असम का सियासी रण : आरोपों की आंधी में घिरे सीएम हिमंत बिस्वा सरमा और परिवार

  • तीन पासपोर्ट, गोल्ड वीजा और करोड़ों का खेल कांग्रेस के आरोपों की बौछार
  • सीएम का पलटवार एफआईआर की चेतावनी लेकिन सबूतों की जंग जारी
  • चुनावी मौसम में नैरेटिव वार सच सियासत और सनसनी का टकराव

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। असम की सियासत इस वक्त सिर्फ चुनावी भाषणों तक सीमित नहीं है। यहां शब्द अब हथियार बन चुके हैं और हर आरोप एक बम की तरह फट रहा है। चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने जो पत्ते खोले हैं उन्होंने राज्य की राजनीति में हलचल नहीं बल्कि भूचाल ला दिया है। एक तरफ सत्ता में बैठी भाजपा और उसके मजबूत नेता हिमंत बिस्वा सरमा हैं जो खुद को विकास और निर्णायक नेतृत्व का चेहरा बताते हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस के नेता गौरव गोगई और पवन खेड़ा हैं। जिन्होंने सीधे सत्ता के केंद्र पर निशाना साधते हुए गंभीर आरोपों की झड़ी लगा दी है। यह लड़ाई अब सिर्फ वोटों की नहीं रही बल्कि यह विश्वास बनाम आरोपों की लड़ाई बन चुकी है।

तीन पासपोर्ट और गोल्ड वीजा सवालों का तूफान

कांग्रेस का सबसे बड़ा और सनसनीखेज आरोप यही है कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास एक नहीं बल्कि कई देशों से जुड़े दस्तावेज हैं। जिसमें दुबई का गोल्ड वीजा और दो अन्य देशों के पासपोर्ट होने का दावा किया गया है। गौरव गोगई और पवन खेड़ा ने इसे कानूनी रूप से असंभव बताते हुए सवाल उठाया कि क्या एक भारतीय नागरिक एक साथ कई देशों की नागरिकता या पासपोर्ट रख सकता है? यह सवाल सीधा है लेकिन इसका जवाब उतना ही पेचीदा क्योंकि अगर आरोप सही साबित होते हैं तो मामला सिर्फ राजनीति का नही कानून का भी बन सकता है।

तंज बना राजनीतिक हथियार बंटी और बबली

सबसे दिलचस्प और विवादास्पद पहलू रहा कांग्रेस का यह तंज जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी को बंटी और बबली कहकर संबोधित किया। यह सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि एक पूरा नैरेटिव सेट करने की कोशिश है जिसमें सत्ता को चालाकी और भागने की तैयारी के रूप में पेश किया जा रहा है। कांग्रेस के इस आरोप पर सीएम हिमंत बिसवा की ओर से एफआईआर कराने का पलटवार किया गया है। आरोपों के बीच सीएम ने चुप्पी नहीं साधी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह सब झूठ और बदनाम करने की साजिश है और वे आरोप लगाने वालों पर एफआईआर दर्ज कराएंगे। सीएम हिमंत बिस्वा के जवाब के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के आरोपों में और ज्यादा धार आ गयी और उन्होंने सीएम को चुनौती देते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज कराने में 48 घंटे का इंतजार मत कीजिए फौरन एफआईआर दर्ज करावाइये।

शेल कंपनियां और विदेशी ट्रांजैक्शन सियासत का काला पहलू

आरोप यहीं नहीं रुकते। कांग्रेस का दावा है कि मुख्यमंत्री और उनसे से जुड़े लोगों ने कई शेल कंपनियां बनाकर करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का रास्ता खोला है। पवन खेड़ा ने बताया कि कंपनी के डायरेकटर के तौर पर तीन अलग—अलग नाम लिखे गये हैं जोकि सीएम के बेटे और उनकी पत्नी के हैं। कंपनी के जरिये अमेरिका में पैसे ट्रांसफर किए हैं। इस तरह के आरोप भारतीय राजनीति में नये नहीं है लेकिन हर बार जब यह सामने आता है तो जनता के मन में एक ही सवाल उठता है कि क्या सत्ता सिर्फ सेवा के लिए है या फिर संपत्ति बनाने का जरिया बन चुकी है।

चुनाव से पहले आखरी दांव

कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोप पासपोर्ट, गोल्ड वीजा, शेल कंपनियां निश्चित तौर पर सुर्खियां बना रहे हैं लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या ये आरोप जमीन पर वोट में तब्दील हो पाएंगे? हकीकत यह है कि असम की राजनीति लंबे समय से हिंदुत्व बनाम भ्रष्टाचार के दो ध्रुवों के बीच झूलती रही है। भाजपा ने अपनी पूरी ताकत पहचान, सुरक्षा और हिंदुत्व के नैरेटिव पर खड़ी की है जबकि कांग्रेस इस बार भ्रष्टाचार, पारदर्शिता और जवाबदेही को केंद्र में लाने की कोशिश कर रही है। अभी तक के चुनावी ट्रेंड को देखे तो सामने आता है कि मतदाता बड़े आरोपों से नहीं अपने रोजमर्रा के मुद्दों से ज्यादा प्रभावित होता है। भाजपा का वोट बैंक काफी हद तक वैचारिक रूप से जुड़ा हुआ है। धार्मिक पहचान, घुसपैठ का मुद्दा, और मजबूत नेतृत्व यह ऐसे फैक्टर हैं जो आसानी से नहीं हिलते। वहीं कांग्रेस के आरोप अगर ठोस सबूतों के साथ लगातार जनता तक पहुंचते हैं तो यह नैतिक सवाल जरूर खड़ा कर सकते हैं लेकिन उसे वोट में बदलने के लिए जमीनी संगठन और भरोसा दोनों चाहिए। असम चुनाव में जमीनी मुद्दे असली खेल यहीं है। असम के मतदाता के लिए असली मुद्दे आज भी वही हैं। रोजगार की कमी युवाओं में असंतोष। गरीबी और महंगाई ग्रामीण इलाकों में असर। बाढ़ और हिंसा हर साल की चुनौती स्थानीय पहचान और सुरक्षा। अगर कांग्रेस इन मुद्दों को आरोपों के साथ जोड़कर पेश कर पाती है तभी उसका हमला असरदार होगा। वरना बड़े आरोप टीवी डिबेट तक सिमट सकते हैं।

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