ईरान का बड़ा एक्शन! अमेरिकी सेना में डर, बेस खाली, अराघची की सीधी धमकी
मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है... ईरान के कड़े रुख के बीच खबरें सामने आई हैं कि... अमेरिकी सैनिकों ने कई बेस...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने नया मोड़ ले लिया है.. ईरान के ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के कारण.. अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर तैनात सैनिकों को अपने बेस छोड़कर होटलों.. और अन्य सुरक्षित नागरिक स्थानों पर भेजा जा रहा है.. जिसके चलते ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने खाड़ी देशों के होटल मालिकों को सीधी धमकी देते हुए कहा है कि.. वे अमेरिकी सैनिकों को होटलों में शरण न दें.. और उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी सैनिक नागरिकों को मानव ढाल बना रहे हैं.. इस संघर्ष में अमेरिका को भारी नुकसान हुआ है.. रिपोर्ट्स के अनुसार 12 MQ-9 रीपर ड्रोन, कई KC-135 टैंकर एयरक्राफ्ट, तीन F-15 ईगल, एक F-35, एक F-18.. और एक ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर समेत हजारों करोड़ रुपये के हथियार तबाह हो चुके हैं.. वहीं यह स्थिति पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा रही है..
आपको बता दें कि ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच तनाव फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुआ.. अमेरिका ने ईरान के खार्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों पर हमला किया.. इसके जवाब में ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन.. और मिसाइल हमले शुरू कर दिए.. इन हमलों से कई अमेरिकी बेस क्षतिग्रस्त हो गए.. कुछ बेस तो लगभग रहने लायक नहीं रहे.. न्यूयॉर्क टाइम्स और अन्य रिपोर्टों के अनुसार.. खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी बेस से सैनिकों को निकालकर होटलों.. और ऑफिस स्पेस में शिफ्ट किया गया.. पहले अरब देशों में 400 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात थे.. जिनमें से ज्यादातर को अब बेस से हटा दिया गया है.. कुछ सैनिकों को यूरोप के बेस तक भेजा गया है..
अमेरिकी सैनिकों का बेस छोड़ना ईरान के हमलों की ताकत को दर्शाता है.. ईरान ने दावा किया कि उसने कई अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया.. इन हमलों में ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया.. अमेरिकी सेना ने कुछ हमलों की पुष्टि भी की है.. कई बेस पर सैनिकों को तुरंत निकालना पड़ा.. मिसाइल थ्रेट वार्निंग मिलने के बाद सैनिकों.. और उनके परिवारों को हार्डन शेल्टर में जाना पड़ा.. कई परिवारों को यूरोप के अमेरिकी बेस पर पहुंचाया गया.. जानकारी के मुताबिक यह वर्षों में मिडिल ईस्ट से अमेरिकी परिवारों की सबसे बड़ी निकासी में से एक है..
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस स्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया दी.. उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिकी सैनिक खाड़ी देशों के सैन्य बेस छोड़कर होटलों.. और ऑफिसों में छिप गए हैं.. अराघची ने आरोप लगाया कि अमेरिकी सैनिक स्थानीय नागरिकों को मानव ढाल बना रहे हैं.. उन्होंने खाड़ी देशों के होटल मालिकों से अपील की कि वे अमेरिकी सैन्य अधिकारियों को कमरे न दें.. उन्होंने कहा कि अमेरिका में होटल अधिकारी ऐसे लोगों को बुकिंग देने से मना कर देते हैं.. जो नागरिकों को खतरे में डाल सकते हैं.. और खाड़ी देशों को भी ऐसा ही करना चाहिए.. ईरानी मीडिया ने रिपोर्ट दी कि होटलों में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी उन्हें वैध निशाना बना सकती है..
वहीं यह धमकी क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा रही है.. खाड़ी देश जैसे यूएई, बहरीन और सऊदी अरब अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए महत्वपूर्ण हैं.. ईरान ने यूएई के जेबेल अली, खलीफा और फुजैरा बंदरगाहों को भी खाली करने की चेतावनी दी.. ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने इन बंदरगाहों से उस पर हमले किए.. उसने कहा कि अगर अमेरिकी सैनिक नागरिक क्षेत्रों में छिपे हैं.. तो वे भी निशाने पर आ सकते हैं.. जानकारी के अनुसार यह पहली बार है जब ईरान ने पड़ोसी देशों की गैर-सैन्य संपत्तियों को खुलकर धमकी दी है..



