अमित शाह का योगी पर हमला? | ‘सनातन का अपमान करने वाली सरकारें नहीं लौटतीं’ | सियासत गरम
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है... और उन्होंने कहा कि सनातन मूल्यों का अपमान करने...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है.. सनातन मूल्यों का अपमान करने वाली सरकारें सत्ता में दोबारा नहीं लौटतीं.. यह कथन महज वैचारिक टिप्पणी नहीं रह गया.. बल्कि इसके सियासी संकेतों को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है.. वहीं इस बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर अमित शाह का निशाना कौन था.. क्या यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर एक परोक्ष इशारा है.. या फिर विपक्ष पर किया गया वैचारिक हमला.. इसी बयान के साथ योगी आदित्यनाथ की ‘मठ वापसी’ को लेकर पुरानी अटकलें भी एक बार फिर तेज हो गई हैं.. सत्ता, संगठन और सनातन राजनीति के इस त्रिकोण ने राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म कर दिया है.. क्या यह बयान भविष्य की राजनीति का संकेत है.. या केवल विचारधारा की पुनर्पुष्टि.. यही सवाल अब केंद्र में है..
पूरे देश में राजनीतिक और धार्मिक चर्चाओं का केंद्र.. अमित शाह का 27 जनवरी को गुजरात के गांधीनगर में दिया गया भाषण बना हुआ है.. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वामीनारायण संप्रदाय के ‘समयो महोत्सव’ में.. ‘शिक्षापत्री’ के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर.. आदि शंकराचार्य की ग्रंथावली का गुजराती संस्करण का विमोचन किया.. इस दौरान उन्होंने सनातन धर्म के मूल्यों, आदि शंकराचार्य की भूमिका.. और मोदी सरकार की उपलब्धियों पर विस्तार से बात की.. और उन्होंने कहा कि संतों के आशीर्वाद से भरोसा है.. और जो सरकार सनातन धर्म के मूल्यों को कमजोर करेगी.. या उसके अनुयायियों को निराश करेगी.. वह दोबारा सत्ता में नहीं आएगी..
वहीं सोशल मीडिया पर इस बयान को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जोड़कर देखा जा रहा है.. कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि यह योगी सरकार पर इशारों में हमला है.. क्योंकि प्रयागराज माघ मेले 2026 में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद में योगी सरकार पर अपमान का आरोप लगा है.. योगी ने कुछ संतों को “कालनेमि” कहा था.. अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि अमित शाह ने योगी को “मठ वापसी” की सलाह दी है.. या 2027 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री बदलने की स्क्रिप्ट तैयार हो गई है..
आपको बता दें कि कार्यक्रम स्वामीनारायण संप्रदाय का था.. जो गुजरात में बहुत प्रभावशाली है.. भगवान स्वामीनारायण ने 19वीं सदी में समाज सुधार किए थे.. जिसमें बाल विवाह रोकना, शिक्षा बढ़ाना और नैतिक जीवन पर जोर देना शामिल था.. शिक्षापत्री उनकी मुख्य रचना है.. जिसमें 212 श्लोक हैं जो नैतिक नियम बताते हैं.. अमित शाह ने इस किताब के 200 वर्ष पूर्ण होने पर कार्यक्रम में हिस्सा लिया.. और आदि शंकराचार्य की ग्रंथावली का गुजराती अनुवाद जारी किया..
आपको बता दें कि शाह ने अपने संबोधन में कहा कि.. आजादी के बाद सनातन परंपराओं के अनुयायी लंबे समय से ऐसी सरकार का इंतजार कर रहे थे.. जो सनातन धर्म को उचित महत्व दे.. और उसके सिद्धांतों पर शासन करे.. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऐसी सरकार चल रही है.. मोदी गुजरात के पुत्र हैं.. और उन्होंने सनातन को मजबूत किया.. आदि शंकराचार्य ने भारतीय पहचान स्थापित की.. और उन्होंने पैदल पूरे भारत की यात्रा की.. चार मठ स्थापित किए.. और सनातन का ध्वज चारों दिशाओं में फहराया..
शंकराचार्य ने बौद्ध, जैन, कपालिक, तांत्रिक आदि धाराओं के बीच सनातन के संदेहों का तार्किक समाधान किया.. उन्होंने अद्वैत वेदांत को मजबूत किया.. मोदी सरकार ने राम मंदिर का निर्माण करवाया, धारा 370 हटाई, तीन तलाक खत्म किया, यूसीसी की शुरुआत की.. योग-आयुर्वेद को बढ़ावा दिया.. गौ सेवा की और तीर्थों (बद्रीनाथ, केदारनाथ, काशी विश्वनाथ, महाकाल, सोमनाथ) का जीर्णोद्धार किया.. वहीं ये काम सिर्फ आस्था के नहीं, बल्कि समाज कल्याण से जुड़े हैं.. संतों के आशीर्वाद से सनातन अनुयायी निराश होने वाला शासन कभी नहीं आएगा…
शाह ने कहा कि सनातन धर्म को मिटाना आसान नहीं है.. यह भारत की संस्कृति और पहचान है.. भाषण गुजरात में होने के कारण स्वामीनारायण संप्रदाय की तारीफ भी की गई.. जो सनातन का हिस्सा है.. वहीं मोदी सरकार को सनातन का रक्षक बताते हुए.. शाह का पूरा भाषण था..
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान.. मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती संगम स्नान करने गए.. प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन या प्रमाण पत्र के कारण उनके पालकी या रथ को रोका.. शंकराचार्य ने इसे अपमान बताया और कहा कि उनकी आत्मा व्यथित है.. शंकराचार्य ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया.. और उन्होंने अनशन किया.. उनके समर्थकों ने प्रदर्शन किए.. विपक्षी दलों ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया.. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि योगी को माफी मांगनी चाहिए.. उमा भारती जैसे भाजपा नेताओं ने भी प्रशासन की आलोचना की.. कि शंकराचार्य से शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगना गलत था..
वहीं योगी आदित्यनाथ ने प्रतिक्रिया में कहा कि कई कालनेमि साधु के वेश में सनातन को कमजोर कर रहे हैं.. आपको बता दें कि कालनेमि रामायण का राक्षस है.. जो भ्रम फैलाता है.. योगी ने स्पष्ट किया कि उनका इशारा उन पर है.. जो 1990 में कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले थे.. या धर्म की आड़ में राजनीति करते हैं.. वहीं 28 जनवरी 2026 की सुबह शंकराचार्य ने विरोध समाप्त कर माघ मेला छोड़ दिया.. वे बिना स्नान के भारी मन से काशी के लिए रवाना हो गए.. और उन्होंने प्रेस में कहा कि मन इतना व्यथित है.. कि आगे नहीं रह सकते.. प्रशासन ने मामले को शांत करने की कोशिश की.. लेकिन विवाद खत्म नहीं हुआ..



