ज्यादा जानकारी दी गई थी और यह जानकारी अंग्रेजी में नहीं, बल्कि चीनी भाषा में लिखी हुई थी। तस्वीरों में अलग-अलग विमानों के नाम बताए गए थे, मिसाइल रक्षा सिस्टम को साफ तौर पर चिह्नित किया गया था और सैनिकों की तैनाती को सटीक लोकेशन के साथ दिखाया गया था।
इन सैटेलाइट तस्वीरों को एक चीनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी ने ऑनलाइन साझा किया था। एक तस्वीर में इजराइल के ओवदा एयर बेस पर लॉकहीड मार्टिन के एफ-22 स्टेल्थ फाइटर खड़े दिखाई दे रहे थे। दूसरी तस्वीर में सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर विमानों और सपोर्ट सिस्टम की बढ़ती तैनाती दिखाई गई थी। इसके अलावा कतर, जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी नक्शे पर चिन्हित किया गया था। ये सभी तस्वीरें शंघाई स्थित जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस कंपनी ‘मिजार विजन’ ने साझा की थीं, जिसमें 200 से भी कम कर्मचारी काम करते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत ईरान पर हवाई हमले शुरू किए। इसके जवाब में तेहरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए। लेकिन इस संघर्ष के बीच एक और चीज समानांतर रूप से चल रही थी। इंटरनेट पर लगातार सैटेलाइट तस्वीरें सामने आ रही थीं, जिनमें अमेरिकी विमानों, मिसाइल रक्षा सिस्टम और नौसैनिक गतिविधियों को दिखाया जा रहा था।
ये सभी तस्वीरें ‘मिजार विजन’ द्वारा साझा की जा रही थीं। बताया जाता है कि पहली बड़ी तस्वीरों का सेट 20 फरवरी के आसपास सामने आया था। मिजार विजन ने हाई-रेजोल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों का एक संग्रह जारी किया, जिसमें दक्षिणी इजराइल के ओवदा एयर बेस पर अमेरिकी विमानों की तैनाती, सऊदी अरब और कतर समेत मिडिल ईस्ट के कई देशों में फाइटर जेट की मौजूदगी, अरब सागर में नौसैनिक गतिविधियां और विमानवाहक पोतों की आवाजाही दिखाई गई। इन सभी तस्वीरों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से अलग-अलग जानकारी भी जोड़ी गई थी।
विमानों के प्रकार बताए गए थे, सपोर्ट विमानों की पहचान की गई थी और मिसाइल रक्षा सिस्टम को भी चिन्हित किया गया था। 1 मार्च तक यह डेटा और बढ़ गया था। मिजार विजन ने जॉर्डन, कुवैत, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के सैन्य ठिकानों की भी नई सैटेलाइट तस्वीरें जारी कीं। इन तस्वीरों में अलग-अलग तरह के विमानों, एयर डिफेंस सिस्टम की व्यवस्था और सैनिकों की तैनाती को भी दिखाया गया था। इन सैटेलाइट तस्वीरों को सटीक लोकेशन के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) और चीनी प्लेटफॉर्म ‘वीबो’ (Weibo) पर पोस्ट किया गया। इनमें से कई पोस्ट चीनी सरकारी मीडिया से जुड़े अकाउंट्स और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से जुड़े विश्लेषकों ने भी साझा किए। इन तस्वीरों में अमेरिका के कई अहम सैन्य प्लेटफॉर्म दिखाई दिए। सैटेलाइट तस्वीरों में इजराइल के ओवदा एयर बेस पर एफ-22 स्टेल्थ फाइटर खड़े नजर आए, ठीक उस समय जब युद्ध शुरू होने वाला था। तस्वीरों के अनुसार, सात एफ-22 विमान रनवे के पास खड़े थे और चार अन्य एफ-22 रनवे पर दिखाई दे रहे थे।
करीब 24 घंटे बाद “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” शुरू हो गया। अन्य तस्वीरों में सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर सैन्य गतिविधियां भी दिखाई गईं। यहाँ सात बोइंग ई-3 एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम विमान और दो बॉम्बार्डियर ई-11 कम्युनिकेशन विमान तैनात बताए गए। इसके अलावा कतर के अल-उदीद एयर बेस की भी सैटेलाइट तस्वीरें सामने आईं। बाद में यही एयर बेस ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बना। हालांकि, ये तस्वीरें सिर्फ एयरफील्ड तक ही सीमित नहीं थीं। समुद्र में नौसैनिक गतिविधियों को भी ट्रैक किया गया।
ऐसे में भास्कर की रिपोर्ट और एक्स के दावों से यह बात बहुत हद तक साबित होती है कि चीन पहले ही दिन से ईरान की मदद कर रहा है। आपको बता दें कि चीन अब तक दो बार खुलकर ईरान के पक्ष में बोल चुका है और पिछले दिनों यानी कि जंग से पहले ईरान को हथियारों की एक बहुत बड़ी खेप दी है। दूसरी ओर, चीन अपने तेल और गैस का 20 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा ईरान से ही खरीदता है और ईरान, वेपन डील में उसका एक अच्छा साथी है।
ऐसे में चीन ईरान की मदद कर रहा है ताकि उसे खोना न पड़े। माना जा रहा है कि जिस तरीके से मिडिल ईस्ट के एयरबेसों पर ईरान ने कहर बरपाया और अमेरिकी युद्धपोतों को पीछे हटने पर मजबूर किया, उसमें कहीं न कहीं चीन की बड़ी मदद थी। वहीं दूसरी ओर, जहाँ तक रूस का सवाल है, तो पहले ही कूटनीतिक मामले में वह ईरान के साथ खड़ा है। हालांकि ईरान-अमेरिका जंग में रूस को बड़ा फायदा हो रहा है, लेकिन उसके बाद भी रूस और पुतिन पूरी ताकत लगाए हुए हैं कि किसी तरह से जंग खत्म हो जाए।
पुतिन ने न सिर्फ इसके लिए ट्रंप से बात की है, बल्कि जंग शुरू होने से लेकर अब तक दो बार ईरान के राष्ट्रपति से बात कर उनको भरोसा दिलाया है कि वे पूरी कोशिश में हैं कि जंग खत्म हो जाए और 12वें दिन की जंग में इसका असर भी दिखा है। एक ओर जहाँ अमेरिकी हमलों की रफ्तार घटी है, वहीं ईरान अभी भी हमले जारी रखे हुए है। लेकिन अब पूरे मामले में अचानक नॉर्थ कोरिया की एंट्री हुई है। किम जोंग के देश से आए बयान ने खलबली मचा दी है। नॉर्थ कोरिया के सरकारी मीडिया ने साफ-साफ कह दिया है कि वह इस जंग में ईरान के साथ है। नॉर्थ कोरिया का कहना है कि हर देश को अपने नेता चुनने का अधिकार है, इस मामले में अमेरिका को इंटरफेयर नहीं करना चाहिए।
नॉर्थ कोरिया ने यह भी कहा है कि अगर जरूरत हुई तो वह ईरान के साथ खड़ा होगा। हालांकि अमेरिका चाहता है कि ईरान में कोई ऐसी सरकार आए जो उसकी गुलाम हो। लेकिन नॉर्थ कोरिया ने इस पर कड़ा एतराज जताया है। किम जोंग के देश ने साफ कह दिया है कि ईरान का सुप्रीम लीडर कौन होगा, यह ईरान की आवाम और वहाँ की काउंसिल तय करेगी, अमेरिका नहीं! अमेरिका को कोई हक नहीं है कि वह दूसरे मुल्कों के अंदरूनी मामलों में दखल दे। माना जा रहा है कि यह बयान ट्रंप के मुंह पर तमाचा है। यह दिखाता है कि अब दुनिया अमेरिका के डिक्टेशन पर चलने को तैयार नहीं है।
ऐसे में साफ है कि एक ओर चुपके-चुपके ही सही, लेकिन चीन अंदरखाने से ईरान की बहुत बड़ी मदद कर रहा है। रूस भी पूरे प्रयास में लगा है कि जंग रुके और नॉर्थ कोरिया भी ईरान के समर्थन में उतर पड़ा है। ऐसे में जंग न सिर्फ भड़क सकती है, बल्कि जंग का दायरा भी बहुत बड़ा हो सकता है। आपको क्या लगता है? क्या नॉर्थ कोरिया की एंट्री के बाद अमेरिका पीछे हटेगा? क्या ट्रंप और नेतन्याहू को उनके किए की सजा मिलनी चाहिए?



