ईरान ने दबा दिया पैनिक बटन, मचा हाहाकार
अब बिजनेस और बैकिंग पर वार पेट्रोल प्राइस हाइक से मचेगी हाहाकार, अमेरिकी बमों की बारिश से बीती रात दहला ईरान भयंकर तबाही

ईरान ने बदली रणनीति अब इजरायली कंपनियों के डाटा सेंटर और बैकिंग सिस्टम पर करेगा वार
1250 से ज्यादा ईरान में नागरिकों के हताहत होने की सूचना है अमेरिकी हवाई हमलों में
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। 12 दिनों के युद्ध के बाद जंग अब धीरे धीरे अपना रंग बदल रही है। नागरिकों के खून और सैन्य ठिकानों के तबाह होने के बाद टारगेट बदले जा रहे हैं और जंग को और खतरनाक मोड में लड़ा जाना तय पाया गया है। अमेरिका इजरायल के लगातार अटैक से विचलित हुए बिना ईरान ने जंग को समुद्री ठिकानों के साथ बैकिंग और बिजनेस ठिकानों की तरफ धकेल दिया है।
ईरान किसी भी कीमत पर पेट्रोल प्राइस हाइक कर पश्चिम में हाहाकार मचाना चाहता है। ईरान तेल की कीमतों को प्रति बैरल 200 डालर तक ले जाना चाहता है। वह जानता है कि उसके ऐसा करने से जनता का दबाव सरकारों पर आयेगा और तब सरकारें घुटनों पर आने में तनिक भी देर नहीं लगाएंगी। वहीं अमेरिका और इजरायल बिना देरी किये ईरान पर बमों की बारिश करने में तनिक भी तरस नहीं खा रहे। शायद ही ईरान का ऐसा कोई शहर बाकी होगा जहां अमेरिकी बमों के निशान न दिखे। ईरान के संर्दभ में अमेरिका और इजरायल के तमाम पूर्वनुमान गलत साबित हुए। 12 दिन की धुंआधार जंग के बाद भी ईरान में न तो पालिटिक्ल् सिस्टम बदला और न ही उसने हार मानी। हां ईरान को जानी और माली नुकसान जरूर झेलना पड़ा है। इन सब चीजों के बरअक्स ईरान के नये सर्वोच्य लीडर आयुत्तला मुजत्बा खामनेई ने अपने ईरादे जाहिर करते हुए जंग में नरमी के किसी भी एंगल को नाकार दिया है और कहा है कि अब हथियारों की भाषा में ही अमरीका से बात होगी।

अब आर्थिक नसों पर वार
भारतीय वार एनालिस्ट का मानना है कि ईरान अब केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रहना चाहता। युद्ध के दौरान लगातार दबाव के बावजूद तेहरान ने अपने राजनीतिक ढांचे को कायम रखा है। यही वजह है कि अब वह ऐसी रणनीति की ओर बढ़ता दिख रहा है जिससे विरोधी देशों की आर्थिक प्रणाली पर असर डाला जा सके। सूत्रों और विश्लेषणों के अनुसार ईरान की नजर अब इजरायल से जुड़े डिजिटल और आर्थिक ढांचे पर है। इसमें डाटा सेंटर, वित्तीय नेटवर्क और व्यापारिक प्लेटफार्म जैसे संवेदनशील क्षेत्र शामिल बताए जा रहे हैं। अगर इस तरह के हमले होते हैं तो उनका असर केवल एक देश तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक वित्तीय नेटवर्क भी प्रभावित होगा।
एलपीजी संकट और बढ़ती चिंता तेल बाजार को हथियार बनाने की रणनीति
इस युद्ध का सबसे बड़ा प्रभाव ऊर्जा बाजार पर पड़ता दिखाई दे रहा है। मध्य पूर्व दुनिया के तेल भंडार का केंद्र है और यहां का हर संघर्ष वैश्विक बाजार को हिला देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। सिर्फ 12 दिनों की जंग में क्रूड आयल की कीमतों में दोगुना उछाल दर्ज किया जा चुका है। ऐसे में जैसे जैसे जंग आगे बड़ेगी वैसे वैसे कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होगा। विश्लेषकों का अनुमान है कि तेल की कीमतें तेजी से ऊपर जाने से वैश्विक महंगाई बढ़ेगी और यदि ऐसा होता है तो परिवहन उद्योग और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों का क्या हश्र होगा इसका अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है।
12 दिन की जंग और बदलती रणनीति
बारह दिनों के संघर्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह युद्ध केवल सैन्य शक्ति की परीक्षा नहीं है। इसमें राजनीतिक इच्छाशक्ति आर्थिक रणनीति और तकनीकी क्षमताएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। युद्ध शुरू होने के समय कई विशेषज्ञों का मानना था कि संघर्ष जल्दी समाप्त हो सकता है या किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की संभावना बन सकती है। लेकिन अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है।
समुद्र बनता जंग का नया मैदान
अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने खाड़ी क्षेत्र के समुद्री रास्तों को एक नए युद्धक्षेत्र में बदल दिया है। अमेरिका ने अपने शक्तिशाली जंगी बेड़े को समुद्र में उतारकर ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है। वहीं ईरान ने भी जवाबी तैयारी के तौर पर अपनी पनडुब्बियों और तेज़ गति वाली नौकाओं की मच्छर फ्लीट को सक्रिय कर दिया है। अमेरिका की नौसैनिक ताकत दुनिया में प्रभावशाली मानी जाती है। अमेरिकी नौसेना के पास विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर परमाणु पनडुब्बियां और अत्याधुनिक विध्वंसक जहाज हैं जो समुद्र में लंबे समय तक युद्ध संचालन करने में सक्षम हैं। इन जहाजों पर तैनात लड़ाकू विमान और मिसाइल सिस्टम किसी भी विरोधी को दूर से निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी बेड़ों की मौजूदगी का मकसद समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और रणनीतिक दबाव बनाना माना जाता है।दूसरी तरफ ईरान की नौसैनिक रणनीति अलग ढंग की है। तकनीकी और संसाधनों के मामले में भले ही वह अमेरिका जितना शक्तिशाली न हो लेकिन उसने असममित युद्ध की रणनीति विकसित की है। ईरान की नौसेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड की समुद्री इकाइयां तेज़ गति वाली छोटी नौकाओं तटीय मिसाइलों और पनडुब्बियों का इस्तेमाल कर विरोधी जहाजों को चुनौती देने की क्षमता रखती हैं। इन्हीं छोटी लेकिन तेज़ नौकाओं को अक्सर मच्छर फ्लीट कहा जाता है जो झुंड बनाकर बड़े जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। ईरान की सबसे बड़ी ताकत समुद्री सुरंगें यानी माइन बिछाने की क्षमता भी मानी जाती है। खाड़ी क्षेत्र के संकरे समुद्री रास्तों में अगर बड़ी संख्या में बारूदी सुरंगें बिछा दी जाएं तो यह किसी भी नौसेना के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मिलने पहुंचे अखिलेश यादव
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, राजधानी लखनऊ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात करने पहुंचे।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंदी से मिलने के बाद समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, हम आज यहां उनका आशीर्वाद लेने आए हैं ऐसे समय में जब सोशल मीडिया इतना शक्तिशाली है, हर व्यक्ति विवाद पैदा करने के लिए तैयार है हालांकि, मैं यहां शंकराचार्य से आशीर्वाद लेने आया हूं।
माघ मेला 2026 के दौरान जनवरी में प्रयागराज में प्रशासन और पुलिस के साथ शंकराचार्य के विवाद के बाद कई नेता उनसे मुलाकात कर चुके हैं। दावा है कि अखिलेश के शंकराचार्य से मिलने पर राज्य में इस मुद्दे पर सियासत और ज्यादा गर्म हो सकती है।
ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत पहुंचा जहाज
शेलॉन्ग आज तडक़े मुंबई पहुंचा है
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। ईरान और इजरायल यु्द्ध का असर पूरी दुनिया के बाजार पर पड़ रहा है। इस बीच, भारत का एक जहाज शेलॉन्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होते हुए आज तडक़े मुंबई पहुंचा है. गौरतलब है कि होर्मुज से ईरान ने चीन के अलावा किसी अन्य देश के जहाजों को गुजरने की इजाजत नहीं दी है। शेलॉन्ग जहाज बड़ी जद्दोजहद के बाद भारत पहुंचा है। जहाज शेलॉन्ग में 1 लाख 35 हजार मीट्रिक टन क्रूड ऑयल है।
गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए ही दुनिया को आधे से ज्यादा कच्चे तेल की सप्लाई होती है. गौरतलब है कि मुंबई में जहां ये जहाज डॉक है वहां से इसमें मौजूद तेल को माहुल रिफाइनरी भेजा जाता है. इस तेल को पाइप के जरिए रिफाइनरी में भेजा जाता है. बताया जा रहा है कि ये जहाज होर्मुज होते हुए यहां पहुंचा है। गौरतलब है कि ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच युद्ध के कारण दुनियाभर में तेल और गैस का संकट बढ़ गया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ईरान ने केवल चीनी जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है. यही नहीं, ईरान कई देशों के तेल टैंकरों पर भी हमला किया है. जिससे मुश्किल और बढ़ी है।
फारूक अब्दुल्ला के सिर पर तानी पिस्तौल, बाल-बाल बचे
विपक्ष ने उठाया सवाल, चली गोली! कांप उठा जम्मू-कश्मीर
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में बुधवार रात एक शादी समारोह के दौरान उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक सशस्त्र व्यक्ति ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर हमला करने की कोशिश की। इस घटना में फारूक अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी बाल-बाल बच गए।
इसपर विपक्ष ने सवाल उठाया है। अधिकारियों ने बताया कि यह घटना उस समय हुई जब अब्दुल्ला, उपमुख्यमंत्री चौधरी और मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी शहर के बाहरी इलाके में स्थित ग्रेटर कैलाश क्षेत्र के समारोह स्थल से निकल रहे थे। आरोपी की पहचान कमल सिंह जामवाल के रूप में हुई है, जो पुरानी मंडी का निवासी है। वह पिस्तौल लेकर अब्दुल्ला के पीछे पहुंचा और गोली चला दी।जम्मू कश्मीर पुलिस के सुरक्षा शाखा के दो अधिकारियों—एक निरीक्षक और एक उप निरीक्षक ने उसे काबू कर लिया।
उपमुख्यमंत्री चौधरी ने इस घटना को सुरक्षा में चूक बताया, जबकि पुलिस ने कहा कि विस्तृत जांच जारी है। अधिकारियों ने बताया कि जामवाल की उम्र 70 वर्ष से अधिक है और हमले के वक्त वह नशे की हालत में था। उन्होंने बताया कि सतर्क कर्मियों द्वारा उसका हथियार छीने जाने और जमीन पर गिराए जाने से पहले उसने एक गोली चलाई।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि गोलीबारी में कोई घायल नहीं हुआ। हमले पर नाराजगी व्यक्त करते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, अल्लाह मेहरबान है। मेरे पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि फिलहाल विवरण अस्पष्ट हैं, लेकिन जो ज्ञात है वह यह है कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ बिल्कुल करीब आकर गोली चलाने में कामयाब हो गया।
नेता प्रतिपक्ष केंद्र सरकार से पूछे तीखे सवाल
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ऊर्जा सुरक्षा मामले में केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने संकट से निपटने के लिए अग्रिम तैयारी किए जाने का आह्वान करते हुए कहा, अगर ऐसा नहीं किया गया, तो भविष्य में करोड़ों लोगों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
राहुल का ये बयान एलपीजी की कमी को लेकर आई हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के बीच आया है। उन्होंने संसद परिसर में पत्रकारों से बात करने के अलावा सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए भी सरकार को घेरा।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की संसद में अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने अपने फेसबुक पर संसद परिसर में विरोध-प्रदर्शन की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, ‘संसद से नरेंदर गायब, देश से सिलेंडर गायब! इस मामले में फेसबुक पोस्ट के अलावा राहुल ने संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा, पीएम मोदी भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करने में असमर्थ हैं क्योंकि वह फंसे हुए हैं। उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भारत के लोग सुरक्षित रहें और देश की ऊर्जा सुरक्षा का प्रबंधन हम स्वयं करें। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जोर देकर कहा, गैस और ईंधन एक बड़ी समस्या बनने वाले हैं क्योंकि हमारी ऊर्जा सुरक्षा से समझौता हुआ है। उन्होंने कहा कि यह ईरान के होर्मुज क्षेत्र से तेल के जहाजों को आने की अनुमति देने या न



