हिमंता सरमा के बयान पर बांग्लादेश नाराज़ | ढाका में भारतीय उच्चायुक्त तलब, बढ़ा कूटनीतिक तनाव

हिमंता सरमा के एक बयान के बाद बांग्लादेश ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है... धाका में भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया गया...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात नहीं बल्कि भारत और बांग्लादेश के बीच एक नया राजनयिक विवाद सामने आया है.. बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बाधे को तलब किया है.. बांग्लादेश ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की कुछ टिप्पणियों पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है.. यह घटना 30 अप्रैल 2026 को हुई.. बांग्लादेश विदेश मंत्रालय की महानिदेशक इशरत जहां ने भारतीय राजनयिक को बुलाकर ढाका का पक्ष साफ-साफ बताया.. UNB न्यूज़ सर्विस और ढाका ट्रिब्यून जैसी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार.. इशरत जहां ने कहा कि सरमा के बयान दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों की भावना को कमजोर करते हैं.. और उन्होंने इन बयानों को अपमानजनक बताया और बांग्लादेश की नाराजगी जाहिर की..

पिछले हफ्ते असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया.. उन्होंने लिखा कि असम में 20 विदेशी नागरिक पकड़े गए.. और उन्हें बांग्लादेश वापस भेज दिया गया.. सरमा ने कड़ी भाषा में कहा कि बदतमीज लोग नरम भाषा नहीं समझते.. हम असम से घुसपैठियों को बाहर निकालते वक्त इस बात को लगातार याद रखते हैं.. 20 अवैध बांग्लादेशियों को कल रात वापस भेज दिया गया..

इसके अलावा एक इंटरव्यू में सरमा ने कहा कि वे हर सुबह प्रार्थना करते हैं कि.. मुहम्मद यूनुस के समय जैसी स्थिति बनी रहे, यानी भारत-बांग्लादेश संबंध ज्यादा अच्छे न हों.. उन्होंने कहा कि जब दोनों देशों के बीच संबंध अच्छे होते हैं.. तो अवैध घुसपैठियों को वापस भेजना मुश्किल हो जाता है.. और उन्होंने सीमा सुरक्षा बल और बांग्लादेश राइफल्स के बीच सहयोग पर भी चिंता जताई..

सरमा ने पुश बैक (रात में घुसपैठियों को सीमा पार धकेलने) की प्रक्रिया का भी जिक्र किया.. उन्होंने कहा कि औपचारिक डिपोर्टेशन मुश्किल है.. क्योंकि बांग्लादेश अक्सर बिना सबूत के लोगों को वापस नहीं लेता.. इसलिए असम प्रशासन रात के समय ऐसे लोगों को सीमा पर ले जाकर वापस भेज देता है..

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने इन बयानों को अपमानजनक और द्विपक्षीय संबंधों के लिए हानिकारक बताया.. इशरत जहां ने पवन बाधे से कहा कि संवेदनशील मुद्दों पर बात करते समय दोनों देशों को संयम बरतना चाहिए.. बांग्लादेश ने औपचारिक नोट ऑफ प्रोटेस्ट भी सौंपा.. ढाका का कहना है कि ऐसे बयान न सिर्फ संबंधों को प्रभावित करते हैं.. बल्कि दोनों देशों के बीच सद्भावना को भी नुकसान पहुंचाते हैं.. बांग्लादेश ने भारत से अपील की कि वह असम सीएम के बयानों पर नियंत्रण रखे और भविष्य में सतर्क रहे..

भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध लंबे समय से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं.. दोनों देश 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं.. व्यापार, नदियां, संस्कृति और सुरक्षा जैसे कई मुद्दे दोनों को जोड़ते हैं.. 2024 में शेख हसीना की सरकार के गिरने के बाद स्थिति बदल गई.. नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार आई.. इस दौरान दोनों देशों के संबंध काफी खराब हो गए.. यूनुस सरकार पर भारत-विरोधी रुख अपनाने के आरोप लगे.. सीमा पर तनाव बढ़ा, अवैध घुसपैठ, रोहिंग्या मुद्दा और आर्थिक सहयोग प्रभावित हुआ..

फरवरी 2026 में बांग्लादेश में संसदीय चुनाव हुए.. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की.. तारिक रहमान प्रधानमंत्री बने.. नई सरकार के आने के बाद दोनों देश संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं.. हाल ही में बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने दिल्ली का दौरा भी किया.. दोनों पक्ष व्यापार, सीमा प्रबंधन और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की बात कर रहे हैं.. इसी बीच हिमंत बिस्वा सरमा के बयान आए.. जिससे नई सरकार को असुविधा हुई.. बांग्लादेश की नई सरकार भारत के साथ अच्छे संबंध चाहती है.. लेकिन असम सीएम के कड़े शब्दों ने विवाद पैदा कर दिया..

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा घुसपैठ के मुद्दे पर बहुत सक्रिय रहते हैं.. वे बार-बार कहते हैं कि असम में बांग्लादेश से अवैध रूप से आने वाले लोगों की वजह से स्थानीय संस्कृति, भाषा, भूमि.. और रोजगार पर असर पड़ रहा है.. सरमा का कहना है कि हिंदू शरणार्थी.. और मुस्लिम घुसपैठिए में अंतर है.. वे CAA (नागरिकता संशोधन कानून) के तहत हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात करते हैं.. जबकि मुस्लिम घुसपैठियों को वापस भेजने पर जोर देते हैं..

असम सरकार ने पिछले कुछ महीनों में सैकड़ों लोगों को पुश बैक किया है.. सरमा का दावा है कि हाल के दिनों में 400 से ज्यादा लोगों को वापस भेजा गया.. वे कहते हैं कि औपचारिक तरीके से डिपोर्टेशन मुश्किल है.. इसलिए रात के समय सीमा पर ऐसी कार्रवाई की जाती है.. यह मुद्दा असम की राजनीति का बड़ा हिस्सा है.. असम में NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स) और CAA जैसे मुद्दों पर लंबे समय से बहस चल रही है.. जब एक देश दूसरे देश के किसी नेता या अधिकारी के बयान पर आपत्ति करता है.. तो वह आमतौर पर उस देश के राजनयिक को तलब करता है.. भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बाधे को बुलाकर बांग्लादेश ने अपना विरोध दर्ज कराया..

 

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