UAE पर Iran का बड़ा हमला, दाग दीं 16 बैलिस्टिक मिसाइलें, 117 से ज्यादा ड्रोन से किया Attack 

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है...जिस जंग की शुरुआत सीमित सैन्य कार्रवाई से हुई थी...

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है…जिस जंग की शुरुआत सीमित सैन्य कार्रवाई से हुई थी…

वो अब पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में लेती नजर आ रही है…ईरान ने साफ संकेत दे दिया है कि जो भी देश अमेरिका और इजराइल का साथ देगा…उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी…इसी चेतावनी के बीच ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE पर बड़ा सैन्य हमला करते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन की झड़ी लगा दी…बताया जा रहा है कि ईरान की तरफ से एक साथ 117 से ज्यादा मिसाइलें दागी गईं…जिनमें से कई UAE के अलग-अलग हिस्सों में जाकर गिरीं….और इस बात खुद UAE ने कबूला भी हैय….इस हमले ने खाड़ी देशों को ये संदेश दे दिया है कि…ये जंग अब सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच सीमित नहीं रही….

जानकारी के मुताबिक, UAE पर इस हमले में कम से कम 16 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं…जबकि बाकी हमले ड्रोन और अन्य मिसाइल सिस्टम के जरिए किए गए…UAE के कई इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनी गईं और कुछ जगहों पर भारी नुकसान की खबरें सामने आईं…खास तौर पर तटीय क्षेत्रों और सैन्य ठिकानों के आसपास कई मिसाइलें गिरीं…जिससे वहां अफरातफरी का माहौल बन गया…UAE के एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया…लेकिन कुछ मिसाइलें रोकने में नाकाम भी रही…जिनके कारण कई इमारतों और इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा….

UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि…ये समय बेहद कठिन है और देश को एकजुट होकर इस चुनौती का सामना करना होगा…उन्होंने कहा कि यूएई किसी पर हमला नहीं कर रहा…लेकिन उस पर लगातार हमले किए जा रहे हैं…उन्होंने भरोसा दिलाया कि देश की सेना और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और हर खतरे का जवाब देने के लिए तैयार हैं…हालांकि उन्होंने ये भी संकेत दिया कि मौजूदा हालात पूरे क्षेत्र के लिए चिंताजनक हैं…

ईरान का ये हमला अचानक नहीं हुआ…पिछले कुछ दिनों से खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था…अमेरिका और इजराइल ने जब ईरान के तेल भंडार और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया…तो तेहरान ने खुलकर चेतावनी दी थी कि…इसका जवाब सिर्फ इजराइल को ही नहीं बल्कि उन सभी देशों को मिलेगा जो अमेरिका के साथ खड़े हैं…इसी चेतावनी के बाद ईरान ने अपने पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया…

इससे पहले ईरान ने कुवैत में भी बड़ा हमला किया था…रिपोर्टों के मुताबिक, कुवैत एयरपोर्ट के पास मौजूद फ्यूल टैंकों को निशाना बनाया गया…जिससे वहां आग लग गई और तेल भंडारण ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा…इस हमले के बाद कुवैत को अस्थायी रूप से तेल उत्पादन में कटौती करनी पड़ी…कुवैत सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के साथ-साथ अपने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील भी की…क़तर भी इस संघर्ष से अछूता नहीं रहा…क़तर के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि…उस पर कम से कम 10 बैलिस्टिक मिसाइलें और दो क्रूज मिसाइलें दागी गईं…हालांकि वहां की एयर डिफेंस प्रणाली ने अधिकांश मिसाइलों को रास्ते में ही रोक लिया…लेकिन कुछ मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंच गईं…

जिससे सैन्य ठिकानों के आसपास हल्का नुकसान हुआ…क़तर ने इस हमले को क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा बताया है…सऊदी अरब ने भी दावा किया है कि उसकी राजधानी रियाद पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की गई थी…हालांकि सऊदी एयर डिफेंस सिस्टम ने इन ड्रोन को समय रहते मार गिराया और किसी बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई…इसके बावजूद सऊदी अरब ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और कई अहम सैन्य ठिकानों पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है…लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान UAE को झेलना पड़ रहा है…

मिली जानकारी के अनुसार, जंग के पहले 8 दिनों में ही UAE पर 200 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें और 1300 से अधिक ड्रोन से हमले किए जा चुके हैं…दुबई और अबू धाबी के आसपास कई इलाकों में इन हमलों के निशान दिखाई दे रहे हैं…तटीय क्षेत्रों में मौजूद कई महत्वपूर्ण ढांचे प्रभावित हुए हैं…जिससे वहां के लोगों में भय का माहौल है…

वहीं ईरान की रणनीति साफ दिखाई दे रही है…वो सीधे अमेरिका से टकराव के साथ-साथ उसके क्षेत्रीय सहयोगियों पर दबाव बना रहा है…ईरान का मानना है कि खाड़ी देशों ने अमेरिका को अपने सैन्य अड्डे इस्तेमाल करने की अनुमति देकर इस संघर्ष में अप्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लिया है…इसलिए अब ईरान उन्हें यह दिखाना चाहता है कि अगर वे अमेरिका के साथ खड़े रहेंगे तो जंग का असर सीधे उनके देशों पर भी पड़ेगा…

इस बीच एक और खतरनाक पहलू सामने आया है…पानी को लेकर बढ़ता संकट…जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने ईरान में कुछ जल आपूर्ति प्रणालियों को निशाना बनाया है…खास तौर पर ईरान के केश्म द्वीप पर बने एक डिसलिनेशन प्लांट पर हमला किया गया…जो समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने का काम करता है…इस हमले के बाद आसपास के कई गांवों में पानी की सप्लाई प्रभावित हो गई…

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने आरोप लगाया कि अमेरिका इस जंग में पानी को भी हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है…उनका कहना है कि जल संयंत्रों पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के खिलाफ है और इससे आम नागरिकों को भारी नुकसान हो सकता है…ईरान ने इसके जवाब में बहरीन में मौजूद एक डिसलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया…इससे पहले वहां मौजूद अमेरिकी नौसेना के ठिकाने पर भी हमला किया गया…

जिसमें ईरान ने दावा किया कि कई अमेरिकी सैनिक मारे गए और कई घायल हुए…इसके बाद ड्रोन हमले में बहरीन के जल संयंत्र को भारी नुकसान पहुंचा…खाड़ी देशों के लिए ये स्थिति बेहद गंभीर है…क्योंकि यहां के ज्यादातर देश पीने के पानी के लिए समुद्री पानी को साफ करने वाली तकनीक पर निर्भर हैं…कुवैत अपने करीब 90 प्रतिशत पानी के लिए डिस-लिनेशन पर निर्भर है..जबकि ओमान लगभग 86 प्रतिशत पानी इसी प्रक्रिया से प्राप्त करता है…सऊदी अरब में ये आंकड़ा करीब 70 प्रतिशत है और यूएई में भी बड़ी मात्रा में पानी इसी तकनीक से तैयार किया जाता है…

बहरीन तो पूरी तरह इसी पर निर्भर है और क़तर भी अपने लगभग 90 प्रतिशत पानी के लिए डिसलिनेशन संयंत्रों पर निर्भर करता है। ऐसे में अगर इस जंग में जल संयंत्रों को लगातार निशाना बनाया गया तो पूरे खाड़ी क्षेत्र में भीषण जल संकट पैदा हो सकता है…विशेषज्ञों का मानना है कि…अगर इन संयंत्रों में से कोई बड़ा प्लांट नष्ट हो गया तो कुछ ही दिनों में शहरों में पानी की भारी कमी हो सकती है…इससे लाखों लोगों को पीने का पानी नहीं मिल पाएगा और स्वास्थ्य संकट के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पलायन की स्थिति भी बन सकती है…

इसी खतरे को देखते हुए खाड़ी देशों ने अमेरिका पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है कि…वो इस जंग को और ज्यादा खतरनाक दिशा में न ले जाए…क्योंकि अगर जल संयंत्रों को निशाना बनाया जाता रहा…तो इसका असर सिर्फ ईरान या अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा…बल्कि पूरा मिडिल ईस्ट इसकी कीमत चुकाएगा…

कुल मिलाकर, मौजूदा हालात ये संकेत दे रहे हैं कि…मिडिल ईस्ट में ये संघर्ष अब एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है…ईरान का UAE पर 117 मिसाइलों से किया गया हमला…इसी बढ़ते टकराव की सबसे बड़ी चेतावनी माना जा रहा है…यानी ये साफ संदेश है कि अगर खाड़ी देश अमेरिका और ट्रंप प्रशासन का साथ देते रहे…तो उन्हें भी इस जंग की आग में झुलसना पड़ सकता है.

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