सुप्रीम कोर्ट में अश्विनी उपाध्याय को मिली सलाह, कोर्ट ने क्यों कहा-अच्छे केस को खराब मत करो?
14 साल तक के बच्चों को शिक्षा देने वाले संस्थानों के पंजीकरण, मान्यता और निगरानी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वकील अश्विनी उपाध्याय को रिट याचिका के बजाय अवमानना याचिका दाखिल करने की सलाह दी.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: 14 साल तक के बच्चों को शिक्षा देने वाले संस्थानों के पंजीकरण, मान्यता और निगरानी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वकील अश्विनी उपाध्याय को रिट याचिका के बजाय अवमानना याचिका दाखिल करने की सलाह दी.
14 साल तक के बच्चों को सेक्युलर/धार्मिक शिक्षा देने वाले सभी संस्थानों के रजिस्ट्रेशन, मान्यता, सुपरविज़न और मॉनिटरिंग की मांग के से जुड़े मामले में लेकर सोमवार (10 अगस्त) को सुप्रीम कोर्ट ने वकील अश्विनी उपाध्याय को एक अहम सलाह दी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपने ही अच्छे केस को खराब मत करो. कोर्ट ने कहा कि रिट नहीं अवमानना याचिका दायर करें. जिसके बाद वकील ने याचिका वापस ले ली.
इस मामले पर जस्टिस अरविंद कुमार ने वकील अश्विनी उपाध्याय से कहा कि आप पहले भी इस कोर्ट में आए थे. कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए ‘रिट ऑफ़ मैंडमस’ जारी किया था कि वो दो महीने के भीतर आपकी अर्ज़ी पर विचार करें.
अश्विनी उपाध्याय ने कोर्ट से क्या कहा
वहीं अश्विनी उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि तीन महीने बीत जाने के बावजूद अधिकारियों ने उनकी अर्जी पर कोई विचार नहीं किया है. इस पर जस्टिस अरविंद कुमार ने पूछा कि ऐसी स्थिति में आपके पास क्या उपाय है. उपाध्याय ने कहा कि उन्होंने इसीलिए यह रिट याचिका दायर की है.
अवमानना याचिका दायर करें…’
इस पर जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा कि यह याचिका एक मिनट से ज़्यादा नहीं टिकेगी. तीसरी रिट याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज कर दिया जाएगा. जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा कि उपाय आसान है. उन्होंने वकील अश्विनी उपाध्याय से कहा कि जाकर अवमानना याचिका दायर करें. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट उस पर सुनवाई करेगा.
संस्थानों पर TET लागू करने का मुद्दा
सुनवाई के दौरान अश्विनी उपाध्याय ने संविधान के अनुच्छेद 26 और 30 से जुड़े बड़े कानूनी मुद्दे और माइनॉरिटी संस्थानों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET लागू करने का मुद्दा भी उठाने की कोशिश की. हालांकि जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा कि उस मुद्दे का आपके मौजूदा मामले से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने वकील से कहा कि आपकी रिट पहले से ही आपके पक्ष में है.
‘आपको कभी भी ‘सेल्फ-गोल’ नहीं करना चाहिए’
जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा कि हमें आपके अधिकार को लागू करने का आदेश पहले ही मिल चुका है. इसे कैसे लागू करें? अवमानना याचिका दायर करें. जस्टिस कुमार ने कहा कि आपको कभी भी ‘सेल्फ-गोल’ नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम आपको सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज़ कमिटी के सदस्य के तौर पर मुफ्त में सलाह दे रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि एक के बाद एक रिट याचिका दायर करने के बजाय सही उपाय अपनाएं. कोर्ट ने याचिका वापस लेने की मांग को मंजूरी दी. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में दर्ज किया कि याचिका वापस लेने की छूट के साथ उचित कदम उठाएं.



