फ्लाइट उड़ाने से पहले पायलटों का होता है ये टेस्ट, गांजा-अफीम से लेकर शराब तक की जांच

एयर इंडिया की फ्लाइट में अचानक ऊंचाई कम होने की घटना के बाद पायलट के शुरुआती ड्रग स्क्रीनिंग टेस्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: एयर इंडिया की फ्लाइट में अचानक ऊंचाई कम होने की घटना के बाद पायलट के शुरुआती ड्रग स्क्रीनिंग टेस्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर पायलट का डोप टेस्ट और ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट कैसे होता है?

बीते 4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट में अचानक करीब 300 फीट की ऊंचाई कम होने की घटना के बाद अब विमान के कप्तान की जांच चर्चा में है. घटना के बाद कराए गए शुरुआती ड्रग स्क्रीनिंग टेस्ट का रिजल्ट ‘निगेटिव नहीं’ आया है और सैंपल को कंफर्मेशन के लिए आगे की जांच में भेजा गया है.

यानी अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पायलट ने किसी प्रतिबंधित पदार्थ का सेवन किया था. जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी. इस घटना के बाद दोनों पायलटों को फिलहाल ड्यूटी से हटाया गया है और मामले की जांच की जा रही है.

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर विमान उड़ाने वाले पायलट का डोप टेस्ट कैसे होता है? इसमें क्या जांच की जाती है और अगर शुरुआती टेस्ट में कुछ संदिग्ध मिलता है तो आगे क्या प्रॉसेस होता है?

आम तौर पर डोप टेस्ट का मकसद शरीर में ऐसे नशीले या साइकोएक्टिव पदार्थों की मौजूदगी का पता लगाना होता है, जो किसी व्यक्ति की सोचने-समझने, प्रतिक्रिया देने या फैसला लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं. वहीं शराब की जांच के लिए पायलट और क्रू का ब्रीथ-एनालाइजर टेस्ट अलग से किया जाता है.

नशे को लेकर बेहद सख्त हैं नियम

पायलट की ड्यूटी सीधे सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी होती है, इसलिए एविएशन सेक्टर में नशे को लेकर नियम बेहद सख्त हैं. DGCA के नियमों में सिर्फ उड़ान के समय नशे में रहने पर रोक नहीं है, बल्कि उड़ान शुरू होने से पहले भी शराब और कुछ खास तरह की दवाओं या नशीले पदार्थों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम हैं.

उड़ान के दौरान भी इनका सेवन नहीं किया जा सकता और ड्यूटी के समय शरीर में शराब की कोई भी पहचान योग्य मात्रा नहीं होनी चाहिए. इसके अलावा अगर किसी साइकोएक्टिव पदार्थ की वजह से क्रू मेंबर की सुरक्षित तरीके से काम करने की क्षमता प्रभावित होती है, तो वह अपनी लाइसेंस या अनुमति के तहत ड्यूटी नहीं कर सकता.

पायलट की जांच में क्या-क्या होता है?

ब्रीथ-एनालाइजर टेस्ट- शरीर में शराब की मौजूदगी की जांच.डोप/ड्रग स्क्रीनिंग- प्रतिबंधित या साइकोएक्टिव पदार्थों की मौजूदगी का पता लगाने की शुरुआती जांच.कन्फर्मेटरी टेस्ट- संदिग्ध शुरुआती परिणाम आने पर आगे की जांच से पुष्टि.

ब्रीथ-एनालाइजर टेस्ट कैसे होता है?

ब्रीथ-एनालाइजर टेस्ट में पायलट या क्रू मेंबर मशीन में सांस छोड़ता है. मशीन सांस में मौजूद अल्कोहल के आधार पर रीडिंग देती है. DGCA के नियमों के अनुसार, सुरक्षित उड़ान के लिए रक्त में अल्कोहल का स्तर शून्य होना चाहिए.

टेस्ट शुरू करने से पहले मेडिकल कर्मचारी मशीन की रीडिंग 0.000 होने की जांच करते हैं. रोजाना कंट्रोल टेस्ट भी किया जाता है ताकि मशीन और उससे जुड़े प्रिंटर के सही तरीके से काम करने की पुष्टि हो सके.

अगर पहली जांच में रिजल्ट पॉजिटिव आता है तो तुरंत अंतिम फैसला नहीं किया जाता, 20-25 मिनट के अंतर के बाद दूसरा टेस्ट किया जाता है. इस दौरान इस्तेमाल होने वाली मशीन पर कंट्रोल टेस्ट भी किया जाता है. पहली और दूसरी दोनों रीडिंग रिकॉर्ड की जाती हैं और उनका प्रिंटआउट लिया जाता है. दूसरे टेस्ट के दौरान फ्लाइट डिस्पैच या ऑपरेशन विभाग का एक गवाह भी मौजूद रहता है.

भारत आने वाले पायलट का टेस्ट कब होता है?

भारत से उड़ान भरने वाली शेड्यूल्ड, चार्टर और नॉन-शेड्यूल्ड उड़ानों में फ्लाइट क्रू और केबिन क्रू का पहली उड़ान से पहले ब्रीथ-एनालाइजर टेस्ट किया जाता है.

वहीं भारत के बाहर से आने वाली शेड्यूल्ड उड़ानों में पायलट और केबिन क्रू का भारत में पहली लैंडिंग पर पोस्ट-फ्लाइट ब्रीथ-एनालाइजर टेस्ट किया जाता है. विदेश से भारत आने वाले क्रू के लिए लैंडिंग के बाद टेस्ट होना सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है. यह जरूरी नहीं कि हर बार किसी विशेष शक या घटना की वजह से ही टेस्ट किया जा रहा हो.

डोप टेस्ट और ब्रीथ-एनालाइजर में अंतर क्या है?

दोनों टेस्ट को एक जैसा समझना सही नहीं है. ब्रीथ-एनालाइजर खास तौर पर शराब की मौजूदगी जांचने के लिए किया जाता है, जबकि डोप टेस्ट या ड्रग स्क्रीनिंग का उद्देश्य शरीर में ऐसे नशीले या साइकोएक्टिव पदार्थों का पता लगाना होता है जो व्यक्ति की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं.

मौजूदा एयर इंडिया मामले में शुरुआती ड्रग स्क्रीनिंग को अंतिम रिपोर्ट नहीं माना जा सकता. अगर शुरुआती स्क्रीनिंग में कोई संदिग्ध संकेत मिलता है तो सैंपल को आगे की जांच के लिए भेजा जा सकता है. अंतिम पुष्टि संबंधित जांच पूरी होने के बाद ही होती है.

पायलट के लिए DGCA के नियम कितने सख्त हैं?

DGCA के नियमों के मुताबिक, उड़ान शुरू होने से 12 घंटे पहले तक पायलट या दूसरे क्रू मेंबर को शराब, सेडेटिव, नारकोटिक या स्टिमुलेंट ड्रग का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. उड़ान के दौरान भी इसका सेवन नहीं किया जा सकता. इसके अलावा ऐसा कोई साइकोएक्टिव पदार्थ नहीं होना चाहिए जिससे क्रू की सुरक्षित तरीके से काम करने की क्षमता प्रभावित हो.

नियमों के तहत भारत से उड़ान भरने वाले क्रू का प्री-फ्लाइट ब्रीथ-एनालाइजर टेस्ट होता है. अगर कोई क्रू मेंबर बिना टेस्ट कराए उड़ान संचालित करता है तो उसे पहली लैंडिंग पर ड्यूटी से हटाने और DGCA को रिपोर्ट करने का प्रावधान है.

कुछ परिस्थितियों में, जैसे किसी एयरपोर्ट पर टेस्ट की सुविधा उपलब्ध न होना या फ्लाइट का अचानक किसी दूसरे एयरपोर्ट पर डायवर्ट होना, पहली लैंडिंग के बाद पोस्ट-फ्लाइट टेस्ट कराया जा सकता है.

पायलट ही नहीं, केबिन क्रू-स्टाफ की भी जांच

नियम केवल पायलटों तक सीमित नहीं हैं. फ्लाइट और केबिन क्रू के अलावा विमान को टैक्सी करने वाले मेंटेनेंस स्टाफ की भी शराब के लिए ब्रीथ-एनालाइजर जांच की जाती है.

फ्लाइंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में हर इंस्ट्रक्टर का दिन की पहली उड़ान से पहले टेस्ट किया जाना जरूरी है, जबकि कम से कम 40% स्टूडेंट पायलटों का रोजाना प्री-फ्लाइट टेस्ट किया जाना चाहिए. इन संस्थानों में टेस्ट की रिकॉर्डिंग कैमरे पर करने और रिकॉर्डिंग को छह महीने तक सुरक्षित रखने का भी नियम है.

माउथवॉश-परफ्यूम से भी हो सकता है पॉजिटिव?

DGCA के नियमों में इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि क्रू मेंबर को ऐसे माउथवॉश, टूथ जेल, परफ्यूम या किसी अन्य प्रोडक्ट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जिसमें अल्कोहल मौजूद हो, क्योंकि इससे ब्रीथ-एनालाइजर टेस्ट प्रभावित हो सकता है और पॉजिटिव रिजल्ट आ सकता है. अगर कोई क्रू मेंबर किसी दवा का सेवन कर रहा है तो उसे उड़ान से पहले कंपनी के डॉक्टर से सलाह लेने की बात कही गई है.

टेस्ट पॉजिटिव आए तो क्या होता है?

अगर प्री-फ्लाइट ब्रीथ-एनालाइजर टेस्ट पहली बार पॉजिटिव आता है तो लाइसेंस या अप्रूवल को तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है. दूसरी बार पॉजिटिव होने पर तीन साल तक निलंबन और तीसरी बार पॉजिटिव होने पर लाइसेंस या अप्रूवल रद्द कर दिया जाता है.

वहीं पोस्ट-फ्लाइट टेस्ट में पहली बार पॉजिटिव आने पर लाइसेंस या अप्रूवल को एक साल तक निलंबित किया जा सकता है. अगर पोस्ट-फ्लाइट टेस्ट दूसरी बार पॉजिटिव आता है तो लाइसेंस या अप्रूवल रद्द करने की कार्रवाई हो सकती है.

हादसे के बाद जांच कैसे होती है?

अगर किसी विमान का हादसा हो जाता है या एयरपोर्ट के आसपास दुर्घटना होती है तो क्रू की तुरंत मेडिकल जांच कराई जा सकती है. ऐसे मामलों में सिर्फ सांस की जांच पर निर्भर नहीं रहा जाता, बल्कि ब्लड और यूरिन जैसे सैंपल लिए जा सकते हैं और उनकी डिटेल में केमिकल जांच कराई जाती है. जरूरत पड़ने पर सैंपल फॉरेंसिक लैब में भी भेजे जा सकते हैं.

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