टेंडर घोटाले में फंसे सेना अधिकारी, CBI ने किया गिरफ्तार

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सेना के टेंडरों में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के आरोप में कर्नल हिमांशु बाली को गिरफ्तार किया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सेना के टेंडरों में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के आरोप में कर्नल हिमांशु बाली को गिरफ्तार किया है. FIR के अनुसार, कानपुर की एक कंपनी को अनुचित तरीके से टेंडर दिलाए गए, जिसके बदले कर्नल बाली ने रिश्वत ली.

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सेना के टेंडरों में कथित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामले में बड़ी कार्रवाई की है. CBI ने ईस्टर्न कमांड, फोर्ट विलियम (कोलकाता) में तैनात आर्मी ऑर्डिनेंस कॉर्प्स के कर्नल हिमांशु बाली (Himanshu Bali) को गिरफ्तार किया है.इस मामले में पहले ही FIR दर्ज की जा चुकी थी, जिसमें कर्नल बाली समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है

FIR के अनुसार, कानपुर स्थित कंपनी Eastern Global Limited के संचालकों पर सेना के टेंडर हासिल करने के लिए रिश्वत देने का आरोप है. जांच एजेंसी का कहना है कि कंपनी को अनुचित तरीके से कई टेंडरों में फायदा पहुंचाया गया.

कर्नल हिमांशु बाली पर आरोप
CBI के मुताबिक, कर्नल हिमांशु बाली उस समय ईस्टर्न कमांड, फोर्ट विलियम, कोलकाता में तैनात थे. आरोप है कि उन्होंने टेंडर दिलाने, घटिया सैंपल पास कराने और बढ़े हुए बिल क्लियर कराने के बदले रिश्वत ली. FIR में दावा किया गया है कि मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान एक बड़े टेंडर को रिश्वत के बदले कंपनी को दिलाया गया.

कर्नल और कंपनी के प्रतिनिधियों की मुलाकात
जांच में यह भी सामने आया कि 22 अप्रैल 2026 को कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में कर्नल बाली और कंपनी के प्रतिनिधियों की मुलाकात हुई थी. इसके दो दिन बाद यानी 24 अप्रैल को संबंधित टेंडर कंपनी को मिल गया. CBI ने आरोप लगाया है कि 16 मई 2026 को कर्नल बाली ने रिश्वत की बाकी रकम मांगी थी. करीब 50 लाख रुपए हवाला के जरिए दिल्ली-NCR पहुंचाने की तैयारी की जा रही थी.

कई लोग बनाए गए आरोपी
इस मामले में अक्षत अग्रवाल, मयंक अग्रवाल, आशुतोष शुक्ला, नरेश पाल और अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. केस भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) के तहत दर्ज किया गया है. मामले की जांच CBI के DSP सुनील कुमार कर रहे हैं. और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को खंगाला जा रहा है. वहीं इस कार्रवाई के बाद सेना के टेंडर सिस्टम में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं.

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