Dubai में कामगारों को बड़ी राहत! सैलरी, छुट्टी और सुविधाओं पर नए नियम लागू

दुबई में काम करने वाले श्रमिकों के लिए बड़ी राहत की खबर है... नए नियमों के तहत सैलरी, छुट्टी और कामगारों के अधिकारों... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः अबू धाबी, शारजाह और पूरे संयुक्त अरब अमीरात में काम करने वाले हजारों भारतीय कामगारों के लिए राहत भरी खबर आई है.. हाल के दिनों में ईरान-अमेरिका-इजराइल तनाव के कारण क्षेत्रीय हवाई क्षेत्र बंद होने.. और फ्लाइट्स रद्द होने की वजह से कई लोग अपनी छुट्टियों या व्यक्तिगत काम से बाहर फंस गए हैं.. अब यूएई के श्रम कानून के मुताबिक.. ऐसी मजबूरी की स्थिति में कर्मचारी को समय पर वापस न लौट पाने को गलत अनुपस्थिति नहीं माना जाएगा.. यानी कंपनी ऐसे हालात में कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई.. जैसे सैलरी रोकना या नौकरी से निकालना, आसानी से नहीं कर सकती..

जिसको लेकर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कर्मचारी घर से काम कर सकता है.. और कंपनी सहमत है, तो उसकी सैलरी पूरी तरह जारी रहेगी.. अगर ऑफिस में आना जरूरी है.. और कर्मचारी नहीं पहुंच पाता, तो कंपनी उसे पेड लीव या वार्षिक छुट्टियों का विकल्प दे सकती है.. वहीं सबसे महत्वपूर्ण बात अगर कर्मचारी कंपनी के आधिकारिक काम से विदेश गया था.. और वहीं फंस गया, तो उसके रहने, खाने.. और वापसी का खर्च कंपनी को उठाना पड़ सकता है..

वहीं यह खबर उन लाखों भारतीयों के लिए बड़ी सांत्वना है.. जो यूएई में निर्माण, आईटी, सर्विस, ट्रेड और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में काम करते हैं.. यह राहत यूएई के मुख्य श्रम कानून फेडरल डिक्री-लॉ नंबर 33 ऑफ 2021 पर आधारित है.. इस कानून में स्पष्ट शब्दों में फ्लाइट रद्द या हवाई क्षेत्र बंद होने का जिक्र नहीं है.. लेकिन सामान्य सिद्धांतों के तहत इसे वैध अनुपस्थिति माना जाता है..

कानूनी विशेषज्ञ राजीव सूरी जैसे वकीलों ने हाल ही में गल्फ न्यूज.. और टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि अगर कर्मचारी अपने नियंत्रण से बाहर की वजह.. जैसे युद्ध, सरकारी यात्रा प्रतिबंध या फ्लाइट कैंसलेशन की वजह से वापस नहीं आ पाता.. तो उसकी गैर-उपस्थिति को गलत नहीं ठहराया जा सकता.. कर्मचारी को कंपनी को तुरंत सूचना देनी चाहिए.. मौजूदा स्थिति में यूएई सरकार की ओर से जारी नोटिस खुद सबूत का काम करता है.. इसलिए अलग से प्रूफ देने की जरूरत कम है..

हाल के हफ्तों में ईरान-अमेरिका-इजराइल से जुड़े तनाव ने पूरे मिडिल ईस्ट में हवाई यातायात को प्रभावित किया है.. दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट, अल मकतूम इंटरनेशनल, अबू धाबी.. और अन्य एयरपोर्ट्स पर फ्लाइट्स रद्द हुईं या हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से बंद रहा.. जिससे हजारों यात्री फंस गए.. भारतीय दूतावास और यूएई सरकार ने कुछ राहत दी है.. जिसमें वीजा ओवरस्टे पेनाल्टी माफ करना और कुछ मामलों में रहने-खाने का सहयोग करना शामिल है..

लेकिन कामगारों के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा श्रम कानून से मिल रही है.. कानून के अनुसार, सैलरी काम के बदले दी जाती है.. अगर कर्मचारी काम नहीं कर रहा और कोई वैध वजह नहीं है.. तो कंपनी सैलरी रोक सकती है.. लेकिन फ्लाइट रद्द होना या हवाई क्षेत्र बंद होना वैध वजह मानी जाती है.. इसलिए सैलरी प्रभावित होने की संभावना बहुत कम है..

जानकारी के मुताबिक पहली स्थिति में अगर कर्मचारी के काम का स्वभाव ऐसा है कि.. वह घर से काम कर सकता है.. और कंपनी इस पर सहमत है.. तो सैलरी पूरी तरह जारी रहेगी.. कई आईटी, फाइनेंस, मार्केटिंग.. और एडमिन कंपनियां इस विकल्प को अपना रही हैं.. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि.. कर्मचारी तैयार और इच्छुक है काम करने के लिए, इसलिए कंपनी को सैलरी देनी चाहिए..

दूसरी स्थिति में अगर नौकरी का स्वभाव ऐसा है कि ऑफिस या साइट पर आना जरूरी है.. तो कंपनी एकतरफा सैलरी नहीं रोक सकती.. ऐसे में कंपनी विकल्प दे सकती है.. पेड लीव का इस्तेमाल, वार्षिक छुट्टियां या आपसी सहमति से अनपेड लीव.. लेकिन कंपनी को अच्छे विश्वास से काम करना होगा.. आर्टिकल 34 के तहत छुट्टी खत्म होने के बाद बिना वैध वजह के वापस न आने पर सैलरी नहीं मिलेगी.. लेकिन फ्लाइट समस्या वैध वजह है..

तीसरी और सबसे मजबूत स्थिति में कंपनी के काम से विदेश जाना.. अगर कर्मचारी कंपनी के आधिकारिक बिजनेस ट्रिप पर गया था.. और वहीं फंस गया, तो स्थिति और बेहतर है.. कंपनी को सैलरी जारी रखनी चाहिए.. इसके अलावा, रहने, खाने और वापसी का उचित खर्च कंपनी की जिम्मेदारी हो सकता है.. यह ड्यूटी ऑफ केयर के सिद्धांत पर आधारित है.. कानूनी फर्मों ने स्पष्ट किया है कि.. बिजनेस ट्रिप पर गए कर्मचारियों के लिए कंपनी की जिम्मेदारी ज्यादा स्पष्ट है..

नौकरी से निकालने के मामले में भी सुरक्षा है.. कानून के आर्टिकल 44 के अनुसार.. बिना नोटिस के निकालना केवल गंभीर गलती.. या लंबी अनुपस्थिति के लिए हो सकता है.. लेकिन केवल तब जब अनुपस्थिति बिना वैध वजह के हो.. फोर्स मेजर या असाधारण परिस्थिति में यह लागू नहीं होता.. यूएई सिविल कोड के आर्टिकल 273 फोर्स मेजर से संबंधित है.. अगर कोई अप्रत्याशित घटना अनुबंध को असंभव बना दे.. तो दायित्वों में बदलाव हो सकता है.. कानूनी विशेषज्ञ कहते हैं कि अदालत या MOHRE ऐसे मामलों में कर्मचारी के पक्ष में फैसला कर सकती है..

वहीं यह स्थिति COVID-19 महामारी की याद दिलाती है.. तब भी फोर्स मेजर के तहत कामगारों को सुरक्षा मिली थी.. अब भी वही सिद्धांत लागू हो रहे हैं.. गल्फ न्यूज, टाइम्स ऑफ इंडिया और लेक्सोलॉजी जैसी रिपोर्टों में कानूनी विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि.. कर्मचारियों को डरने की जरूरत नहीं.. लेकिन संवाद बनाए रखना जरूरी है.. भारतीय कामगारों के लिए यह खबर खास तौर पर महत्वपूर्ण है.. यूएई में लाखों भारतीय काम करते हैं.. दुबई, अबू धाबी, शारजाह जैसे शहरों में निर्माण, सर्विस, आईटी और ट्रेड सेक्टर में उनकी बड़ी संख्या है..

 

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