मिर्ज़ापुर: हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन! लापरवाही पर लालगंज एसडीएम-तहसीलदार तलब

मिर्ज़ापुर में ग्रामसभा की सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण हटाने में लापरवाही पर हाईकोर्ट ने लालगंज के एसडीएम और तहसीलदार को तलब किया। कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मिर्ज़ापुर से एक अहम प्रशासनिक और कानूनी खबर सामने आई है, जिसने पूरे राजस्व तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रामसभा की सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने में लापरवाही बरतने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए लालगंज तहसील के उपजिलाधिकारी और तहसीलदार को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। यह मामला केवल एक गांव का नहीं, बल्कि सरकारी जमीनों पर हो रहे कथित अतिक्रमण और प्रशासनिक निष्क्रियता की बड़ी तस्वीर को उजागर करता है।

वर्षों से चल रही मुहिम, लेकिन कार्रवाई अधूरी

यह मामला लालगंज तहसील के पवारी कला गांव से जुड़ा है, जहां समाजसेवी प्रेम कुमार सिंह पिछले कई वर्षों से ग्रामसभा की सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनका आरोप है कि बार-बार शिकायत और प्रत्यावेदन देने के बावजूद तहसील प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उल्टा मामले को दबाने और टालने की कोशिश की जाती रही, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती गई।

हाईकोर्ट में पहुंचा मामला, खुली प्रशासनिक लापरवाही

लगातार अनदेखी के बाद प्रेम कुमार सिंह ने मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनकी ओर से अधिवक्ता रमेश कुमार तिवारी और संजय पांडेय ने पक्ष रखा। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की और पाया कि प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही की अनदेखी नहीं की जा सकती।

एसडीएम और तहसीलदार को व्यक्तिगत रूप से तलब

हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए लालगंज के एसडीएम और तहसीलदार को 28 अप्रैल 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता और मुख्य स्थायी अधिवक्ता को भी अदालत में उपस्थित रहने के लिए कहा गया है। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि इतने समय बाद भी ग्रामसभा की भूमि को अतिक्रमण मुक्त क्यों नहीं कराया गया।

प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल

यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि जब सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण के स्पष्ट आरोप और शिकायतें मौजूद हों, तब भी कार्रवाई में इतनी देरी क्यों होती है? हाईकोर्ट की सख्ती से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि अब इस तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना होगा।

पवारी कला गांव के ग्रामीण लंबे समय से इस उम्मीद में हैं कि उनकी सार्वजनिक जमीन अतिक्रमण से मुक्त होगी। लेकिन प्रशासनिक ढिलाई के कारण यह मामला वर्षों तक लंबित रहा। अब जब मामला सीधे हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है, तो ग्रामीणों में न्याय मिलने की उम्मीद फिर से जागी है।

अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें

इस प्रकरण की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को होनी है, जिसमें सभी संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। अब देखना यह होगा कि अदालत में पेश होने के बाद प्रशासन इस मामले में क्या स्पष्टिकरण देता है और क्या वास्तव में ग्रामसभा की जमीन अतिक्रमण से मुक्त हो पाती है या नहीं।

रिपोर्ट – संतोष देव गिरी

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